नंगली किठौर ने रचा इतिहास: UP का तंबाकू मुक्त पहला गांव बना; अब मेरठ के 18 और गांव चले इसकी राह
मेरठ का नंगली किठौर उत्तर प्रदेश का पहला तंबाकू मुक्त गांव बन गया है। इसकी सफलता से प्रेरित होकर अब ...और पढ़ें

अजराड़ा गांव स्थित दुकान पर तंबाकू से बने उत्पाद चेक करते स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी l जागरण आर्काइव
HighLights
स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और स्थानीय स्तर की टीमें तंबाकू छोड़ने को कर रहीं प्रेरित।
मार्च 2027 तक मेरठ जिले के 18 और गांवों को पूरी तरह से तंबाकू मुक्त करने का लक्ष्य।
सर्वेंद्र पुंडीर, मेरठ। माछरा ब्लाक स्थित नंगली किठौर ग्राम पंचायत ने अपनी एकजुटता और दृढ़ संकल्प से न केवल खुद को उत्तर प्रदेश का पहला तंबाकू मुक्त गांव बनाया, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए स्वास्थ्य की एक नई मिसाल पेश की। इस ऐतिहासिक कामयाबी से प्रेरित होकर अब स्थानीय प्रशासन ने जिले के 18 और गांवों को पूरी तरह से तंबाकू मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
यह पहल सिर्फ तंबाकू की बिक्री या सेवन पर रोक लगाने का प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल से कैंसर, हृदय रोग जैसी जानलेवा बीमारियों को जड़ से मिटाने और आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ, सुरक्षित व दीर्घायु जीवन देने का एक महाअभियान है।
नंगली किठौर के ग्रामीणों ने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज ठान ले तो किसी भी सामाजिक बुराई को हराया जा सकता है। अब समय आ गया है कि इन 18 गांवों के नागरिक भी इस स्वास्थ्य क्रांति के सिपाही बनें, ताकि हमारा हर घर नशामुक्त और खुशहाल हो सके।
स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन और स्थानीय स्तर पर गठित टीमों के माध्यम से ग्रामीणों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सीएमओ डा. रामप्रसाद का दावा है कि इन गांवों में करीब 75 प्रतिशत आबादी तंबाकू का सेवन करना छोड़ चुकी है। मुख्य विकास अधिकारी नूपुर गोयल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर इन गांवों में बैठकें, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रशासन का उद्देश्य केवल तंबाकू की बिक्री रोकना नहीं, बल्कि ग्रामीणों में ऐसी जागरूकता पैदा करना है, जिससे नई पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आने से बच सके। जगह-जगह चौपाल और बैठकें करके तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है। लोगों को बताया जा रहा है कि तंबाकू का सेवन केवल मुंह और फेफड़ों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि हृदय रोग, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ाता है।
बच्चों और युवाओं पर विशेष जोर
जिला पंचायत राज अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि नंगली किठौर को तंबाकू मुक्त बनाने के बाद प्रशासन अब दूसरे गांवों में भी इसी माडल को आगे बढ़ा रहा है। हर गांव में नंगली किठौर का उदाहरण दिया जा रहा है। अभियान में बच्चों और युवाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
स्कूल-कालेजों में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। वहीं गांवों में पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, आशा और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीणों के साथ बैठकें कर तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन गांवों में भी तंबाकू बेचने पर जल्द ही जुर्माने जैसा प्रविधान किया जाएगा।
इन गांवों को मार्च 2027 तक तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य
खरखौदा विकास खंड के गांव अड़, अजराना, मुंडाली, रसूलपुर धंतला, बरहानपुर, पीपली खेड़ा, बिजौली, गंगेरी, जसौरा, मेरठ विकास खंड के गांव अजराड़ा, अटौला, अतराड़ा, अलीपुर, जिजमाना, फफूंड़ा, महरौली, गंगोल, बहादुरपुर गांवों में तंबाकू मुक्त अभियान चल रहा है। इन गांवों के दुकानदारों से अपील की जा रही है कि वह तंबाकू से बने उत्पाद न बेचें।
सेहत को क्या नुकसान, यह भी बताया जा रहा
- मुंह, गले और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है।
- हृदय रोग और स्ट्रोक की आशंका बढ़ सकती है।
- फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ ही सांस संबंधी बीमारियां हो सकती हैं।
- दांतों और मसूड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है।
- मुंह में सफेद या लाल धब्बे और कैंसर से पहले होने वाले बदलाव हो सकते हैं।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता और सामान्य स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
- गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
- लंबे समय तक सेवन आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का कारण भी बन सकता है।
