मेरठ में 1976-1978 के पहले निर्मित भवनों के स्वामियों से मांगा जाएगा प्रमाण, 16,726 संपत्तियों पर है कार्रवाई का भय
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मेरठ में 16,726 संपत्तियों पर कार्रवाई के भय से व्यापारी चिंतित हैं। व्यापारियों ने एमडीए ...और पढ़ें

मेरठ विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष से मुलाकात करते संयुक्त व्यापार संघ के पदाधिकारी। सौ. संगठन
HighLights
मेरठ में 16,726 संपत्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई का भय।
व्यापारियों ने 1976-78 पूर्व निर्मित भवनों के प्रमाण की मांग की।
प्रभावितों के लिए पुनर्वास व वैकल्पिक व्यवस्था की योजना मांगी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर व्यापारियों को 16,726 संपत्तियों पर कार्रवाई का भय सता रहा है। शनिवार को संयुक्त व्यापार संघ के प्रतिनिधि मंडल ने मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय मीणा से मुलाकात की। अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने कहा कि सीलिंग की कार्रवाई हुई तो शहर में हजारों परिवार प्रभावित होंगे। दुकानों पर कार्रवाई होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी पर संकट आ जाएगा। बैठक में व्यापारियों ने जोन बी, सी और डी में सर्वे की कार्रवाई रोकने की मांग की।
प्रभावित नागरिकों, व्यापारियों, संपत्ति स्वामियों, दुकानदारों, कर्मचारियों तथा उनके परिवारों की आजीविका और पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि एमडीए वीसी ने बताया कि 1976-1978 के पहले निर्मित इमारतों के स्वामियों से इस आशय का प्रमाण मांगा जाएगा। इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा कि मेडा के गठन के पहले शहर की यह स्थिति थी। इस मांग की गई कि प्रभावित व्यक्तियों को अपने पक्ष एवं अभिलेख प्रस्तुत करने का उचित अवसर प्राप्त हो।
व्यापारियों के द्वारा कहा गया उल्देपुर में कार्रवाई से बड़ी संख्या लोग बेघर हो जाएंगे। लोग बगावत पर उतर सकते हैं। यह पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखा जाना चाहिए। प्रदेश सरकार को भी इस मामले में पहल करनी चाहिए। महामंत्री संजय जैन, नीरज मित्तल, सुनील वर्मा विकास गिरधर
यह मांग रखी
- जोन-ए में चिह्नित 16,726 संरचनाओं की विस्तृत सूची उपलब्ध कराई जाए, जिसमें प्रत्येक संपत्ति का पता आदि हो।
- निर्माण को अनधिकृत / अवैध के रूप में वर्गीकृत करने का आधार स्पष्ट किया जाए।
- आवासीय, व्यावसायिक एवं मिश्रित उपयोग वाली संपत्तियों का पृथक-पृथक विवरण उपलब्ध कराया जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि 2,945 गैर-आवासीय संरचनाओं में कितनी दुकानें, प्रतिष्ठान, कार्यालय तथा व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
- जिन व्यापारियों एवं दुकानदारों पर कार्रवाई का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है, उनके लिए वैकल्पिक व्यापारिक व्यवस्था की स्पष्ट योजना बनाई जाए।
- प्रभावित व्यापारियों की आजीविका एवं पुनर्वास के संबंध में ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।
- उल्देपुर क्षेत्र के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायिक आयोग के समक्ष आवश्यक अभिलेख एवं प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध कराने में पूर्ण सहयोग किया जाए।
