मेरठ, जेएनएन। अक्सर हालात इंसान को अजीबोगरीब मोड़ पर पहुंचा देते हैं। करनाल के कुंजपुरा क्षेत्र की एक महिला की दास्तां यही हकीकत बयां कर रही है। महिला का आरोप है कि उपचार का झांसा देकर उत्तर प्रदेश के मेरठ के चिकित्सक दंपती उसका चार दिन का बच्चा ले गए और लौटा नहीं रहे। दूसरी ओर, बच्चे को पाल रहे मेरठ निवासी दंपती का कहना है कि नवजात को सीने से लगाकर नौ माह से परवरिश की है। बच्चा नहीं देंगे। इससे प्रकरण उलझ गया है।

पुलिस कर रही जांच

करनाल के कुंजपुरा थाने में आरोपित चिकित्सक और उनकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पीडि़त महिला ने जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दी थी। मूल रूप से छपरा बिहार की रहने वाली महिला ने आरोप लगाते हुए बताया कि कुंजपुरा वासी सहेली का मेरठ के एक चिकित्सक के पास उपचार चल रहा था। सहेली के साथ आने-जाने के कारण उसका भी चिकित्सक दंपती से परिचय हो गया। तब वह गर्भवती थी। उसके शरीर में दर्द हुआ तो चिकित्सक दंपती ने उसे भी दवाई दी।

यह है पूरा मामला

महिला के अनुसार गत वर्ष सितंबर में कल्पना चावला राजकीय अस्पताल में उसने बेटे को जन्म दिया। इस दौरान चिकित्सक दंपती उससे मिलने करनाल आए। बच्चा देख उन्होंने कहा कि इसे सांस लेने में परेशानी हो रही है। वह इसका उपचार करके लौटा देंगे। उससे कोरे कागजों पर दस्तखत करा लिए। कुछ दिन बाद बच्चा वापस मांगा तो चिकित्सक दंपती ने कहा कि उन्होंने बच्चा गोद ले लिया है जबकि उसने उपचार के लिए बच्चा उनके सुपुर्द किया था। महिला का आरोप है कि उसके दस्तखतशुदा कागजों पर मर्जी के मुताबिक गोदनामा लिखवा कर धोखाधड़ी की गई है। बच्चा करीब नौ माह का हो चुका है। उसे हर हाल में अपना बच्चा चाहिए। कुंजपुरा थाना प्रभारी मुनीष कुमार का कहना है कि चिकित्सक दंपती के खिलाफ केस दर्ज कर जांच की जा रही है।

खुद बच्चा गोद देने की बात

इधर, चिकित्सक डीपी श्रीवास्तव की बेटी निकिता ने बताया कि शास्त्रीनगर निवासी विशाल श्रीवास्तव और उनकी पत्नी नेहा पापा-मम्मी के पास आते थे। 21 साल तक औलाद नहीं होने के कारण दंपती बच्चा गोद लेना चाहता था। महिला को उपचार के लिए उनके क्लीनिक युवती लाई थी और कहा था कि महिला गर्भ में पल रहे तीसरे बच्चे को गोद देना चाहती है। दंपती को महिला से मिलवा दिया। महिला चार दिन के बच्चे को लेकर मेरठ आर्ई थी। शपथपत्र में भी महिला ने अपनी मर्जी से बच्चा गोद देने की बात कही है। विशाल और नेहा का कहना है कि बच्चे को पालकर नौ माह का किया है। इसे किसी कीमत पर नहीं देंगे।

क्या हैं नियम

कोई भी बच्चे को सीधे उसकी मां से गोद नहीं ले सकता। बच्चा गोद लेने के लिए सेंट्रल अडाप्शन रिसोर्स अथारिटी (कारा) की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। आवेदक से संपर्क किया जाता है और नियमानुसार बच्चा गोद दिया जाता है। कारा की टीम बच्चा गोद देने वाले परिवार की पड़ताल करती है।  

Edited By: Prem Dutt Bhatt