देश का चुनिंदा 25वां शहर बना मेरठ, जहां उपलब्ध है मेट्रो सेवा
मेरठ देश का 25वां शहर बन गया है जहां मेट्रो सेवा उपलब्ध होगी। यह सिर्फ परिवहन नहीं, बल्कि शहर के ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मेरठ। मेट्रो रेल की कहानी सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि तकनीक, सुविधा व शहर के बदलते चेहरे की कहानी को बयां करती है। मेट्रो का यह सफर देश में 1984 में कोलकाता से शुरू हुआ था। अब देश के 25 शहरों तक पहुंच चुका है।
रविवार को मेट्रो के उद्घाटन का नहीं, ब्लकि आत्ममंथन का दिन भी है, जनपद को भी मेट्रो की जरूरत है। यहां हर साल 67 हजार नए वाहन सड़क पर आ रहे हैं। निजी वाहनों की संख्या 12 लाख और व्यावसायिक वाहनों की संख्या 83 हजार तक पहुंच चुकी है, जबकि सड़कें उतनी ही हैं, ट्रैफिक कई गुना हो चुका है। वहीं, जमीनी हकीकत यह है कि परतापुर से बेगमपुल तक पहुंचने के लिए इतना समय लगता है, जितना समय परतापुर से दिल्ली पहुंचने में लगता है। अफसर मान रहे है कि मेट्रो के संचालन से दिल्ली रोड के यातायात को राहत मिलेगी।
कोलकाता से 1984 में अंडरग्राउंड मेट्रो की शुरूआत की गईं थी। उसके बाद 2002 में दिल्ली में मेट्रो आ गई थी। इसके नौ साल बाद 2011 में बेंगलुरु भी मेट्रो वाला शहर बन गया था। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी मेट्रो की शुरूआत 2014 में हुई। 2015 में जयपुर और चैन्नई और 2017 में लखनऊ, हैदराबाद और कोच्चि, 2019 में नागपुर, गुजरात के अहमदाबाद-गांधीनगर, 2021 में कानपुर, 2022 में पुणे, 2024 में आगरा, 2025 में इंदौर, पटना और भोपाल में मेट्रो की शुरूआत हुई।
प्रदेश के लखनऊ, कानपुर और आगरा, दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद, गुरुग्राम, नोएडा, राजस्थान के जयपुर में भी मेट्रो की शुरू हो चुकी है। 2026 में मेट्रो जनपद में चलने जा रही है। यहां मेट्रो के संचालन से दिल्ली रोड के यातायात में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जगी है। मेरठ साउथ स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ को देखकर लग रहा है कि सभी 12 स्टेशनों पर भी ऐसी ही भीड़ दिखाई देगी। ऐसे में दिल्ली रोड के यातायात को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
एसएसपी अविनाश पांडेय ने बताया कि मेट्रो से यातायात में बदलाव आने से शहर का चेहरा बदलेगा। आगरा, लखनऊ और कानपुर में मेट्रो चलने से यातायात में काफी बदलाव हुआ है। जनपद में भी वह बदलाव देखने को मिलेगा। आटो और ई-रिक्शा अब दिल्ली रोड के बजाय मोहल्ले की गलियों तक सिमट जाएगी। यानि मेट्रो से उतरने वाली सवारियों को मोहल्ले में घर तक पहुंचाने का काम रह जाएगा।
