अनुज शर्मा, मेरठ। Integrated airport मेरठ की परतापुर हवाई पट्टी का विस्तार करके एयरपोर्ट विकसित करने की योजना की बाधाएं दूर हुई तो अब घाटे का डर एजेंसियों को परेशान कर रहा है। एएआइ हो अथवा दिल्ली एयरपोर्ट इंटरनेशनल लिमिटेड एजेंसी दोनों ने शर्त रखी है कि घाटे को यदि प्रदेश सरकार वहन करे तो वे एयरपोर्ट विकसित करने को तैयार हैं। इसी उलझन के चलते अभी तक प्रदेश सरकार, एयरपोर्ट अथारिटी आफ इंडिया तथा डायल (दिल्ली एयरपोर्ट इंटरनेशनल लिमिटेड) के बीच अनुबंध भी हस्ताक्षर नहीं हो सका है। अब जल्द इन सभी बिंदुओं को लेकर सभी पक्षों के बीच शासन स्तर पर बैठक कराने की तैयारी की जा रही है।

कोशिशें लंबे समय से है जारी

मेरठ की परतापुर हवाई पट्टी का विस्तार करके उसे एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की कोशिश पिछले लंबे समय से जारी है। इसके लिए कुछ भूमि का अधिग्रहण पूर्व में ही किया जा चुका है। एयरपोर्ट के लिए आवश्यक भूमि के अधिग्रहण के लिए किसानों से वार्ता करके जमीन की दरों पर सहमति भी बनाने की कोशिश की गई थी। इसी तैयारी के तहत हवाई पट्टी को वर्ष 2014 में एएआइ को सौंप दिया गया था। लेकिन इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट का संचालन करने वाली एजेंसी से मेरठ में एयरपोर्ट के संचालन की एनओसी प्राप्त की जानी थी, जो कि नहीं मिल पा रही थी। हाल ही में उक्त एजेंसी डायल ने खुद ही मेरठ हवाई पट्टी पर विकसित होने वाले एयरपोर्ट का संचालन करने की सहमति दे दी थी। जिसके बाद दावा किया जा रहा था कि अब जल्द मेरठ से उड़ान का सपना पूरा होगा।

अब सता रहा घाटे का डर

प्रदेश व देश के अन्य शहरों में केंद्र सरकार की उडान योजना के तहत शहरों के बीच छोटी दूरी की हवाई सुविधा के लिए एयरपोर्ट विकसित किए गए हैं। लेकिन उनमें से अधिकांश का संचालन घाटे में है। मेरठ से भी छोटे विमान उड़ाकर लाभ मिलने की उम्मीद न तो एएआइ को है और न ही डायल को। लिहाजा घाटे के डर से दोनों ही एजेंसियां ठिठक रही हैं।

अभी तक नहीं हुआ अनुबंध

बाधाएं दूर होने तथा डायल द्वारा मेरठ में खुद एयरपोर्ट संचालन करने की सहमति देने के बाद अगली प्रक्रिया प्रदेश सरकार, एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया तथा संचालन करने वाली एजेंसी डायल के बीच त्रिपक्षीय अनुबंध होना था। लेकिन कोरोना का नाम लेकर इस प्रक्रिया को अभी तक पूरा नहीं किया गया। जबकि इसके पीछे दोनों एजेंसियों का घाटे का डर सामने आ रहा है। अपने इस डर को उन्होंने जाहिर भी कर दिया है। दोनों एजेंसियों ने प्रस्ताव दिया है कि मेरठ एयरपोर्ट के संचालन में होने वाला घाटा प्रदेश सरकार वहन करने का वादा करे तो वे इसके संचालन के लिए तैयार हैं।

इंटीग्रेटिड एयरपोर्ट का विकास है विकल्प

एजेंसियों का मानना है कि मेरठ से हवाई यात्रियों की संख्या शुरुआत में ज्यादा नहीं होगी। न ही ज्यादा शहरों के लिए शुरुआत में यहां से उड़ान कराई जा सकेगी। इस स्थिति में होने वाले घाटे को कैसे कम से कम अथवा खत्म किया जाए । इसके तरीकों पर मंथन किया जा रहा है। कमिश्नर सुरेन्द्र ङ्क्षसह का कहना है कि घाटे को खत्म करने के लिए यहां इंटीग्रेटिड एयरपोर्ट विकसित करने पर विचार किया जा सकता है। जिसमें हवाई यात्राओं की सुविधा के साथ जहाज उड़ाने के प्रशिक्षण और कार्गो सेंटर की स्थापना समेत अन्य गतिविधियों को भी अनुमति दी जा सकती है। इससे राजस्व बढ़ेगा और घाटा कम होगा।

जल्द होगी सभी पक्षों की बैठक

कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि अभी तक कोरोना संक्रमण के डर से सभी कुछ बंद था। लेकिन अब जल्द इसे लेकर लखनऊ में बैठक की जाएगी। जिसमें प्रदेश सरकार, एएआइ तथा डायल के साथ सभी विभागों के जिम्मेदार अधिकारी शामिल होंगे। इस बैठक को इसी सप्ताह में कराने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में इन सभी बिंदुओं पर सभी पक्षों के साथ चर्चा करके निर्णय लिया जाएगा।

एएआइ से वापस ली जा सकती है हवाई पट्टी

माना यह भी जा रहा है कि दोनों एजेंसी यदि बैठक में मेरठ में एयरपोर्ट संचालन से हाथ खड़ा करती हैं तो डायल से सरेंडर करने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। जिसके बाद प्रदेश सरकार अपने स्तर से गतिविधियां संचालित करा सकती है।

इंटीग्रेटिड एयरपोर्ट में होंगी ये गतिविधियां

- हवाई यात्रा की सुविधा

- विमान उड़ाने का प्रशिक्षण

- कार्गों सेंटर

Edited By: Prem Dutt Bhatt