सहारनपुर, जेएनएन। फिल्म वांटेंड, दबंग और एक था टाइगर जैसी कामयाब फिल्मों की मशहूर संगीतकार जोड़ी साजिद-वाजिद के वाजिद खान के निधन से सहारनपुर में शोक छा गया है। वाजिद के पिता शराफत अली खान यहां से 50 वर्ष पूर्व मुंबई चले गए थे। सोमवार को मुंबई के एक अस्पताल में वाजिद ने आखिरी सांस ली। वाजिद अक्सर सहारनपुर आने का बहाना तलाशते थे। वह कहते थे कि यह हमारे दादा की सरजमी है। वाजिद को सहारनपुर का तिलबुग्गा और ताहरी खूब पसंद थी। उनकी मौत ने एक बार फिर बॉलीवुड को गमगीन कर दिया है।

वाजिद खान सहारनपुर के सराय अहमद अली के रहने वाले थे। उनका जन्म मुंबई में हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था। पिता उस्ताद शराफत अली खान जाने-माने तबला वादक थे। वहीं, दादा उस्ताद अब्दुल लतीफ खान सारंगीवादक थे, जिन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था।

संगीत घराने से आने वाले वाजिद फिल्म इंडस्ट्री में सलमान खान को अपना बड़ा भाई मानते थे। सराय अहमद अली निवासी उनके पारिवारिक मित्र राव मेहबूब बताते हैं कि वाजिद के पिता शराफत अली खान करीब 50 वर्ष पूर्व यहां से मुंबई चले गए थे। मशहूर कव्वाल इकबाल साबरी उनके फूफा थे। वाजिद के पुश्तैनी मकान में अब उनके चाचा अहसान की बेटी रहती है।

वह बताते हैं कि 17 मार्च 2019 को साजिद-वाजिद यहां आए थे। वह पारिवारिक विवाह समारोह और सुख-दुख में शरीक होने के लिए आते रहते थे। रिश्तेदार गुलाम रब्बानी बताते हैं कि वाजिद कम बातचीत करते थे, लेकिन संगीत की उन्हें गहरी समझ थी। वह भीड़भाड़ से बचते थे और मिलने-जुलने से परहेज करते थे, जबकि साजिद काफी मिलनसार हैं। फूफा इकबाल साबरी की सरपरस्ती में वाजिद ने ऊंचा मुकाम हासिल किया।

Posted By: Taruna Tayal

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