मेरठ, जेएनएन : दामोदर हाउसिंग सोसायटी के पक्ष में किए गए हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध में नगर निगम पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। इसकी तैयारी निगम अफसरों ने शुरू कर दी है। जमीन से जुड़े दस्तावेज जुटा लिए गए हैं।

दामोदर कालोनी में खसरा संख्या 319 में करीब आठ हजार वर्ग मीटर जमीन है। नगर निगम का दावा है कि यह जमीन राजस्व अभिलेखों में राज्य सरकार की संपत्ति के रूप में दर्ज है। नगर निगम के संपत्ति अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन एसडीएम ने दामोदर हाउसिंग सोसायटी का पट्टा निरस्त कर दिया था और इस जमीन को भट्टा खदान की जमीन के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई की थी। इसके बाद सोसायटी की ओर से अपर आयुक्त के यहां अपील की गई थी, लेकिन अपर आयुक्त ने अपील खारिज कर दी थी। वर्ष 2010 में दामोदर हाउसिंग सोसायटी के लोग हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता के कब्जे में हस्तक्षेप करने, बेदखल करने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दामोदर कालोनी की इस जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने को नगर निगम के अधिकारियों ने 2014 में एडीएम वित्त और रजिस्ट्री विभाग को पत्र जारी किया था। संपत्ति अधिकारी ने कहा कि निगम का पक्ष हाईकोर्ट में नहीं सुना गया था। इसके लिए पुनर्विचार याचिका का प्रस्ताव रखा गया था, जो अब दाखिल की जाएगी। हाईकोर्ट में अपील करेंगे कि नगर निगम का पक्ष सुना जाए। हाईकोर्ट में दस्तावेजों के साथ मजबूत पैरवी की जाएगी। कई साल से हो रहा कब्जे का प्रयास

वर्तमान में इस जमीन की कीमत करोड़ों में है। कई साल से इस जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो बुलंदशहर का कोई व्यक्ति फर्जी सोसायटी बनाकर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है। इस संबंध में कई दिन पहले जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत की गई थी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट लेखपाल के साथ बीते सोमवार को मौके पर गए थे। मौजूदा हालात में बाउंड्रीवाल और एक कमरे का निर्माण हो चुका है, जिसका काम रुकवाया गया था। स्थानीय लोग बता रहे हैं पार्क की जमीन

वहीं, दामोदार कालोनी के स्थानीय लोगों का कहना है कि दामोदर हाउसिंग सोसायटी के नक्शे में यह जमीन पार्क के रूप में दर्ज है। उनका कहना है कि इस जमीन में पार्क बनना चाहिए। आए दिन लोग आते हैं जमीन देखने। पूछते हैं यह जमीन सस्ते दर पर बिक रही है क्या, जबकि यह दामोदर कालोनी का एक नंबर पार्क है।

Posted By: Jagran

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