जेन-जी की पसंद में ढल रही खादी, खूब खरीद रहे कुर्ते... पेंट-शर्ट और वास्केट
मेरठ में दस दिवसीय खादी महोत्सव और प्रदर्शनी में जेन-जी के लिए खादी के आधुनिक परिधान खूब पसंद किए जा ...और पढ़ें

पीएम श्री राजकीय इंटर कालेज के मैदान में आयोजित खादी महोत्सव और प्रदर्शनी में जैविक उत्पाद की बिक्री करतीं स्टाल संचालक इति सिक्का व परिधान दिखाते शोएब। जागरण
HighLights
जेन-जी के लिए खादी के आधुनिक कुर्ते, पेंट-शर्ट उपलब्ध।
विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद भी प्रदर्शित।
खादी अब फैशन बन रही है, युवा भी पसंद कर रहे है।
जागरण संवाददाता, मेरठ। खादी और ग्रामोद्योग विभाग का दस दिवसीय खादी महोत्सव और प्रदर्शनी एक ही स्थान पर लोगों को स्वदेशी, खादी और हस्तशिल्प के सभी उत्पाद उपलब्ध करा रही है। खादी ने जेन जी के लिए खुद को बदल लिया है।उनके पसंदीदा खादी के कुर्ते, पेंट-शर्ट और वास्केट (जैकेट) के यहां कई स्टाल लगे हैं और बिक्री भी हो रही है।प्रदर्शनी में उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों और जनपदों के महिला पुरूषों के प्रसिद्ध परिधान,घर सजाने की सामग्री, पाटरी, मिट्टी के बर्तन और जैविक उत्पाद भी उपलब्ध हैं।
पीएम श्री राजकीय इंटर कालेज के मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में मेरठ की ही एसएच एसेंशियल कंपनी का स्टाल लगा है। जिस पर जेन जी के पसंदीदा खादी और सूती के पुरूषों के लिए शर्ट, पेंट, कुर्ता, वास्केट (जैकेट) समेत तमाम तरह के परिधान उपलब्ध हैं। कंपनी के फाउंडर हापुड़ रोड निवासी शोएब मेकेनिकल से बीटेक है लेकिन अपनी पहचान बनाने के जुनून में उन्होंने विदेश से सस्टेनेबल टेक्सटाइल में 18 महीने का डिप्लोमा किया। इसके बाद उन्होंने नई पीढ़ी की पसंद के मुताबिक खुद डिजायन तैयार किए, पंजीकृत खादी इकाईयों से कच्चा माल खरीदा और ग्रामीण महिलाओं से उन्हें तैयार कराया।
महिला हथकरघा एवं हस्तशिल्प बुनकर समिति पौड़ी (उत्तराखंड) ने महिलाओं के लिए खादी के गर्म शाल, स्टाल, जैकेट (वास्केट) आदि का स्टाल लगाया है। संचालक राहुल ने बताया कि भेड के बाल के धागे से तैयार गर्म पंखी (चादर) खूब पसंद की जा रही है। कंकरखे़ड़ा की जैविक उत्पादक कंपनी गुरुजी बिजनेस के स्टाल पर गाय के गोबर से बनी धूप और धूना भी लोगों को भा रहा है।संचालक इति सिक्का और शगुन पाहुजा ने बताया कि जैविक साबुन, रूम फ्रेशनर आदि उत्पाद तैयार कर रहे हैं।
प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान समेत आठ राज्यों की खादी एवं ग्रामोद्योग इकाइयों द्वारा तैयार खादी, सिल्क व अन्य परिधान उपलब्ध हैं। इनमें हैंडलूम के कपड़े, ऊनी व सूती परिधान, बनारसी सिल्क की साड़ियां, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और मिट्टी के कलात्मक उत्पाद के स्टाल लगे हैं। अचार, मुरब्बे, पापड़, मसाले, नमकीन, शहद और प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद भी उपलब्ध हैं।
परिक्षेत्रीय खादी ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी का कहना है कि अब खादी फैशन बन गया है। उच्च वर्ग के लोग खादी को पसंद कर रहे हैं युवा भी खादी में अपनी पसंद तलाश रहा है। जो उसे धीरे धीरे मिल रही है।
