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स्टांप घाेटाले के आरोपित अक्षय गुप्ता की 10.05 करोड़ की संपत्ति कुर्क; कोठी में इस्तेमाल किया था इटालियन पत्थर

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 29 Sep 2026 02:26 PM (IST)

Meerut News: मेरठ में साढ़े सात करोड़ के फर्जी स्टांप घोटाले के आरोपी अक्षय गुप्ता की 10.05 करोड़ रुपये की ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. मेरठ में विदेशी इंटीरियर डिजाइनर से कोठी तैयार कराई थी।

  2. गंगानगर और डुंगरावली स्थित कोठी व भूखंड पुलिस ने जब्त किए।

जागरण संवाददाता, मेरठ। फर्जी स्टांप पर किए गए 997 बैनामे और सरकार को 7.50 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान पहुंचाने के मास्टरमाइंड अधिवक्ता विशाल वर्मा के सहयोगी स्टांप वेंडर अक्षय गुप्ता की गंगानगर व ग्राम डुंगरावली स्थित कोठी को पुलिस ने कुर्क कर लिया है। इन संपत्तियों की सरकारी कीमत 10 करोड़ 05 लाख रुपये है।

कोठी का निर्माण विदेशी इंटीरियर डिजाइन से किया गया है। इसकी दीवारों पर इटालियन पत्थर लगाया गया है। बता दें कि अक्षय गुप्ता दिसंबर में छह मुकदमों में फर्जी जमानत पर बाहर आ गया था। हालांकि बाद में उसे दोबारा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

सूरजकुंड निवासी अक्षय गुप्ता ने धोखाधड़ी के छह मुकदमों में जमानती दीपक, सोनू निवासी मुल्ताननगर, अजय, रोशन, पंकज, भारत निवासीगण कसेरुखेडा थाना लालकुर्ती को जमानतदार बनाया। जमानत कराने के लिए अधिवक्ता नवी हसन जैदी को चुना गया। उक्त लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर टीपीनगर थाने के दारोगा चंद्रपाल और लालकुर्ती थाने के दारोगा हरपाल और रंजीत से तस्दीक दिखाए गए। जांच में सामने आया कि उक्त दारोगा इन थानों में तैनात नहीं है। अक्षय गुप्ता ने उनकी फर्जी मोहर बनाकर हस्ताक्षर कर दिए थे।

एसपी सिटी विनायक भोसले ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अक्षय गुप्ता की गंगानगर स्थित कोठी को कुर्क कर लिया। पुलिस की जांच में सामने आया कि कोठी में लगाई गई रकम अवैध तरीके से कमाई हुई थी। इसीलिए कोठी को कुर्क कर लिया गया है। अक्षय गुप्ता की अन्य संपत्तियों के बारे में जांच कराई जा रही है।

ये था स्टांप घाेटाला

उपनिबंधन कार्यालय के कनिष्ठ सहायक निबंधक प्रदीप कुमार ने सिविल लाइंस थाने में बैनामा कराने वालों के खिलाफ 22 मई 2024 को मुकदमा कराया। साथ ही 997 लोगों को स्टांप में कमी बताकर नोटिस जारी किए गए। सभी ने बताया कि उन्होंने अधिवक्ता विशाल वर्मा को स्टांप के पूरे पैसे दिए थे। जांच में साढ़े सात करोड़ के फर्जी स्टांप का मामला पकड़ में आया। तब विशाल वर्मा के खिलाफ मुकदमा हुआ। एसआइटी की रिपोर्ट के आधार पर विशाल और उसके दो सहयोगी राहुल वर्मा व राहुल वर्मा पर मुकदमा हुआ।

फिर कनिष्ठ सहायक अनिल कुमार ने मुकदमे में बताया कि 997 बैनामों से प्रभावित लोगों की शिकायत की गई थी। विशाल ने जो स्टांप दिए वह कोषागार से जारी नहीं हुए। उन पर कोषागार की मुहर भी फर्जी है। विशाल ने गिरफ्तारी के बाद बताया कि स्टांप उसने अक्षय गुप्ता से खरीदे थे। पुलिस ने 12 जनवरी को अक्षय गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अक्षय गुप्ता फर्जी जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आ गया था। चार दिसंबर 2025 को पुलिस ने दोबारा से अक्षय गुप्ता गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फिलहाल अक्षय गुप्ता जेल में बंद है।

आयकर की जांच में हुआ था राजफाश

आयकर विभाग ने भी अक्षय गुप्ता की जांच की। अभिलेखों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में आरोपित की घोषित आय 4,54,577 रुपये व वर्ष 2021-22 में 3,66,330 रुपये रही। अक्षय की पत्नी निधि गुप्ता की वित्तीय वर्ष 2020-21 में आय 3,57,490 रुपये व वर्ष 2021-22 में 4,22,190 रुपये दर्ज की गई। अन्य वर्षों की आयकर विवरण की जानकारी की जा रही है। पुलिस ने आरोपित एवं उसकी पत्नी की आयकर विवरणी में सम्पत्तियों के क्रय, ऋण एवं निर्माण पर हुए खर्च से मिलान करअपनी विवेचना में शामिल किया।

ये है कुर्क की गई संपत्ति की जानकारी :

  • ए-316, एचआईजी पाकेट-ए, गंगानगर मेरठ: क्षेत्रफल करीब 297.19 वर्ग मीटर, अनुमानित मूल्य 4.77 करोड़।
  • बी-36, राधा गार्डन, गंगानगर मेरठ: क्षेत्रफल करीब 271.75 वर्ग मीटर, अनुमानित मूल्य 5.03 करोड़।
  • भूखण्ड एफ-44, ग्राम डुंगरावली: क्षेत्रफल करीब 149.75 वर्ग मीटर, अनुमानित मूल्य 25 लाख।