आकाश दुबे, मेरठ। क्रांति की धरा पर हरियाली संजोने के दावे तो खूब हुए, लेकिन उनका जमीनी असर नहीं दिखा। मेरठ के वनक्षेत्र में इजाफा करने के उद्देश्य से हर साल पौधारोपण के महाकुंभ में लाखों पौधे रोपे गए, लेकिन वे पेड़ की शक्ल नहीं ले सके। कहीं रखरखाव का अभाव तो कहीं सिंचाई के बिना पौधों ने दम तोड़ दिया। इससे साफ है कि अफसरों ने कागजों पर तो हरियाली खूब बिखेरी, लेकिन धरा का आंचल हरा-भरा नहीं हो सका। इसकी पुष्टि 2019 की फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट से भी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, मेरठ के कुल भू-भाग का 2.67 प्रतिशत हिस्सा ही वनाच्छादित है, जबकि राष्ट्रीय वन नीति के तहत 33 फीसदी भू-भाग पर वन क्षेत्र होना आदर्श मानक है।

पौधों को सहेजते तो 10 वर्ग किमी में दिखती हरियाली

वर्ष 2019 में पौधारोपण अभियान के तहत जनपद में करीब 966 हेक्टेयर भूमि पर 19.23 लाख पौधे लगाए गए थे। इन पौधों का रखरखाव किया होता तो जिले में 9.7 वर्ग किमी भू-भाग पर वनावरण होता। वन विभाग की मानें तो इस वर्ष में भी करीब 24 लाख पौधे रोपने का लक्ष्य है।

कुछ ऐसा है मेरठ का वन क्षेत्र

कुल भू-भाग                                  2559 वर्ग किमी.

अति घना वन क्षेत्र                          00 वर्ग किमी.

मध्यम घना वन क्षेत्र                       34 वर्ग किमी.

खुला वन क्षेत्र                                 34.4 वर्ग किमी.

कुल वन क्षेत्र                                   68.4 वर्ग किमी.

कुल भू-भाग में वन क्षेत्र (प्रतिशत में)   2.67

गत वर्ष से परिवर्तन                         0.4 वर्ग किमी.

नोट -: सभी आंकड़े फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की 2019 की रिपोर्ट के हैं।

पेड़ हैं ऑक्सीजन का खजाना

पौधे ही पृथ्वी पर एकमात्र आक्सीजन का बड़ा स्रोत हैं। एक पेड़ तीन किलो कार्बडाइऑक्साइड सोखता है। 50 साल में केवल एक पेड़ करीब 17.50 लाख रुपये की ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। प्रकृति में मानव के लिए पेड़ जैसी कोई दूसरी संपदा शायद ही होगी, जो उनके जीवन को सहज और सुगम बनाने में ऐसा योगदान देती होगी। -डॉ. अनिल जोशी, पर्यावरणविद्

पेड़ की तरह पौधे भी बहुमूल्य

सामान्य तौर पर लोग पौधों को पेड़ से कम आंकते है, लेकिन पर्यावरण में पौधे भी पेड़ की तरह ही बहुमूल्य होते हैै। दोनों ही एकसमान वातावरण को शुद्ध बनाने का काम करते हैं। अंतर इतना है पौधों की आयु पेड़ों से कम होती है। करीब 250 पेड़ एक व्यक्ति द्वारा जीवनभर फैलाए प्रदूषण को आसानी से खत्म करने की क्षमता रखते हैं। -गिरीश शुक्ला, पर्यावरणविद् 

Posted By: Prem Bhatt

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