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कुट्टू का आटा पीला या काला पड़ जाए तो कतई न करें इस्तेमाल... यह बना देगा बीमार

By Dileep Patel Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 11 Oct 2026 12:40 PM (IST)

नवरात्र में कुट्टू के आटे के सेवन से बीमार पड़ने की घटनाओं के बाद विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. पीला या काला कुट्टू आटा इस्तेमाल न करें

  2. उपवास में ताजे, पैकेटबंद कुट्टू आटे का प्रयोग करें

  3. बासी आटा एलर्जी, गैस, पेट संक्रमण का कारण

जागरण संवाददाता, मेरठ। नवरात्र शुरू हो गए हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिन, जबकि कुछ शुरुआत और आखिरी दिन उपवास रखते हैं। इस दौरान कुट्टू के आटे का इस्तेमाल बढ़ जाता है। पिछले साल कुट्टू के आटे से बने व्यंजन खाने के बाद जनपद में 250 से ज्यादा लोग बीमार पड़कर अस्पताल पहुंचे थे। कई परिवार ही चपेट में आ गए थे। इसे देखते हुए विशेषज्ञों की सलाह है कि ताजे और पैकेट बंद आटे का इस्तेमाल करें। खुले, बासी कूट्टू का आटे के बनें व्यंजन कतई न खाएं।

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वरिष्ठ फिजिशियन डा. संदीप जैन ने कहा कि नौ दिन के उपवास के दौरान सबसे ज्यादा कुट्टू के आटे का उपयोग करते हैं। वैसे इसमें प्रोटीन और फाइबर होता है, लेकिन प्राय: देखा गया है कि अशुद्ध व बासी आटे से बने व्यंजन का सेवन करने से लोग बीमार पड़ जाते हैं। इसलिए सतर्कता जरूरी है। कुट्टू के आटे की पहचान जरूरी है। यदि ग्रे या लाइट ब्राउन कलर का आटा है तो इस्तेमाल योग्य है।

यदि आटे का रंग पीला या काला हो अथवा उसमें गांठें पड़ गई हों और उसमें से दुर्गंध आ रही हो तो उसका सेवन कतई नहीं करना चाहिए। बासी या फंगस वाला आटे का इस्तेमाल करने से एलर्जी, सांस फूलने, गैस बनने और पेट के संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उपवास खत्म करते समय यह ध्यान जरूर रखें कि तुरंत भारी भोजन न करें। हल्के भोजन से ही उपवास खत्म करें। डायबिटीज के मरीज अपने चिकित्सक की सलाह पर ही उपवास शुरू करें।

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डायटीशियन डा. भावना गांधी की सलाह
-अचानक अन्न छोड़ने से बचें। चक्कर और कमजोरी हो सकती है। लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय फल, मखाने या नारियल पानी लें।
-चाय-काफी सीमित (एक-दो कप) लें और ब्लड शुगर के मरीज अपने स्तर का ध्यान रखें। सुबह की शुरुआत अंजीर व मुनक्का का पानी पीकर करें।
-डिहाइड्रेशन से बचने के लिए नियमित रूप से नारियल पानी, नींबू पानी, मट्ठा या सूप पिएं।
-तली हुई चीजें छोड़ने के बजाय मखाने की खीर, लौकी या कद्दू के व्यंजन और प्रोटीन (पनीर, दही) शामिल करें।
-कम तेल में खाना बनाएं। एक बार में ज्यादा न खाएं। वसा वाले खाद्य पदार्थ जैसे आलू का कम इस्तेमाल करें।

आयुर्वेदाचार्य डा. आलोक शर्मा की सलाह
-सुबह के नाश्ते में मखाने की खीर, सूखे मेवे, फल, ताजा पनीर, और दूध लें। चाय का सेवन कम करें।
-दोपहर व शाम के आहार में सिंघाड़ा, कुट्टू (पथरी वाले न लें) या राजगिर का आटा, सामक के चावल, और साबूदाना खाएं।
-सब्जियों में लौकी, कद्दू, शकरकंदी के व्यंजन और उबला हुआ पानी तीन लीटर दिनभर में पिएं। गाय के देशी घी का प्रयोग करें। दही में काली मिर्च लें।
-गुड़ के लड्डू, सिंघाड़े के आटे में पनीर मिलाकर अप्पे बनाकर सेवन करें।