मेरठ, जेएनएन।Oxygen Crisis News: ऑक्‍सीजन की किल्लत जानलेवा होती जा रही है। कभी संतोष अस्पताल, कभी जगदंबा अस्पताल तो कभी मेडिकल कालेज में मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच ऑक्‍सीजन का खत्म होना चुनौती बनी हुई है। चुनौतियां एक से बढ़कर एक आ रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन भी तत्परता बरतने में पीछे नहीं हट रहा। ऐसे में गुरुवार शाम को जब मेडिकल कालेज में मरीजों तक ऑक्‍सीजन की सप्लाई बाधित हुई तो पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रीन कारिडोर बनाकर ऑक्‍सीजन कैप्सूल मेडिकल कालेज तक पहुंचाया और 50 से अधिक मरीजों की जान बचाई जा सकी।

मेडिकल कालेज के ऑक्‍सीजन प्लांट में गैर भरने के लिए एक टैंकर पहुंचा था, लेकिन कुछ उपकरण में कमी हुई और मेडिकल कालेज के प्लांट से यह जुड़ नहीं पाया। इमरजेंसी में भर्ती 50 से अधिक मरीजों के लिए ऑक्‍सीजन आपूर्ति अति आवश्यक थी। ऐसे में मेडिकल कालेज प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। प्राचार्य डा. ज्ञानेंद्र और एडीएम सिटी अजय तिवारी ने मोर्चा संभाला। तत्काल मोदीनगर स्थित ऑक्‍सीजन प्रदाता कंपनी से संपर्क किया गया। पता चला कि एक कैप्सूल मेरठ के लिए भेजा जा रहा है।

कैप्सूल पहुंचने में कहीं देर न हो जाए, लिहाजा यह सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन के अधिकारी उक्त ऑक्‍सीजन टैंकर के लिए रास्ता आसान बनाने में जुट गए। एसीएम संदीप श्रीवास्तव और परतापुर के थानाप्रभारी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इन अफसरों ने ऑक्‍सीजन कैप्सूल के लिए ग्रीन कारिडोर बनाया और एस्कार्ट किया। परतापुर, जागरण चौराहा होते हुए बाईपास के रास्ते मेडिकल कालेज पहुंचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि आधा घंटा से भी कम समय में वाहन को मेडिकल पहुंचा दिया गया।

क्या होता है ग्रीन कारिडोर

बता दें कि ग्रीन कारिडोर मतलब है साफ रास्ता। पुलिस द्वारा वीआइपी, मंत्री, नेताओं को यह सुविधा दिलाई जाती है। इनके आने की सूचना पर पुलिस ग्रीन कारिडोर बनाकर काफिला पास कराती है। ठीक उसी प्रकार आक्सीजन प्लांट से लेकर मेडिकल कालेज तक आक्सीजन कैप्सूल को भी निकाला गया। 

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