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Parul Chaudhary: दैनिक जागरण यूथ कनेक्ट में पारुल चौधरी का छात्राओं को मंत्र...बड़े सपने देखो, मेहनत करो और कभी मत रुको

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 09 Oct 2026 07:05 PM (IST)

अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी ने दैनिक जागरण के यूथ कनेक्ट कार्यक्रम में छात्राओं को लक्ष्य तय करने, मेहनत करने और ...और पढ़ें

दैनिक जागरण की ओर से मेरठ पब्लिक स्कूल फाॅर गर्ल्स कैंट में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करतीं अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी। जागरण

दैनिक जागरण की ओर से मेरठ पब्लिक स्कूल फाॅर गर्ल्स कैंट में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करतीं अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी। जागरण

HighLights

  1. मेरठ पब्लिक स्कूल फाॅर गर्ल्स कैंट आयोजित कार्यक्रम में पढ़ाई के साथ खेलों से जुड़ने का किया आह्वान।

  2. एशियाई खेलों की पदक विजेता पारुल चौधरी ने साझा किया गांव से ओलिंपिक तक के सफर का संघर्ष।

जागरण संवाददाता, मेरठ। कुछ भी हो जाए, कितनी भी कठिनाई आ जाए, लेकिन रुकना नहीं है। अपना लक्ष्य तय करो, मेहनत करो और खुद पर विश्वास रखो। एशियाई खेलों में स्वर्ण, रजत और दो कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली अंतरराष्ट्रीय एथलीट पारुल चौधरी ने शुक्रवार को छात्राओं को सफलता का यही मंत्र दिया।

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दैनिक जागरण की ओर से मेरठ पब्लिक स्कूल फाॅर गर्ल्स कैंट में आयोजित यूथ कनेक्ट कार्यक्रम में अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और सही दिशा देने की है। उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई के साथ खेलों में भी रुचि लेने और मैदान में उतरकर अपनी प्रतिभा को निखारने की अपील की।

पारुल ने बताया कि एक छोटे से गांव इकौता से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। किसान परिवार में जन्मीं पारुल के सामने शुरुआत में खेलों की दुनिया को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं थी। उनका सपना सिर्फ अपने पैरों पर खड़ा होना और नौकरी पाना था। मां चाहती थीं कि बेटी आत्मनिर्भर बने। इसी सोच के साथ उन्होंने वर्ष 2012 में खेलना शुरू किया।

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बीपी इंटर कालेज भराला में आयोजित प्रतियोगिता में 800 मीटर दौड़ में प्रथम स्थान हासिल करने के बाद स्कूल के पीटीआई ने उन्हें कैलाश प्रकाश स्टेडियम में अभ्यास करने की सलाह दी। यहीं उनकी मुलाकात कोच गौरव त्यागी से हुई, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को तराशने में अहम भूमिका निभाई। पहली प्रतियोगिता में चौथा स्थान मिला, फिर कभी खाली हाथ नहीं लौटीं

पारुल ने बताया कि शुरुआती दिनों में वह 800 और 1500 मीटर दौड़ का अभ्यास करती थीं। प्रशिक्षण शुरू करने के तीन-चार महीने बाद हरिद्वार में आयोजित अंडर-16 राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वह चौथे स्थान पर रहीं। पदक नहीं मिलने से उनके कोच निराश हुए और उन्होंने पारुल से संकल्प लेने को कहा कि अब वह प्रतियोगिता से खाली हाथ नहीं लौटेंगी।

पारुल ने भी मैदान की मिट्टी उठाकर यह ठान लिया कि आगे से पदक जीतने के लिए पूरी मेहनत करेंगी। उन्होंने कहा कि उस दिन के बाद से उन्होंने इस संकल्प को अपनी ताकत बनाया। मेरठ में प्रशिक्षण के बाद बेहतर सुविधाओं के लिए पारुल पटियाला और दिल्ली गईं। राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय शिविर के लिए हुआ।

इसके बाद बेंगलुरु के साई प्रशिक्षण केंद्र में उन्हें अभ्यास का अवसर मिला, जहां रहने, खाने और प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध थीं। वर्ष 2012 में खेल शुरू करने के बाद 2019 में उन्हें पहली बार भारतीय टीम की जर्सी पहनने का अवसर मिला। दोहा में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप उनके करियर की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी, जिसमें उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया।

नौकरी करने का मन हुआ, लेकिन देश के लिए खेलने का सपना नहीं छोड़ा

पारुल ने बताया कि खेल करियर के एक दौर में उनका प्रदर्शन और समय लगातार एक स्तर पर अटका रहा। रेलवे में टीसी की नौकरी मिलने के बाद उन्होंने सोचा कि जब प्रदर्शन में सुधार नहीं हो रहा है तो नौकरी पर ध्यान देना चाहिए। कोविड के कारण 2020 ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाने से भी उन्हें निराशा हुई। कई बार खेल छोड़ने का विचार आया, लेकिन देश के लिए पदक जीतने का सपना उन्हें दोबारा मैदान में ले आया।

लगातार उच्च स्तर पर प्रदर्शन बनाए रखना, चोटों से बचना और शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार रहना किसी भी एथलीट के लिए बड़ी चुनौती होती है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि वह तीन विश्व चैंपियनशिप और दो एशियाई खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं। लगातार दो एशियाई खेलों में दो-दो पदक जीते हैं। तीन हजार मीटर, तीन हजार मीटर स्टीपल चेज और पांच हजार मीटर का राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया।

5000 मीटर की आखिरी दौड़ ने पूरा किया खाकी वर्दी का सपना

पारुल ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना खाकी वर्दी पहनने का था। एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर सीधे डीएसपी पद मिलने की नीति ने उनके लक्ष्य को और स्पष्ट कर दिया था। 2023 एशियाई खेलों में 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीतने के बाद उनके पास 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल करने का एक और मौका था। उन्होंने बताया कि दौड़ के अंतिम 30 मीटर में उन्होंने पूरी ताकत लगा दी और पहला स्थान हासिल किया।

इस उपलब्धि के साथ उनका डीएसपी बनने का सपना भी पूरा हुआ। वर्तमान में वह मुरादाबाद में तैनात हैं। पारुल ने कहा कि ओलिंपिक में हिस्सा लेना और देश के लिए पदक जीतना उनका सपना रहा है। पिछले ओलिंपिक में वह फाइनल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन अब उनका पूरा ध्यान 2028 ओलिंपिक व विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तैयारी पर है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि लक्ष्य बड़ा रखें, अपनी तरफ से 100 प्रतिशत दें और अपने कोच पर भरोसा रखने के साथ खुद पर विश्वास बनाए रखें।

सवाल-जवाब में छात्राओं को दिए सफलता और अनुशासन के टिप्स

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कार्यक्रम के प्रश्न-उत्तर सत्र में छात्रा अनायका ने पूछा कि सफलता के लिए मेहनत, हुनर या सही समय में से सबसे ज्यादा जरूरी क्या है। पारुल ने जवाब दिया कि मेहनत ही सफलता का सबसे बड़ा राज है। एक अन्य छात्रा ने उनसे पूछा कि ऐसा क्या था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्हें बड़े स्तर का एथलीट बनाया। पारुल ने कहा कि उनके माता-पिता का विश्वास, डीएसपी बनने का लक्ष्य और कोच गौरव त्यागी का मार्गदर्शन उनकी सफलता के प्रमुख आधार रहे।

छात्रा विशिका ने पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाने को लेकर सवाल किया। इस पर पारुल ने अपने शुरुआती दिनों का अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह सुबह स्टेडियम में अभ्यास करने जाती थीं, फिर स्कूल जाती थीं। उनका घर स्टेडियम से 15 से 20 किलोमीटर दूर था। कई बार स्कूल के शिक्षकों ने भी उन्हें अभ्यास के लिए समय दिया। उन्होंने कहा कि पढ़ाई और खेल दोनों जरूरी हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो समय निकालकर दोनों को संभाला जा सकता है।

हार मिलने पर खुद को दोबारा तैयार करने से जुड़े सवाल पर पारुल ने कहा कि खिलाड़ी जीत से ज्यादा हार से सीखता है। उनके कोच, वरिष्ठ खिलाड़ियों और मनोवैज्ञानिक ने मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने विद्यार्थियों को भी असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखने की सलाह दी। मोबाइल और इंटरनेट मीडिया के बीच लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने के सवाल पर पारुल ने बताया कि वह इंटरनेट मीडिया का बहुत कम इस्तेमाल करती हैं।

उनका ध्यान सुबह-शाम के अभ्यास, आराम और आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी पर रहता है। उन्होंने समझाया कि पर्याप्त नींद से शरीर को रिकवरी का समय मिलता है और बेहतर प्रदर्शन के लिए यह भी जरूरी है।

कोच गौरव त्यागी बोले-छात्राओं में से कोई अगली राष्ट्रीय स्टार बने

पारुल के कोच गौरव त्यागी ने कहा कि छात्राओं को अधिक प्रेरित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन गर्ल्स स्कूल में किया गया। उन्होंने कहा कि पारुल की सफलता की कहानी किसी किताब या दूसरे व्यक्ति से सुनी हुई कहानी नहीं है, बल्कि यह उनके सामने हुए संघर्ष और मेहनत का वास्तविक उदाहरण है। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को यह विश्वास दिलाना है कि मेरठ से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निकल सकती हैं।

गौरव त्यागी ने पारुल के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक नहीं मिलने पर उन्होंने पारुल से मैदान की मिट्टी उठाकर संकल्प लेने को कहा था कि वह आगे कभी खाली हाथ नहीं लौटेंगी। पारुल ने उस संकल्प को पूरी लगन से निभाया। उन्होंने कहा कि पारुल ने जब डीएसपी बनने की ठानी तो उसे हासिल करके दिखाया। उन्होंने पारुल की उपलब्धियों को उनकी मेहनत, दृढ़ निश्चय और माता-पिता के विश्वास का परिणाम बताया।

उन्होंने छात्राओं से कहा कि मेरठ पब्लिक स्कूल में बास्केटबाल सहित खेलों के लिए बेहतर अवसर और प्रशिक्षक उपलब्ध हैं। विद्यार्थियों को इन सुविधाओं का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेल व्यक्ति को अलग पहचान देते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलते हैं। छात्राएं अपने शिक्षकों और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में आगे बढ़ें, अपने माता-पिता का विश्वास बनाए रखें और ऐसी सफलता हासिल करें जिससे उनके विद्यालय और शहर का नाम रोशन हो।

स्कूल प्रबंधन ने किया सम्मानित, पदकवीरों ने ली प्रेरणा

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मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप के प्रबंध निदेशक विक्रमजीत सिंह शास्त्री ने यूथ कनेक्ट में पहुंचीं पारुल चौधरी को विशेष तौर पर पर सम्मानित किया। पारुल के साथ उनके पिता कृष्णपाल सिंह चौधरी, भाई राहुल चौधरी और कोच गौरव त्यागी को भी सम्मानित किया।

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प्रिंसिपल रचना शर्मा ने छात्राओं को पारुल के संघर्ष से सीख और उपलब्धियों से प्रेरणा लेते हुए खेलों में भी आगे बढ़ने को प्रेरित किया। इस मौके पर सीबीएसई की प्रतियोगिताओं में स्कूल के पदकवीरों के बीच पारुल पहुंचीं तो उनकी खुशी दुगनी हो गई।

पारुल ने अपने पदक दिखाए तो छात्राओं ने भी अपने पदक के दिखाए और खेलों में और मेहनत करने की बात कही। दैनिक जागरण के संपादकीय प्रभारी रवि प्रकाश तिवारी ने स्कूल प्रबंधन का आभार प्रकट करते हुए छात्राओं से कहा कि रील में लाइक्स मिलते हैं जबकि मैदान पर लाइफ मिलेगी। उन्होंने छात्राओं को मैदान पर समय बिताने को प्रेरित किया।