मौत के चार माह तक नहीं किया बेटी का अंतिम संस्कार, शव घर में रखकर हरिद्वार भाग गया पिता
Meerut News : मेरठ में एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने अपनी बेटी के शव को चार महीने तक घर में रखा। वह घर में ताला लगाकर हरिद्वार भाग गया।

प्रतीकात्मक फोटो, प्रियंका का फाइल फोटो और आरोपित उदयभान
HighLights
बीमार बेटी का झाड़-फूंक करने वाले से करा रहा था इलाज।
पुलिस ने पिता और तांत्रिक को हिरासत में लिया, जांच जारी।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सदर में बीमार बेटी को डाक्टर को दिखाने के बजाए पिता झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ गया और बेटी की मौत हो गई। पिता ने न तो शव का अंतिम संस्कार किया और न ही परिवार के लोगों को इसकी जानकारी दी। शव को एक कमरे में छिपा दिया। पांच दिन शव के पास रहा और फिर घर का ताला बंद कर हरिद्वार निकल गया। चार माह तक शव कमरे में ही पड़ा सड़ता रहा।
परिवार के लोग पिता-पुत्री की तलाश कर रहे थे। शुक्रवार को पिता बेगमबाग में चाय की दुकान पर बैठा मिला। पूछताछ करने पर परिवार के लोगों को बताया कि शव घर के अंदर कमरे में बंद है। पूरी तरह डी-कंपोज हो चुके शव को पुलिस ने कब्जे में ले लिया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने पिता और तंत्र मंत्र करने वाले को हिरासत में ले लिया है।
सदर बाजार के तेली मोहल्ला निवासी 76 वर्षीय उदयभान विश्वास पांच भाइयों में सबसे छोटा है। चार भाइयों की मौत हो चुकी है। उनका परिवार भी तेली मोहल्ले में रहता है। उदयभान यूपी बोर्ड में प्रशासनिक अधिकारी पद से सेवानिवृत्त है। 2013 में पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी।
उदयभान इकलौती बेटी 33 वर्षीय प्रियंका के साथ रहता था। प्रियंका एमसीए करने के बाद गंगा प्लाजा स्थित एक फर्म में नौकरी करती थी।उदयभान बेटी पर कड़ी निगरानी रखते था और परिवार के लोगों से बातचीत नहीं करने देते था।
सीओ नवीना शुक्ला के मुताबिक, उदयभान ने बताया कि चार माह पहले प्रियंका बीमार हो गई। भूसा मंडी निवासी तंत्र-मंत्र करने वाले मेहताब से झाड़ फूंक कराई लेकिन प्रियंका की आंखें बाहर निकलने लगीं और उसकी मौत हो गई। उसने शव को बेडरूम में कूड़ा डालकर उसके अंदर छिपा दिया। भतीजे विश्वजीत ने दोनों की तलाश की लेकिन पता नहीं चला।
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शुक्रवार को उदयभान को भतीजे सुनीरमल ने चाय की दुकान पर देखा। वहां से उसे घर लाया। प्रियंका के बारे में पूछताछ की तो बताया कि उसका शव घर में छोड़ दिया था। सूचना पर सीओ और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची।
'कैसे लेकर जाता शव'
उदयभान ने बताया कि बेटी की मौत के बाद कुछ समझ नहीं पाया और हरिद्वार चला गया था। दावा किया कि वहां पर आठ हजार में अंतिम संस्कार करना तय कर लिया लेकिन मेरठ से शव कैसे ले जाता। इसी के चलते हरिद्वार में ही रह गया।
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