मेरठ, जेएनएन : बजट एक्सप्रेस धड़धड़ाते हुए मेरठ से नॉन-स्टाप गुजर गई। इसमें मेरठ के औद्योगिक विकास का कोई सिग्नल नहीं दिखा। एमएसएमई के मैन्यूफैक्चरिग सेक्टर को बूस्टर डोज देकर रोजगार को बढ़ावा देने की उम्मीद भी धरी रह गई। उधर, बजट की पिच पर खेल उद्यमी भी बोल्ड हो गए। हालांकि स्टार्ट अप और स्किल इंडिया के जरिए निवेशकों को लुभाने का प्रयास जरूर किया गया है। वित्त विशेषज्ञों का दावा है कि बजट में भविष्य की नींव रखी गई है। आधारभूत ढांचा बनाने पर खास फोकस है।

उद्यमियों को अंदाजा था कि देश की वित्तीय ताकत बढ़ाने के लिए सरकार एमएसएमई सेक्टर के लिए पूरक बजट में बड़ी घोषणा करेगी। खासकर, एमएसएमई से खरीद करने वालों को 45 दिन में भुगतान, बैंकों से आसान ऋण की उपलब्धता बढ़ाने, कंटेनर डिपो एवं हवाई उड़ान जैसी अपेक्षाएं थीं। नए निवेशकों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज नहीं है। हालांकि एमएसएमई सेक्टर के लिए 350 करोड़ रुपए का अतिरिक्त प्रावधान किया है, जिसके जरिए उद्यमियों को लोन के ब्याज में दो फीसद छूट दी जाएगी। उद्यमियों की मानें तो इससे निवेशकों को रिझाया मुमकिन नहीं है। मेरठ की दर्जनों इकाइयों जीरो टैक्स जोन का लाभ लेने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश पलायन कर गई। उद्यमियों को उम्मीद थी कि सरकार पलायन कर चुकी इकाइयों को बजट के जरिए फिर से बसाने का प्रयास करेगी। डायरेक्ट टैक्स के जरिए उद्योगों के लिए खास नहीं किया गया, जबकि पांच करोड़ रुपए से ज्यादा रिटर्न भरने वालों को त्रैमासिक जीएसटी भरने की छूट मिलेगी।

बजट की गुगली से स्पो‌र्ट्स इंडस्ट्री मायूस

मेरठ में करीब 1500 करोड़ की खेल इंडस्ट्री है, जिसके उत्पाद क्रिकेट व‌र्ल्ड कप से लेकर ओलंपिक समेत दुनिया के कई खेलों में इस्तेमाल होते हैं। निर्यात में मेरठ ने जालंधर को भी पीछे छोड़ा है, लेकिन बजट की गुगली से इंडस्ट्री बोल्ड हो गई। कश्मीर एवं इंग्लिश विलो की खरीद में सहूलियत से लेकर स्कूलों में खेलकूद अनिवार्य करने समेत कई अपेक्षाएं धरी रह गई। आइपीएल एवं क्रिकेट व‌र्ल्ड कप के बावजूद कारोबार में मंदी से उबारने में बजट में खास प्रावधान नहीं मिला। ई-वाहनों पर जीएसटी 12 से पांच फीसद कर दी गई, जबकि खेल उपकरणों पर 12 और 18 फीसद बनी हुई है। क्या कहते हैं उद्यमी

बजट से एमएसएमई खासकर मैन्युफैक्चरिग सेक्टर को बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन सरकार के होमवर्क में कमी दिखी। एमएमएमई के लिए 350 करोड़ का बजट बेहद कम है। पांच करोड़ से ज्यादा टर्नओवर पर जीएसटी त्रैमासिक भरने की सहूलियत का स्वागत है।

-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, आइआइए उम्मीद के सापेक्ष बजट निराश करता है। निर्माण क्षेत्र को ताकत नहीं मिलेगी तो व्यापार और सर्विस सेक्टर भी गति नहीं पकड़ सकते। दूरगामी बजट तो है, लेकिन वर्तमान इकोनोमी को रफ्तार देने की मंशा में कमी दिखी।

-सुरेंद्र प्रताप, सचिव, रोडवेज चेंबर आफ कामर्स उम्मीद थी कि स्पो‌र्ट्स इंडस्ट्री के कई आयटम पर जीएसटी 18 से 12 या पांच फीसद की जाएगी, किंतु ऐसा नहीं हुआ। स्पो‌र्ट्स कारोबार मंदी से जूझ रहा है। एमएसएमई सेक्टर का हजारों करोड़ रुपए छह-छह माह तक फंसा रहता है, जिससे उबारने की मंशा बजट में नहीं है।

-राकेश महाजन, खेल उद्यमी

Posted By: Jagran