Blue drum case: सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषी मुस्कान-साहिल बोले- हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे केस
Saurabh Rajput murder case: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जिला जज की अदालत ने हत्या ...और पढ़ें

मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के फाइल फोटो
HighLights
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से दोनों को अधिवक्ता मुहैया कराया जाएगा।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर और डाॅक्टरों ने दोनों को समझाकर तनावमुक्त करने का प्रयास किया।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जिला जज की अदालत ने हत्या का दोषी ठहराया है। इसके बाद से दोनों काफी तनाव में हैं। दो अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जेलर और डाॅक्टरों की टीम ने उन्हें तनाव से मुक्त करने का प्रयास किया।
इस दौरान, मुस्कान और साहिल ने निर्णय आने के बाद हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अपनी लड़ाई जारी रखने की बात कही। जेल प्रशासन ने दोनों को हाई कोर्ट के लिए अधिवक्ता मुहैया कराने हेतु राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पत्र भेजा है। दोनों के दोषी सिद्ध होने के बाद जेल प्रशासन ने उनकी निगरानी बढ़ा दी है, ताकि वे कोई गलत कदम न उठा सकें।
ब्रह्मपुरी के रहने वाले सौरभ राजपूत की तीन मार्च 2025 की रात को पत्नी मुस्कान ने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। शव के चार टुकड़े कर नीले ड्रम में डालकर सीमेंट से जमा दिया था। उसके बाद दोनों हिमाचल घूमने गए। 17 मार्च को वापस लौटने के बाद ही घटना का पर्दाफाश हुआ। 19 मार्च को ब्रह्मपुरी पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
तभी से दोनों जेल की सलाखों के पीछे है। जेल में रहते हुए ही मुस्कान ने 28 नवंबर 2025 को एक बेटी को जन्म दिया। सौरभ के परिवार ने आरोप लगाया कि यह बेटी भी साहिल की है। हालांकि अभी तक डीएनए टेस्ट नहीं कराया जा सका है। पुलिस की तरफ से आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल होने के बाद अदालत निर्णय तक पहुंच गई। साक्ष्य के आधार पर दोनों को हत्या का दोषी मान लिया गया।
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14 अक्टूबर को सजा के लिए अदालत अपना निर्णय सुनाएगी। दोषी करार होते ही जेल में साहिल और मुस्कान को बड़ा झटका लगा। उन्होंने जेल से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिये ही अपनी पेशी कराने की बात कही थी। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों ने उक्त निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने का निर्णय लिया है।
हाईकोर्ट में अर्जी लगाने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से अधिवक्ता मुहैया कराने के लिए आवेदन किया है। हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट के लिए भी दोनों को सरकारी की तरफ से अधिवक्ता दिया जाएगा। ताकि उनका पक्ष रखा जा सकें।
