मेरठ, जेएनएन। एक ओर शहर में 40 प्राइमरी स्कूल भाड़े के जर्जर भवन में चल रहे हैं, वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय केसरगंज के परिसर पर व्यवसायिक कब्जा किया जा रहा है। पहले ही स्कूल का एक हिस्सा मंडप के नाम पर कब्जाया जा चुका है। अब स्कूल भवन के पीछे की जमीन को भी जिला पंचायत ने तीन साल के लिए व्यवसायिक लीज पर दे दिया है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक सरफराज अली ने बीएसए को अपनी शिकायत में बताया है कि उक्त जमीन खसरा संख्या 1433 की है, जो स्कूल के नाम है, जबकि जिला पंचायत उक्त जमीन को खसरा संख्या 1437 की बताते हुए 369 वर्ग मीटर जमीन को नौ जुलाई को सीमा पत्नी अलीशान को 60 हजार रुपये प्रति वर्ष पर तीन साल के लीज पर दे दिया है। अलीशान ही स्कूल के दूसरी ओर मंडप भी चला रहे हैं। 1874 में बना स्कूल

इस स्कूल की शुरुआत वर्ष 1874 में टाउन स्कूल के तौर पर हुई थी। इसका स्कूल के लिए दान की गई जमीन पर इसका संचालन प्रोविंसियल डिवीजन जिला स्कूल के मैनेजमेंट की ओर से किया गया था। बाद में इसका नाम उच्च प्राथमिक विद्यालय केसरगंज पड़ा। वर्तमान में इस स्कूल परिसर में एक उच्च प्राथमिक सहायता प्राप्त, एक राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय और एक प्राइमरी विद्यालय संचालित हैं। इसके बाद भी स्कूल परिसर में बच्चों के खेलने-कूदने और अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त जमीन है, जिस पर धीरे-धीरे अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

असामाजिक तत्व भी करते हैं परेशान

स्कूल के एक ओर मंदिर व दूसरी ओर मस्जिद होने के बावजूद ठीक सामने शराब का ठेका संचालित हो रहा है। यहां से शराब लेकर असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में नशा करते हैं। ई-रिक्शा वालों ने चार्जिग प्वाइंट भी इसी परिसर में बना लिया है। स्कूल के दौरान भी परिसर में वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। वाहनों की पार्किंग की जाती है। शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। वर्जन :::

वह जमीन स्कूल की ही है। अवैध कब्जे और निर्माण को एक बार बंद कराया गया था, लेकिन जिला पंचायत ने दोबारा एक हिस्से को लीज पर दे दिया। जो भी निर्माण चल रहा है, उसे दोबारा रोकेंगे।

सतेंद्र कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मेरठ जमीन के उस हिस्से पर जिला पंचायत का कब्जा है, इसीलिए तीन साल की लीज पर दी गई है। वहां एक मंडप भी चलता है। दोनों का किराया जिला पंचायत को मिलता है।

प्रदीप सक्सेना, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत हम किराएदार हैं। जिला पंचायत ने हमें अपनी जमीन बताकर दी है। एग्रीमेंट में भी वही लिखा है। मंडप भी स्कूल की जमीन पर नहीं है।

अलीशान कुरैशी, मंडप संचालक

Posted By: Jagran

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