सर्वेंद्र पुंडीर, सहारनपुर। Mukim Kala Murder चित्रकूट जिला कारागार में मारा गया कुख्यात मुकीम काला भले ही मीडिया पर पिछले दो दिनों से छाया हो, लेकिन अदालत ने उसे तभी मरा हुआ मानेगी, जब उसकी फाइल चित्रकूट जेल से पहले जिला कारागार सहारनपुर पहुंचेगी और फिर सरकारी वकील के माध्यम से अदालत में। शामली जिले के जहानपुरा गांव निवासी मुकीम काला के खिलाफ अकेले सहारनपुर जिले में हत्या, लूट, डकैती आदी धाराओं में 31 मुकदमें सहारनपुर की अदालत में चल रहे हैं।

यह बताया अधिवक्‍ता ने

मुकीम काला के वरिष्ठ अधिवक्ता खुर्शीद ने बताया कि सिपाही राहुल ढाका की हत्या का मामला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन में चल रहा था। तनिष्क शोरूम में डकैती का मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या छह में विचाराधीन है। इसके अलावा अन्य मुकदमे गैंगस्टर कोर्ट, एडीजे प्रथम, द्वितीय में भी चल रहे हैं।

केस से हट जाएगा नाम

अधिवक्ता खुर्शीद का कहना है कि चित्रकूट में हुए गोलीकांड में एफआइआर भी दर्ज हुई है। इसलिए अदालत में चित्रकूट से लिखकर आएगा कि मुकीम काला मारा गया है। इसके बाद अदालत उसे मरा हुआ मानेगी और मुकदमे से उसका नाम हटेगा। बता दें कि एसटीएफ ने मुकीम काला को गिरफ्तार करने के बाद सहारनपुर पुलिस को सौंप दिया था। उसने जमानत के लिए कोर्ट में कभी प्रार्थना पत्र नहीं दिया था।

काला का अंत, सहारनपुर के लिए बेहतर : अभय सैनी

बार संघ एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय सैनी ने कहा कि मुकीम काला का जिले में आतंक था। इसलिए उस पर सबसे अधिक मुकदमें सहारनपुर में दर्ज हैं। शुक्रवार को जब मुकीम काला के मारे जाने की खबर आई तो लोगों ने राहत की सांस ली है। अधिवक्ताओं में भी मुकीम काला के मारे जाने से खुशी है।

सपा सरकार में था नेताओं का संरक्षण

सहारनपुर जिले में इंटरनेट मीडिया पर लगातार चल रहा है कि मुकीम काला को सपा की सरकार में कुछ नेताओं का संरक्षण मिला हुआ था। इस वजह से वह बचा हुआ था। एसटीएफ ने भी उसे सपा सरकार में ही गिरफ्तार किया था, लेकिन वह एनकाउंटर से बच गया था।