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मेरठ में बिजली बंबा बाईपास किनारे बनेगा नया नाला, इन कॉलोनियों की 25000 से अधिक आबादी को मिलेगा लाभ

Published: Sat, 19 Sep 2026 12:51 PM (IST)

मेरठ विकास प्राधिकरण ने बिजली बंबा बाईपास पर 20 साल पुरानी जलभराव की समस्या के समाधान के लिए एक नए नाले के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है।

बिजली बंबा बाइपास, सुपरटेक पामग्रीन की साइड से नया नाला बनाना है प्रस्तावित। जागरण।

बिजली बंबा बाइपास, सुपरटेक पामग्रीन की साइड से नया नाला बनाना है प्रस्तावित। जागरण।

HighLights

  1. बिजली बंबा बाईपास पर 20 साल पुरानी जलभराव समस्या का समाधान।

  2. मेरठ विकास प्राधिकरण ने नए नाले के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया।

  3. 25,000 से अधिक निवासियों को मिलेगा सीधा लाभ।

दिलीप पटेल, मेरठ। बिजली बंबा बाईपास के किनारे करीब 20 साल से नासूर बनी जलभराव और जलनिकासी की समस्या से क्षेत्रवासियों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जग गई है। मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) ने इस क्षेत्र में एक नया नाला बनाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।

करीब दो दशक कई कालोनियों के लोग इसकी मांग कर रहे हैं। इसके लिए जल्द ही जल्द मेडा और नगर निगम संयुक्त सर्वे शुरू करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के मूर्त रूप लेने से बिजली बंबा बाईपास रोड के किनारे बसी दर्जनों मल्टी स्टोरी कालोनियों की 25 हजार से अधिक आबादी को लाभ पहुंचेगा।

मेडा के अधिकारियों का दावा

खास बात यह है कि इस नाले का दायरा केवल कुछ कालोनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मेवला फ्लाईओवर से लेकर शाप्रिक्स माल तक दिल्ली रोड के किनारे बसे मुहल्लों की जलनिकासी का रास्ता भी निकलेगा। यह दावा मेडा के अधिकारियों ने किया है।

बिजली बंबा बाईपास किनारे सुपर टेक पामग्रीन, ग्रीन विलेज, पर्ल रेजीडेंसी, द ग्रैंड, ग्रहम कालोनी, भगवती कुंज सहित दर्जन भर कालोनियों की जलनिकासी के लिए नाले के निर्माण की मांग यहां के लोग लंबे समय से कर रहे हैं।

मेरठ विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी

दरअसल, जरा सी बरसात में मल्टी स्टोरी कालोनियों में जलभराव की समस्या खड़ी हो जाती है। बरसाती पानी रेलवे लाइन किनारे या फिर खाली प्लाटों में एकत्र होता है। कालोनियों के आंतरिक विकास सड़क, बिजली, जलनिकासी, सीवर निकासी, एसटीपी बनाने की जिम्मेदारी बिल्डर की है, लेकिन बाह्य विकास की जिम्मेदारी मेरठ विकास प्राधिकरण की है।

करीब 18 साल पहले सुपरटेक पामग्रीन, ग्रीन विलेज जैसी मल्टी स्टोरी कालोनी विकसित हुई थीं। उस वक्त 440 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से बाह्य विकास शुल्क वसूला गया था। वर्तमान में यह दर 1510 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। बाह्य विकास शुल्क इसलिए लिया जाता है कि जब सुविधाओं की मांग बढ़े तो कालोनियों के गेट के बाहर सड़क, जलनिकासी के लिए नाला-नाली और सीवर निकासी के लिए सीवर लाइन जैसी सुविधाएं इसी धनराशि से विकसित की जा सकें।

कालोनियों में पांच हजार से अधिक परिवार

शाप्रिक्स माल, मेजर ध्यानचंद नगर, पामग्रीन, पर्स रेजीडेंसी, द ग्रैंड, भगवती कुंज, ग्रहम कालोनी सहित बिजली बंबा बाईपास पुलिस चौकी तक कई कालोनियां विकसित हो चुकी हैं। कई नई कालोनी विकसित हो रही हैं। इस रोड पर हास्पिटल, होटल, स्कूल और कई पेट्रोल पंप भी हैं। वर्तमान में इन कालोनियों में पांच हजार से अधिक परिवार रहते हैं। दो-तीन साल में यह संख्या दोगुनी होनी है।

सुपरटेक ग्रीन विलेज सहित कई कालोनियों का पानी रेलवे लाइन किनारे गांधी पब्लिक स्कूल के पीछे खाली पड़ी जमीन में बहाया जा रहा है, जिससे यहां तालाब बन गया है। एक बड़े भूभाग में तालाब में जलकुंभी पनप रही है। भगवती कुंज, ग्रहम कालोनी की जलनिकासी भी खेतों में हो रही है। कालोनियों के अंदर तो नालियां हैं, लेकिन गेट के बाहर नाला न होने से समस्या बनी है।

बिजली बंबा बाईपास किनारे नए नाले का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। बाह्य विकास शुल्क से यह नाला बनाया जाएगा। इसके बनने से दिल्ली रोड पर जलभराव की समस्या का निदान भी संभव होगा।

-संजय कुमार मीना, उपाध्यक्ष, मेरठ विकास प्राधिकरण।

यहां से गुजरेगा नया नाला

नए नाले का निर्माण शाप्रिक्स माल के पास से शुरू होगा। फिर बिजली बंबा बाईपास किनारे सुपरटेक पामग्रीन, पर्ल रेजीडेंसी होते हुए सुपरटेक ग्रीन विलेज, ग्रहम कालोनी से बिजली बंबा बाइपास पुलिस चौकी तक बनाया जाएगा। यह लंबाई करीब 7.50 किमी है। इसके आगे लोहिया नगर रोड होते हुए एसटीपी के पास से ओडियन नाले में जाकर गिरेगा।