सहारनपुर, जेएनएन। सरकारी भूमियों को कब्जा मुक्त कराने के अभियान के अंतर्गत एक बड़ा कदम उठाते हुए एसडीएम सदर अनिल कुमार सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस ग्राम मेघछप्पर में राजकीय आस्थान की भूमि पर कब्जा करने के कारण दिया गया है।

यह है मामला

एसडीएम ने बताया गया कि उत्तर प्रदेश शासन व जिलाधिकारी सहारनपुर के निर्देशों के अनुपालन में तहसील सहारनपुर में सरकारी जमीनों को चिन्हित करके उन्हें अवैध कब्जों से मुक्त कराने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत राजस्व अभिलेखों की पड़ताल में पाया गया कि ग्राम मेघछप्पर के खसरा संख्या 264 की 794 वर्गमीटर भूमि राजकीय आस्थान दर्ज है जो राजकीय संपत्ति है। मौके की जांच कराने पर पाया गया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद ने इस गाटे की लगभग 250 वर्गमीटर भूमि पर कब्जा करके कांग्रेस पार्टी का स्थानीय कार्यालय बनाया हुआ है। यह जानकारी होने पर तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों ने उक्‍त भूमि खाली करने के लिए मसूद को कई बार सूचित किया गया, लेकिन उनके द्वारा कब्जा नहीं हटाया गया। जिस पर एसडीएम ने अपने न्यायालय में पीपी एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत वाद दर्ज करके नोटिस जारी कर दिया है।

दो अगस्त तक न्यायालय में पक्ष रखने का दिया समय

नोटिस में कहा गया है कि दो अगस्त तक न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करें, वरना एकपक्षीय रूप से बेदखली की कारवाई की जाएगी। एसडीएम सदर ने बताया कि राजकीय संपत्ति से कब्जा हटवाने के लिए पीपीएक्ट के अंतर्गत सुनवाई करके कारवाई का प्रावधान है। गंगोह में लखनौती के किले को खाली करने का आदेश भी इसी अधिनियम के तहत किया गया है। यदि सुनवाई के दौरान इमरान मसूद अपना कब्जा नहीं हटाते हैं तो बलपूर्वक बेदखली की कारवाई की जाएगी और जुर्माना भी वसूल किया जाएगा।

कब्जा पाए जाने पर स्‍वजन को भी नोटिस

एसडीएम के अनुसार इमरान मसूद के अलावा उनके कई स्‍वजन सलमान मसूद, जीशान मसूद व फौजान मसूद ने भी राजकीय आस्थान की भूमि पर कब्जा किया हुआ है। उन्हें भी इसी प्रकार के नोटिस जारी किए गए हैं।

इमरान मसूद ने किया आरोप से इन्‍कार

इस मामले में कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा कि उनका निजी कार्यालय पिछले बीस वर्ष से चल रहा है। उनकी खुद की चार हजार गज जमीन है, उसके ही हिस्से पर यह कार्यालय बना है। उन्‍हें सरकारी जमीन कब्जाने की कोई जरूरत नहीं है। प्रशासन पैमाइश करवा ले, उनके हिस्से की जितनी जमीन है, उन्‍हें दे दी जाए। किसी अन्य की जमीन नहीं चाहिए। यह सब कुछ उनकी राजनैतिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए किया जा रहा है।

 

Edited By: Taruna Tayal