मेरठ, जेएनएन। मेडिकल कालेज में शवों की अदला बदली जैसी बड़ी चूक एक बार फिर हुई है। कंट्रोल रूम की लापरवाही ने कोविड प्रबंधन पर एक बार फिर बड़ा दाग लगा दिया है। बरेली निवासी एक मरीज की कोविड वार्ड में 23 अप्रैल को मौत हो गई, जबकि उसके स्वजन को इसी नाम के दूसरे मरीज की तीन मई तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी जाती रही। स्वजन ने पहुंचकर पड़ताल की तो पता चला कि उनके मरीज का तो अज्ञात के रूप में अंतिम संस्कार तक कर दिया गया था। कंट्रोल रूम में फोन करने पर उन्हें लगातार दूसरे मरीज की रिपोर्ट दी जाती रही। मृतक की पुत्री का वीडियो वायरल होने पर प्रदेश सरकार ने रिपोर्ट तलब की है।

प्राचार्य डा. ज्ञानेंद्र सिंह ने ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और तीन डाक्टरों से जवाब मांगा है। कोविड वार्ड के प्रभारी डा. सुधीर राठी ने बताया कि बरेली निवासी संतोष 21 अप्रैल को गाजियाबाद से मेरठ आकर यहां भर्ती हुए थे। जल्दबाजी में उनका फोन नंबर एवं पता, संबंधित रिकार्ड पुस्तिका में नहीं चढ़ाया गया। कोविड वार्ड में इसी नाम के तीन-चार मरीज भर्ती थे। 23 अप्रैल की सुबह बरेली निवासी संतोष की मौत हो गई। मोर्चरी में शव तीन दिनों तक रखा गया। किसी परिजन के न आने पर अज्ञात के रूप में अंतिम संस्कार कर दिया गया। दूसरी ओर, मृतक की पुत्री कोविड वार्ड के कंट्रोल रूम में फोन पर अपने पिता के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी लेती रही लेकिन उसे तीन मई तक संतोष नामक दूसरे मरीज की स्वास्थ्य जानकारी दी जाती रही।

स्टाफ ने एक बार भी मरीज का डिटेल तक नहीं पूछा। दो दिन पहले इसी नाम के दूसरे मरीज की मौत की सूचना दी गई, जिस पर बरेली से परिवार मेरठ पहुंच गया। शुक्रवार को वार्ड में पहुंचकर स्वजन ने आक्रोश जताया। पहले उन्हें कोविड वार्ड का दृश्य दिखाकर अपना मरीज पहचानने के लिए कहा गया, फिर पुलिस की उपस्थिति में अज्ञात की श्रेणी में दर्ज किए गए चार शवों की फोटो दिखाकर शिनाख्त कराई गई। इसी दौरान लड़की ने अपने पिता की फोटो को पहचाना, इसके बाद पूरा मामला खुल गया। स्वजन ने मेडिकल प्रशासन के खिलाफ प्रशासन से शिकायत की है। साथ ही युवती ने वीडियो वायरल कर मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। दैनिक जागरण कई दिन से इस संबंध में जागरूक करने वाली खबरें प्रकाशित कर रहा है।

प्राचार्य ने कहा कि जांच कमेटी बनाकर ड्यूटी पर तैनात सिस्टर इंचार्ज और डाक्टरों की भूमिका की पड़ताल कराई जाएगी। यह बेहद गंभीर विषय है। दोषी स्टाफ निलंबन के लिए तैयार रहे। 

Edited By: Himanshu Dwivedi