मेरठ, [संतोष शुक्ल]। बात 1966-67 की है। मेरठ कालेज के प्रॉक्टर आफिस के सामने एक छात्र अक्सर अकेले टहलते हुए हाथ में छल्ला घुमाता मिलता। वो क्लास में कम आता था। एक दिन माइक्रोफाइनेंस की कॉपी जांचते हुए मैं चौंक पड़ा। ये वही लड़का था, जिसकी कॉपी क्लास में छात्रों को दिखाकर मैंने कहा..इससे अच्छा कोई टीचर भी नहीं लिख सकता। गुमसुम नजर आने वाला यह छात्र कभी बड़ा रणनीतिकार बनेगा। ..ये संस्मरण बताते हुए अजीत डोभाल को अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफेसर डा. एसपी सिंह की आंखें चमक उठती हैं। आखिर उनका छात्र आज देश की अभेद्य सुरक्षा का नायक बनकर जो उभरा है।
कक्षा में कम आते थे...अकेले रहने की थी आदत
मेरठ कालेज के अर्थशास्त्र विभाग से 1999 में रिटायर हुए डा. एसपी सिंह कहते हैं कि इस कैंपस के उदीयमान छात्रों की सूची लंबी है, किंतु अजीत डोभाल का व्यक्तित्व सबसे अलग था। सीताराम हास्टल में रहने वाले डोभाल पढ़ने में सबसे मेधावी थे। किंतु एमए अर्थशास्त्र की कक्षा में उनकी उपस्थिति बेहद कम थी। प्रो. सिंह याद करते हैं कि कई बार डोभाल से कक्षा में न आने का कारण पूछा, किंतु वो मुस्कुराकर टाल देते थे। पढ़ाई के छह माह के अंदर अर्थशास्त्र के माइक्रोफाइनेंस की परीक्षा ली गई, जिसमें डोभाल की कॉपी देखकर प्रोफेसर दंग रह गए। वो बताते हैं कि कक्षा में कॉपी दिखाकर मैंने कहा कि ‘दिस स्टूडेंट इज बेटर दैन हिज टीचर’। इतनी सटीक कॉपी पहली बार देखी। प्रोफेसर सिंह याद करते हैं कि खामोशी से आगे बढ़ता ये छात्र कक्षा टॉप कर मेरठ से निकल गया। आइपीएस भी बना। इधर, मैं भी भूल गया।
मोदी सरकार आई तो जाना.. ये तो मेरा छात्र था
2014 में मोदी सरकार बनी। अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाए गए। पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो डोभाल फिर चर्चा में आ गए। डा. सिंह याद करते हैं कि मुङो भी अपने डोभाल नाम वाले छात्र की याद आई। कालेज में 1967 के डाक्यूमेंट खंगाले गए। मिलान भी हो गया। वो याद करते हैं कि..मेरे कई छात्र आइएएस, आइपीएस व प्रोफेसर बनकर रिटायर हुए। वो मिलने भी आते रहे, किंतु डोभाल ने कभी कोई संपर्क नहीं किया।...शायद उनका स्वभाव ही एकाकी था। बता दें कि गत दिनों पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक और अब जम्मू कश्मीर से 370 और 35-ए खत्म करने की पटकथा लिखने वाले अजीत डोभाल पर मेरठ कालेज गर्व करता है। उन्हें कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम में बुलाने की तैयारी भी की गई है।
मेरठ कॉलेज से अब भेजा जाएगा निमंत्रण
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डा. अजीत डोभाल को अभी मेरठ कॉलेज से निमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया है। कॉलेज की प्राचार्य की ओर से इस महीने में निमंत्रण पत्र भेजा जाएगा। फिलहाल आर्मी के एक बड़े अधिकारी से कॉलेज ने डोभाल से संपर्क किया है। जिसमें उन्होंने आने की अभी कोई तिथि नहीं निर्धारित की है, आने की सहमति दी है। मेरठ कॉलेज में वर्ष 1966-67 में डा. एके डोभाल छात्र रहे। जब मेरठ कॉलेज आगरा विश्वविद्यालय से जुड़ा था। कॉलेज में सीताराम हॉस्टल के छात्रों के साथ उस समय डोभाल की एक तस्वीर ली गई थी। जो आज भी मेरठ कॉलेज में सुरक्षित है। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद और जम्मू कश्मीर में प्रमुख भूमिका डोभाल की रही है। इसके बाद से मेरठ कॉलेज उनके आमंत्रण को लेकर चर्चा होने लगी है। अक्टूबर में मेरठ कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग में एक सेमिनार में उन्हें बुलाने का प्रयास किया गया। लेकिन अभी उन्होंने समय नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने आने की सहमति दी है। तिथि तय करने के बाद वे इसकी सूचना देंगे। रक्षा अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर संजय कुमार ने बताया कि कॉलेज प्राचार्य की ओर से उन्हें निमंत्रण पत्र भेजा जाएगा। अक्टूबर में किसी भी शनिवार या रविवार को वह मेरठ कॉलेज में आ सकते हैं।
राज्यपाल भी मेरठ कॉलेज के छात्र
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने में राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी मेरठ कॉलेज के पूर्व छात्र रह चुके हैं। बिहार के राज्यपाल रहने के दौरान सत्यपाल मलिक मेरठ कॉलेज में आ चुके हैं।

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