अश्व और श्वान चिकित्सा की आधुनिक तकनीकों पर मंथन आज से, संगोष्ठी में जुटेंगे विषय विशेषज्ञ व शोधकर्ता
भारतीय सेना के आरवीसी सेंटर एंड कॉलेज, मेरठ में अश्व और श्वान चिकित्सा तथा आधुनिक सैन्य श्वान प्रशिक्षण पर दो ...और पढ़ें

आरवीसी में आयोजित होगी दो दिनी यह सेमिनार। सौ. सेना
HighLights
अश्व और श्वान चिकित्सा पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार।
सैन्य पशुओं के स्वास्थ्य, उपचार और प्रशिक्षण पर चर्चा।
देश-विदेश के विशेषज्ञ साझा करेंगे आधुनिक तकनीकें।
जागरण संवाददाता, मेरठ। भारतीय सेना के आरवीसी सेंटर एंड कालेज में दो दिनी अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शुक्रवार 30 और 31 अक्टूबर को हो रही है। अश्व एवं श्वान चिकित्सा की उन्नत रणनीतियों और आधुनिक सैन्य श्वान प्रशिक्षण पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विशेषज्ञ, सैन्य पशु चिकित्सक, शोधकर्ता और श्वान प्रशिक्षण विशेषज्ञ भाग लेंगे।
संगोष्ठी में सैन्य उपयोग में आने वाले पशुओं के स्वास्थ्य, उपचार, प्रशिक्षण और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी। संगोष्ठी में अमेरिका, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड और इटली के विशेषज्ञ आधुनिक गंध पहचान तकनीक, सुरक्षा श्वान प्रशिक्षण, श्वानों की संज्ञानात्मक क्षमता और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा अश्व एवं श्वान पोषण, आधुनिक रोग निदान, शल्य चिकित्सा और रोग प्रबंधन जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य पशु चिकित्सा के क्षेत्र में उभरती तकनीकों और उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा करना है। सैन्य श्वानों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उनके व्यवहार, गंध पहचानने की क्षमता और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही अश्वों के स्वास्थ्य और बेहतर उपचार के लिए आधुनिक निदान एवं चिकित्सा पद्धतियों पर भी विचार-विमर्श होगा।
भारतीय सेना के इस आयोजन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देना और सैन्य पशुओं के स्वास्थ्य, कल्याण और परिचालन दक्षता को मजबूत करना है। विशेषज्ञों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान से सैन्य पशु चिकित्सा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। आरवीसी सेंटर एंड कालेज में होने वाली यह संगोष्ठी सैन्य पशु चिकित्सा और आधुनिक श्वान प्रशिक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ सैन्य कार्यों में पशुओं की प्रभावी भूमिका को और सशक्त बनाने का अवसर प्रदान करेगी।
