मेरठ, जागरण संवाददाता। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) हस्तिनापुर के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने की तैयारी में जुटा है। फिलहाल, पांडव टीला स्थित अमृत कूप का जीर्णोद्धार व सौंदर्यकरण किया जा रहा है। नवंबर मध्य में पांडव टीले पर पुन: उत्खनन शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें कई रहस्य सामने आ सकते है।

महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर का इतिहास सर्वविदित है। आजादी के दौरान भी प्राचीन पांडव टीले पर आंदोलनकारी अंग्रेजों को मात देने की रणनीति बनाते थे। चूंकि, ये सभी बातें केवल इसी टीले तक सीमित होकर रह गई हैं। इन्हें आमजन तक पहुंचाने की कवायद एएसआइ ने शुरू की है। एएसआइ के अधीक्षण पुरातत्वविद् डीबी गणनायक ने बताया कि हस्तिनापुर अपने गर्भ में चार हजार वर्ष पुरानी संस्कृति समेटे है। दो माह पूर्व यहां हुए उत्खनन में भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले थे। उन्होंने बताया कि नवंबर के मध्य से पांडव टीले पर पुन: कार्य शुरू होने की उम्मीद है। इस बार यह कार्य लंबे समय तक चलेगा और काफी साक्ष्य मिलने की उम्मीद है।

आइकोनिक साइट बनेगी

डीबी गणनायक ने बताया कि उनका प्रयास अगले वर्ष तक पांडव टीले को आइकोनिक साइट के रूप में विकसित कर पर्यटन स्थल के तौर पर तैयार करना है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक पौराणिक संस्कृति से रूबरू हो सकें।अमृत कूप का हो रहा सौंदर्यीकरण

कहा जाता है कि अमृत कूप के पानी से स्नान करने से चर्म रोग दूर हो जाते हैं। इस महत्ता को समझते हुए एएसआइ इसका सौंदर्यीकरण करा रहा है। अमृत कूप के समीप हर्बल पार्क तथा महिलाओं के लिए कक्ष का निर्माण किया जाएगा। पार्क व कूप के समीप पत्थर की बेंच व डस्टबिन लगाए जा रहे हं। अमृत कूप का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है।

Edited By: Prem Dutt Bhatt