नियमों के फेर में फंसा 'जन्म-मृत्यु का सबूत'! अफसरों के चक्कर काटने को मजबूर मेरठवासी
Meerut News: जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण के कड़े नियमों से मेरठ में लोग परेशान हैं। दो साल से अधिक की देरी वाले आवेदनों के लिए समस्या अधिक है।

नगर निगम के जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्यालय में प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी लेते आवेदक। जागरण
HighLights
4000 औसतन महीने में आते हैं जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन।।
1000 औसतन महीने में आते हैं मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन।।
जागरण संवाददाता, मेरठ। जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के इरादे से लागू किए गए कड़े नियम अब आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। जहां 21 दिनों के भीतर नगर निगम स्तर पर सरलता से प्रमाण पत्र बन जाता है, वहीं थोड़ी सी भी देरी लोगों को एक लंबी और जटिल प्रशासनिक कागजी कार्रवाई में उलझा रही है।
21 दिन से एक साल तक की देरी पर सीएमओ कार्यालय, एक से दो साल पर एसडीएम और दो साल से अधिक की देरी होने पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट से सत्यापन कराने का कड़ा नियम तय किया गया है। समस्या दो साल से अधिक देरी वाले आवेदनों को लेकर है। ऐसे आवेदक विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
60 फुटा रोड समर गार्डन के मोहम्मद आमिर ने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है कि चार जून 2023 को बेटे का जन्म हुआ था। आवेदन के साथ यह भी उल्लेख किया है कि जन्म की सूचना नगर निगम रिकार्ड में समय पर उपलब्ध नहीं करा सके थे। अब जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। इसी तरह पीएल शर्मा रोड निवासी रेनू ने बेटी और जाकिर कालोनी निवासी शाहनवाज ने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र के लिए नगर निगम में आवेदन किया है।
ये उदाहरण हैं। ऐसे लगभग 80 आवेदन लंबित हैं। दरअसल, पिछले महीने छह अगस्त के भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यदि किसी जन्म-मृत्यु की सूचना व पंजीकरण के लिए आवेदन दो साल के बाद रजिस्ट्रार को किया जाता है तो पंजीकरण उस क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जन्म-मृत्यु की सत्यता का सत्यापन करने के बाद लिखित आदेश पर ही पंजीकरण हो सकेगा। लेकिन नई व्यवस्था के तहत प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।
जिसके चलते ऐसे आवेदक परेशान हैं। उनके आवेदन नगर निगम में लिए जा रहे हैं। एसडीएम कार्यालय भेजे जा रहे हैं। लेकिन एसडीएम कार्यालय से छह अगस्त के बाद से दो साल से अधिक देरी वाले आवेदनों को सत्यापित नहीं किया जा रहा है। इससे लोग कभी नगर निगम तो कभी एसडीएम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
इन्होंने कहा
एसडीएम स्तर पर एक से दो साल तक की देरी के आवेदनों के सत्यापन को लेकर कोई समस्या नहीं है। वह मेरे स्तर से हो रहे हैं। छह अगस्त को गजट नोटिफिकेशन के बाद से दो साल से अधिक देरी वाले आवेदन लंबित हैं। इनके सत्यापन के लिए उच्च अधिकारियों से मार्ग दर्शन मांगा जाएगा।
-राहुल द्विवेदी, एसडीएम सदर।
दो साल से अधिक देरी वाले आवेदनों को नगर निगम में लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत प्रक्रिया शुरू होने तक एसडीएम कार्यालय में भेजे जा रहे हैं। जो नियमावली है, उसी के अनुसार प्रमाण पत्र बनेंगे। लोगों को असुविधा न हो इसके लिए उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया है।
-पंकज कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त।
