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मेरठ एसएसपी कार्यालय में मारपीट का मामला, इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ निलंबित, जांच जारी

Published: Mon, 24 Aug 2026 06:18 PM (IST)

एसएसपी और एसओजी कार्यालय में मारपीट के मामले में इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई ...और पढ़ें

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HighLights

  1. इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को मारपीट मामले में निलंबित किया गया।

  2. डीआईजी सहारनपुर की जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई।

  3. कर्तव्यों में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता का आरोप।

जागरण संवाददाता, मेरठ। एसएसपी और एसओजी कार्यालय में मारपीट के मामले में रविवार को एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने इंस्पेक्टर सिविल लाइंस व एसओजी प्रभारी अखिलेश गौड को निलंबित कर दिया गया। पुलिस कार्यालय से जारी प्रेस नोट व एसपी सिटी विनायक भोसले के जारी बयान में उन्हें कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही एवं उदासीनता तथा स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोपित बताया गया है।

माना जा रहा है कि यह कार्रवाई डीआइजी सहारनपुर अभिषेक सिंह की जांच के आधार पर लिया गया है। विधायक अतुल प्रधान, दिग्विजय भाटी व मोहित जाटव ने शनिवार को एडीजी भानु भास्कर व एसएसपी से मिलकर एसएसपी अविनाश पांडेय, इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ व मारपीट में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने, उन्हें निलंबित करने व जोन से बाहर स्थानांतरण करने की मांग की थी, ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सकें।

डीआइजी सहारनपुर शनिवार रात मामले की जांच व दोनों पक्षों के बयान लेकर सहारनपुर वापस चले गए है। भारतीय किसान यूनियन (बीआर आंबेडकर) के अध्यक्ष अमरोहा के चमरौआ निवासी डा. दिग्विजय भाटी व जिलाध्यक्ष मोहित जाटव ने आरोप लगाया था कि उनके साथ एसएसपी और एसओजी कार्यालय में जमकर पिटाई की गई। एसओजी आफिस में उन्हें थर्ड डिग्री दी गई और फिल्मी गानों पर डांस कराया गया।

दिग्विजय को जुलाई के अंत में अमरोहा पुलिस ने उन्हें छह माह के लिए जिला बदर घोषित किया था, जबकि मोहित जाटव पर भावनपुर थाने से गैंग्सटर का मुकदमा दर्ज है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वह 19 अगस्त को मुकदमे में पैरवी को एसएसपी से उनके कार्यालय में मिलने गए थे। वहां पहले से सीओ सौम्या अस्थाना मौजूद थी।

फोन पर जानकारी देने पर एसएसपी अविनाश पांडेय वापस आफिस आए। जनपद में तांडव मचाने और नेता बनकर घूमने का आरोप लगाते हुए कार्यालय के एक कक्ष में ले जाकर उनकी जूतों और बेल्टों से पिटाई की गई। इंस्पेक्टर अखिलेश उन्हें एसओजी कार्यालय ले गए थे।

सपा विधायक अतुल प्रधान किसी तरह उसी दिन दोनों को छुड़वाकर लाए थे। अगले दिन उन्होंने वीडियो प्रसारित कर दिग्विजय व मोहित जाटव ने वीडियो बनाकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की थी। एडीजी भानु भास्कर ने मामले की जांच डीआइजी अभिषेक सिंह को सौंपी थी।

दो दिन तक डीआइजी ने पीड़ित दिग्विजय, मोहित जाटव, एसएसपी अविनाश पांडेय, सिविल लाइंस व एसओजी में तैनात पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए थे। एसएसपी व एसओजी आफिस की भी जांच की।

शनिवार को अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया था। आरोपितों के जांच को प्रभावित करने के आरोपों के बाद पुलिस सांसत में थी।

माना जा रहा है कि डीआइजी सहारनपुर ने एडीजी को अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपी। इसके बाद ही इंस्पेक्टर सिविल लाइंस को निलंबित किया गया है। हालांकि, रिपोर्ट मिलने की किसी भी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की।

इंस्पेक्टर सिविल लाइंस के निलंबन आदेश के बाद पुलिस महकमे में सनसनी फैल गई है। चर्चा है, डीआइजी की जांच रिपोर्ट के बाद कई और पुलिस कर्मियों पर निलंबन की गाज गिर सकती है। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज होने की भी संभावना बढ़ गई है।