बागपत, जागरण संवाददाता। सिसाना गांव में करीब डेढ़ वर्ष की एक बछिया के थनों से दूध टपक रहा है। आठ दिन पहले 100 ग्राम दूध दे रही थी, वहीं अब डेढ़ किलोग्राम देने लगी है। 

बेसहारा बछिया को पकड़कर ले आए थे घर 

गांव निवासी किसान सतवीर सिंह ने बताया कि छह माह पहले एक बेसहारा बछिया को पकड़कर घर ले आए थे। आठ दिन पहले देखा तो बछिया के थनों से दूध टपक रहा था। पहले दिन तो अनदेखा कर दिया। अगले दिन दूध निकालकर देखा तो 100 ग्राम के करीब दूध दिया। अब बछिया डेढ़ किग्रा दूध दे रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. रमेश चंद ने बताया कि हार्मोन के असंतुलन की वजह से ऐसा हो जाता है। गाय का गर्भाधारण करीब ढाई से तीन वर्ष की उम्र के बाद होता है। बछिया की किसान के घर जाकर जांच कराएंगे।

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बंदर पकड़वाने को करना पड़ा चंदा, डीएम से मुलाकात के बाद मिली मंजूरी

बागपत, जागरण संवाददाता। बंदरों के उत्पाद से परेशान सिंघावली अहीर के ग्रामीणों ने बंदरों को पड़वाने की खुद ही पहल की है। पहले गांव में एक समिति बनाई फिर समिति के पदाधिकारी बंदर पकड़ने के लिए डीएम राजकमल यादव से मिले। जब डीएम कार्यालय से मंजूरी मिली, तब बंदरों को पकड़कर सहारनपुर के जंगल में छोड़ने का निर्देश हुए। ग्रामीणों ने बंदर पकड़ने के लिए शामली के कांधला कस्बे से एक टीम से संपर्क किया। गांव में चंद्रा इकट्ठा कर टीम को रकम दी गई। गुरुवार को टीम अपने पूरे साधनों के साथ सिंघावली अहीर गांव में जगह-जगह जाल लगाकर 250 बंदरों को पकड़ा। इन बंदरों को टीम सहारनपुर के जंगल में छोड़कर आएगी। 

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ट्रेन की चपेट में आकर दर्जनों भेड़-बकरियां कटीं

मेरठ, जागरण संवाददाता। रेलवे ट्रैक पर पशुओं के आए दिन ट्रेन की चपेट में आने के मामले सामने आ रहे हैं। गुरुवार को मेरठ-खुर्जा रेलवे ट्रैक पर बजोट गांव के पास कई भेड़-बकरियां चपेट में आ गईं। दोपहर बाद अंडरपास के ऊपर बने पुल पर भेड़-बकरियां ट्रैक के आसपास घास चर रही थीं। तभी ट्रेन आ गई। दो कोच की विशेष ट्रेन की गति तेज थी। चराने वाले दंपती बुजुर्ग थे। भेड़-बकरियों को हांक नहीं सके। ट्रैक और आसपास दर्जनों भेड़-बकरियां कट गईं। सूचना पर रेलवे की टीम पहुंची और ट्रैक को साफ कराया।

Edited By: Parveen Vashishta