मेरठ । केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल प्रदेश के कोलकाता हाईकोर्ट की सर्किट बेंच जलपाईगुडी में बनाए जाने का प्रस्ताव गत छह फरवरी को पास कर दिया है। इससे मेरठ समेत पश्चिमी उप्र के अधिवक्ताओं में आक्रोश है। उनका कहना है कि मात्र चार जिलों को सर्किट बेंच दी गई है। जबकि केंद्र सरकार ने पश्चिमी उप्र के 22 जिलों की अनदेखी की है। इसी के विरोध में मेरठ समेत पश्चिमी उप्र के सभी 22 जिलों के अधिवक्ता आज न्यायिक कार्य से विरत रहे। दोपहर को पंडित नानक चंद सभागार में अधिवक्ताओं ने बेंच की मांग को लेकर बैठक की। बैठक में सर्वसम्मति से बेंच की स्थापना की मांग की गई। अध्यक्षता राजेंद्र सिंह जानी व संचालन देवकी नंदन शर्मा ने किया। बैठक में पूर्व अध्यक्ष अशोक शर्मा, गजेंद्र सिंह धामा, उदयवीर सिंह राणा, डीडी शर्मा, सतीश चंद्र गुप्ता, कुंवरपाल शर्मा, मनोज बंसला, जितेंद्र बना, प्रबोध शर्मा आदि ने विचार व्यक्त किए। इसके बाद कचहरी परिसर में घूमकर जुलूस के रूप में पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन एडीएम को दिया।

आज भी हड़ताल पर रहेंगे अधिवक्ता, जंतर-मंतर पर करेंगे प्रदर्शन

बार कौंसिल ऑफ इंडिया के प्रस्ताव पर अधिवक्ता कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए मंगलवार को भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे और दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे। बार कौंसिल आफ इंडिया के गत दो फरवरी 19 के प्रस्ताव अनुपालन में सोमवार को बैठक आयोजित की गई। केंद्र सरकार से माग रखी गयी कि देश के सभी वकीलों के लिए कचहरी परिसर में अधिवक्ता संघों की बैठने की व्यवस्था हो। वकीलों को चेम्बर, पुस्तकालय व शौचालय आदि की उचित व्यवस्था की जाए तथा नवनियुक्त अधिवक्ताओं को पांच वर्ष तक 10 हजार प्रतिमाह उनकी जरूरत पूर्ण करने के लिए प्रदान की जाए। तथा देश के सभी वकीलों और उनके परिवार के लिए बीमा योजना तथा असमायिक मृत्यु पर कम से कम 50 लाख रूपये वकील के परिजनों को तथा बीमारी की अवस्था में बेहतर चिकित्सा मुफ्त प्रदान की जाए। वृद्ध एवं अक्षम वकील होने पर पेंशन व पारिवारिक पेंशन की व्यवस्था की जाए। इन मागों को लेकर मंगलवार को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया जायेगा। अध्यक्षता राजेन्द्र सिंह जानी ने की। बैठक में सतीश चंद गुप्ता, योगेश पालीवाल, मेहर सिंह पाल, चौ. हरेन्द्र सिंह, प्रशांत आदि मौजूद रहे।

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