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Innovation Challenge : छोटी लागत-बड़ी सोच, युवाओं के नवाचारों में दिखा समाधान का नया रास्ता

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 08 Oct 2026 05:30 AM (IST)

युवाओं ने 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज' में कम लागत वाले नवाचार प्रस्तुत किए, जो प्रदूषण, खेती, यातायात सुरक्षा और वर्षा ...और पढ़ें

आइटीआइ साकेत में आयोजित ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में ‘स्मार्ट रोड सेफ्टी (यू-टर्न या ब्लाइंड टर्न सेफ्टी सिस्टम)’ का माडल दिखाते राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) साकेत के छात्र। जागरण

आइटीआइ साकेत में आयोजित ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में ‘स्मार्ट रोड सेफ्टी (यू-टर्न या ब्लाइंड टर्न सेफ्टी सिस्टम)’ का माडल दिखाते राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) साकेत के छात्र। जागरण

HighLights

  1. कम लागत वाले सोलर एयर प्यूरीफायर का निर्माण।

  2. किसानों के लिए 'मैत्री' ऐप विकसित किया गया।

  3. स्वचालित वर्षा सुरक्षा और स्मार्ट रोड सेफ्टी सिस्टम।

जागरण संवाददाता, मेरठ।  तकनीक तभी सार्थक है, जब वह आम आदमी की जिंदगी को आसान बनाने के काम आए। इसी सोच के साथ विद्यार्थियों ने ऐसे नवाचार तैयार किए हैं, जो कम लागत में प्रदूषण, खेती, यातायात सुरक्षा और वर्षा जैसी रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान देने की कोशिश करते हैं।

सेवा संकल्प अभियान के तहत आइटीआइ साकेत में आयोजित ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ में कहीं बिजली कटौती वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कम लागत वाला आइओटी एयर प्यूरीफायर तैयार किया गया है तो कहीं किसानों को मिट्टी, फसल और बाजार की जानकारी देने के लिए ‘मैत्री’ ऐप बनाया गया है।

बारिश शुरू होते ही कपड़ों और सामान को स्वत: ढक देने वाली प्रणाली भी विद्यार्थियों ने विकसित की है। इन माडलों में खास बात यह है कि विद्यार्थियों ने महंगी तकनीक के बजाय स्थानीय जरूरत और कम लागत को केंद्र में रखा है।

बिजली कटौती वाले क्षेत्रों के लिए कम लागत का सोलर आइओटी एयर प्यूरीफायर
प्रदूषण से राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह सोलर माडल विशेष रूप से उन क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जहां बिजली की कटौती की समस्या रहती है। आइआइएमटी विश्वविद्यालय में बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र राहुल शर्मा ने अपने साथियों मनीष कुमार, सुफियान और कृष्णा शर्मा के साथ मिलकर इसे करीब एक महीने में तैयार किया है।

माडल में हवा को पहले एक बड़ी जाली (मेश) से गुजारा जाता है, जिससे बड़े कण रुक जाते हैं। इसके बाद मुख्य फिल्टर के जरिए पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कणों को रोकने की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त बाहरी फिल्टर और बैक्टीरिया के नियंत्रण के लिए यूवी बल्ब का इस्तेमाल किया गया है। विद्यार्थियों के अनुसार माडल को तैयार करने में करीब 3000 रुपये की लागत आई है, जबकि इसका छोटा संस्करण लगभग 1500 रुपये में तैयार किया जा सकता है। बाजार में उपलब्ध महंगे एयर प्यूरीफायर की तुलना में इसे कम लागत वाला विकल्प बनाने का प्रयास किया गया है।

किसानों का ‘मित्र’ बनेगा ‘मैत्री’ ऐप
मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नलोलाजी के ईसी द्वितीय वर्ष के छात्र निखिल शर्मा, नितीश मांगलिक और शिवांश मोहन शर्मा ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ‘मैत्री’ नाम का पोर्टल व ऐप तैयार किया है। इसका उद्देश्य किसानों को खेती से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना है।

ऐप में किसान अपना नाम, जमीन का क्षेत्रफल और लोकेशन दर्ज कर सकता है। जमीन की मिट्टी की किस्म और पहले उगाई गई फसल की जानकारी के आधार पर ऐप पोषक तत्वों की कमी का आकलन करने और जैविक और अजैविक उर्वरकों के सुझाव देने के लिए तैयार किया गया है। इसके साथ ही किसानों को फसलों के बाजार मूल्य, संभावित लाभ और संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है।

बारिश आते ही खुद ढक जाएगा कपड़ा और सामान
बारिश के अचानक आने पर घरों की छत या खुले स्थान पर सूख रहे कपड़ों को भीगने से बचाने के लिए सीएमएस दौराला पालीटेक्निक की तृतीय वर्ष की छात्राओं अंशिका, रिया और सलोनी ने स्वचालित वर्षा सुरक्षा प्रणाली तैयार की है। इस माडल में वाटर-रेन सेंसर प्लेट का इस्तेमाल किया गया है।

जैसे ही बारिश की बूंदें सेंसर पर गिरती हैं, सिस्टम सक्रिय होकर सर्वो मोटर को सिग्नल भेजता है। इसके बाद मोटर 0 से 90 डिग्री तक घूमकर शेड को कपड़ों या सामान के ऊपर ले आती है। इससे बारिश शुरू होते ही उसे ढकने की प्रक्रिया स्वत: शुरू हो जाती है। इस प्रणाली को आरडुइनो आइडीई के माध्यम से प्रोग्राम किया गया है। विद्यार्थियों के अनुसार इसका इस्तेमाल केवल कपड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। इसे जरूरत के अनुसार फसलों, वाहनों और अन्य सामान को बारिश से बचाने के लिए भी विकसित किया जा सकता है।

ब्लाइंड टर्न और यू-टर्न पर हादसे रोकने को तैयार किया स्मार्ट रोड सेफ्टी सिस्टम
सड़क पर ब्लाइंड टर्न और यू-टर्न दुर्घटनाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील स्थान होते हैं। ऐसे स्थानों पर सामने से आ रहे वाहन का समय पर पता न चल पाने से टक्कर का खतरा बना रहता है। इस समस्या के समाधान के लिए राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आइटीआइ) साकेत के छात्रों ने ‘स्मार्ट रोड सेफ्टी (यू-टर्न या ब्लाइंड टर्न सेफ्टी सिस्टम)’ विकसित किया है।

इस माडल का उद्देश्य ब्लाइंड टर्न और यू-टर्न पर वाहनों की आवाजाही को सेंसर की मदद से पहचानकर चालकों को समय रहते चेतावनी देना है। छात्रों ने सड़क सुरक्षा को तकनीक से जोड़ते हुए इसमें व्हीकल सिस्टम, सेंसर आधारित नियंत्रण, वार्निंग सिस्टम, सोलर आधारित पावर सप्लाई और एलडीआर नियंत्रित स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं को शामिल किया है।

माडल में सेंसर आधारित नियंत्रण प्रणाली सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करती है। इसके आधार पर चेतावनी प्रणाली सक्रिय होकर वाहन चालकों को संभावित खतरे के प्रति सचेत करती है। इससे विशेष रूप से ऐसे मोड़ पर दुर्घटना की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है, जहां सामने से आने वाला वाहन सीधे दिखाई नहीं देता। इस नवाचार को प्रज्ञान सिंह (टीम लीडर) के नेतृत्व में दुर्वेश और तुषार ने तैयार किया है।