मेरठ, जेएनएन। प्रशासन ने मेरठ में गुरुवार रात कोरोना से बचाव व सुरक्षा के चलते नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि रात में नाइट कर्फ्यू लगाने से कोरोना कमजोर नहीं होगा। यदि दिन के समय बाजारों या मुख्य चौराहों पर मास्क चेकिंग के तौर पर सख्ती दिखाई जाए तो कोरोना से लड़ाई आसान व प्रभावी होगी। वहीं, नाइट कर्फ्यू लागू करने पर रात दस बजे के बाद होने वाले व्यापार जैसे होटल, रेस्टोरेंट व मंडप आदि के संचालकों ने इस निर्णय पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि उनका व्यापार रात नौ बजे के बाद ही चलता है। लोग शाम को अपने व्यापार या नौकरी से निपटकर रात दस बजे तक ही रेस्टोरेंट या होटल पहुंचता है। शादी के कार्यक्रम भी अधिकतर रात के समय होते हैं। इसी के साथ उनके व्यापार से कई तरह से लोग जुड़े रहते हैं, जो फूल सजावट खाना कारीगर आदि का काम करते हैं, उनके सामने जीवन-यापन का संकट फिर से खड़ा हो जाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को मेरठ मंडप एसोसिएशन के पदाधिकारी मंडलायुक्त से मिलकर अपनी बात को रखेंगे।

'नाइट कर्फ्यू लगाकर अपनी नाकामी छिपाई'

मेरठ मंडप एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज गुप्ता व महामंत्री विपुल सिंघल का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए नाइट कर्फ्यू लगाया है। प्रशासन का यह निर्णय समझ से परे है। सांप्रदायिक दंगे के माहौल की तरह अचानक से रात्रि कर्फ्यू लगा दिया गया। यह बीमारी रात्रि कर्फ्यू से नहीं, बल्कि जागरूकता से दूर होगी। पुलिस प्रशासन को रात्रि में कर्फ्यू लगाने की जगह दिन के समय भीड़ पर अंकुश लगाने के लिए गंभीरता दिखानी चाहिए थी। लोगों को मास्क, सैनिटाइजर व दो गज की दूरी के बारे में जागरूक करना चाहिए। मेरठ मंडप एसोसिएशन के महामंत्री विपुल सिंघल ने कहा कि अप्रैल में शादी व उससे पहले सगाई आदि के कार्यक्रम निर्धारित हो गए हैं। बुकिंग करने वालों और मंडप संचालकों के सामने नयी मुसीबत खड़ी हो गई है।

कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट

विपुल सिंघल ने कहा कि होटल, रेस्टोरेंट व मंडप रात्रि में बंद होने से उनसे जुड़े खाने के कारीगरों, शादी में नपीरी वाले, बैंड-बाजे वाले, डेकोरेटर, फूल आदि से जुड़े कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। लाकडाउन में लंबे समय के बाद व्यापार को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन अब संभलने की गुंजाइश नहीं है। 

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