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हवा में घुला जहर! खेल प्रतियोगिताओं पर मंडराया खतरा, प्रतियोगिता टालने के निर्देश

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 18 Oct 2026 05:30 AM (IST)

बढ़ते प्रदूषण के कारण नवंबर-दिसंबर में निर्धारित शारीरिक खेल प्रतियोगिताओं को टालने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस फैसले ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)

(प्रतीकात्मक फोटो)

जागरण संवाददाता, मेरठ। प्रदूषण बढ़ने पर हवा को साफ करने के लिए पहल करने की बजाय खेलों के मामले में तस्वीर उलट नजर आ रही है। हवा में जहर घुलने की आशंका के बीच एक बार फिर खेल प्रतियोगिताओं को टालने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की एडवाइजरी पर शासन ने नवंबर-दिसंबर में निर्धारित शारीरिक खेल प्रतियोगिताओं को पुनर्निर्धारित करने का विषय उठाया है।

आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता के रुझानों को देखते हुए इन दो महीनों में शारीरिक खेल गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित न करने की सलाह दोहराई है। साथ ही पहले से तय प्रतियोगिताओं को दूसरी तारीखों पर कराने और स्थगन से प्रभावित विद्यार्थियों को वैकल्पिक अवसर देने की बात भी कही गई है।

सवाल यह नहीं कि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य की चिंता क्यों की जा रही है। यह चिंता बिल्कुल जायज है। सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य की रक्षा का पूरा दायित्व खेल रोक देने से पूरा हो जाएगा, या प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है? खेल कैलेंडर में प्रतियोगिता केवल एक दिन का मुकाबला नहीं होती। उसके पीछे महीनों की तैयारी, नियमित अभ्यास, शारीरिक क्षमता का विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और चयन की प्रक्रिया होती है।

खिलाड़ी रोज मैदान पर उतरते हैं, दौड़ते हैं, अभ्यास करते हैं और अपनी सीमाओं को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करते हैं। कई खिलाड़ियों के लिए यही समय आगामी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की तैयारी का होता है।

ऐसे में यदि नवंबर और दिसंबर में प्रतियोगिताएं स्थगित होती हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इन दो महीनों में खिलाड़ियों का अभ्यास भी बंद रहेगा? यदि अभ्यास जारी रहेगा, तो उसके लिए सुरक्षित वातावरण, समय और स्थान की व्यवस्था कौन करेगा? और यदि अभ्यास भी रोक दिया जाता है, तो खिलाड़ियों की फिटनेस, प्रदर्शन और चयन की तैयारी पर पड़ने वाले असर की भरपाई कौन करेगा? ऐसे में कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम सहित सभी खेल संस्थानों को भी इन दो महीनों के लिए बंद करना पड़ेगा।

क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव से पूछने पर उन्होंने शासन के आदेश का अनुपालन कराने की ही बात कही। उनके पास भी प्रशिक्षण सहित अन्य सवालों केजवाब नहीं मिले। जिला एथलेअिक्स संघ के सचिव अनु कुमार का कहना है कि दो महीने का समय किसी खिलाड़ी के लिए मामूली नहीं होता। एथलेटिक्स, फुटबाल, हाकी, क्रिकेट, कुश्ती, कबड्डी और अन्य खेलों में निरंतर अभ्यास जरूरी है।

प्रशिक्षण की लय टूटने का असर केवल मैदान पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता। खिलाड़ी की फिटनेस, आत्मविश्वास और प्रतियोगिता के लिए तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। कहा कि खिलाड़ी कोविड के दौरान भी अकेले ग्रामीण अंसलों, खेतों, बागानों में अभ्यास इसीलिए करते रहें जिससे सामान्य स्थिति होते ही वह प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकें।