10 और 15 वर्ष नहीं, वाहनों की फिटनेस व प्रदूषण का स्तर बनाया जाए स्क्रैप नीति का आधार
ट्रांसपोर्टरों ने एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों को स्क्रैप करने की नीति पर पुनर्विचार की मांग की है। ...और पढ़ें

लखनऊ में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को ज्ञापन सौंपते ट्रांसपोर्टर गौरव शर्मा, दीपक गांधी व अशोक शर्मा। सौ. स्वयं
HighLights
ट्रांसपोर्टरों की एनसीआर डीजल वाहन स्क्रैप नीति पर पुनर्विचार की मांग।
वाहन फिटनेस और प्रदूषण स्तर को स्क्रैप नीति का आधार बनाया जाए।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात भी रखी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में 10 वर्ष पुराने डीजल व्यवसायिक वाहनों को स्क्रैप किए जाने की नीति में पुनर्विचार एवं समान रूप से नियम लागू कराए जाने की मांग ट्रांसपोर्टरों ने की है। उनका कहना है कि स्क्रैप नीति में वाहन की फिटनेस एवं प्रदूषण स्तर को भी आधार बनाया जाए। ट्रांसपोर्टरों ने लखनऊ में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से भेंट कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा है।
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन मेरठ के अध्यक्ष गौरव शर्मा, महामंत्री दीपक गांधी व अशोक शर्मा ने परिवहन मंत्री को सौंपे ज्ञापन में कहा कि एनसीआर क्षेत्र में डीजल के व्यवसायिक वाहनों के लिए 10 वर्ष तथा पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष की आयु-सीमा से संबंधित प्रतिबंध लंबे समय से प्रभावी है। इसको लेकर परिवहन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है।
यदि पुराने वाहनों से प्रदूषण एवं पर्यावरण को वास्तविक खतरा है, तो सरकारी विभागों में चल रहे ऐसे वाहनों समेत 15-20 वर्ष पुराने निजी वाहन एवं दोपहिया वाहनों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। केवल व्यवसायिक वाहनों को लक्ष्य बनाना ट्रांसपोर्टरों के लिए असमान व्यवहार जैसा प्रतीत होता है। हर 10 साल बाद नया वाहन खरीदने से ट्रांसपोर्टरों पर आर्थिक बोझ आ जाएगा।
