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देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर मेरठ, आने वाले दिनों में और बिगड़ेगी वायु गुणवत्ता

By Om Bajpai Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 23 Oct 2026 12:36 PM (GMT+05:30)

मेरठ देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहाँ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 22वीं रैंक के बावजूद प्रदूषण ...और पढ़ें

मेरठ के टीपीनगर में उड़ रही धूल। जागरण

मेरठ के टीपीनगर में उड़ रही धूल। जागरण

HighLights

  1. मेरठ देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर घोषित।

  2. प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में कमी, स्थिति गंभीर।

  3. धूल, कूड़ा, वाहन धुआं प्रदूषण के मुख्य कारण।

जागरण संवाददाता, मेरठ। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सितंबर में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के परिणाम घोषित किए थे। 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी के 48 शहरों में मेरठ को 22वीं रैंक मिली थी। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में तेजी नहीं दिख रही है। सड़क निर्माण की धूल, कूड़े की गंदगी, वाहनों का धुआं, उद्योगों को स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट न कर पाना, ईवी चार्जिंग स्टेशन न होना और इलेक्ट्रिक वाहनों की कम संख्या प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं।

नगर निगम, यूपीसीडा, परिवहन विभाग और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अपने निर्धारित कार्य पूरे करने हैं, लेकिन रैंकिंग सामने आने के बाद भी सुधार के प्रयास नदारद हैं। सीएम ग्रिड योजना के तहत आठ प्रमुख मार्गों का चौड़ीकरण चल रहा है। सर्किट हाउस रोड, वेस्टर्न कचहरी रोड, ट्रांसपोर्ट नगर और शारदा रोड पर धूल उड़ रही है। नियमित रूप से वाटर स्प्रिंकलर या टैंकर से पानी का छिड़काव हो तो धूल नियंत्रित हो सकती है, लेकिन यह काम लगातार नहीं हो रहा।

म-10 की स्थिति सुधरने के बजाय गंभीर हुई है। इसके प्रमुख स्रोतों में गड्ढों और निर्माण कार्यों की धूल तथा औद्योगिक कारखानों से निकलने वाला धुआं व कचरा शामिल हैं। सड़कों पर कूड़े के ढेर अब भी हैं। पिछले सात दिनों में शताब्दीनगर और नूरनगर में कूड़ा जलाने के मामले सामने आए हैं। जैननगर और टीपीनगर रोड पर भी ऐसी स्थिति देखी जा सकती है। रेत, मिट्टी और गिट्टी सड़क पर खुले में रखी जा रही है।

स्वच्छ वायु मानकों के तहत 80 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों को स्वच्छ ईंधन पर शिफ्ट करने का लक्ष्य था, लेकिन 27.5 प्रतिशत इकाइयों ने ही सीएनजी-पीएनजी अपनाई। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 20 स्थानों पर ईवी चार्जिंग स्टेशन बनने हैं; फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी है। आबादी के अनुपात में ई-व्हीकल केवल 4.50 प्रतिशत हैं। प्रतिबंधित पुराने डीजल वाहनों के उपयोग पर भी सख्ती नहीं है, जिससे वाहन उत्सर्जन घटाने में सफलता नहीं मिली।

ये हैं ग्रैप की स्टेज वन के प्राविधान
- निर्माण और ध्वस्तीकरण के कार्य ढक कर किए जाएं। सड़क पर धूल न उड़े इसके प्रबंध किए जाएं। एंटी स्माग गन और वाटर स्प्रिंकलर के द्वारा इसे रोका जाए। निर्माण सामग्री और मलबा ढ़क कर एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जाए।
- एनजीटी के आदेश के अनुसार जिन वाहनों के संचालन की अवधि समाप्त हो गई है उनका संचालन रोका जाए।
- नियमित बिजली आपूर्ति के रूप में डीजल जनरेटरो का प्रयोग न किया जाए।
- ई बस, सीएनजी, बीएस - 6 को छोड़ कर एनसीआर के शहरों में दूसरे शहरों से आने वाली बसों का प्रवेश का रोका जाए।

- उद्योग, व्यापार और घरेलु उपयोग के लिए नियमानुसार निर्धारित डीजी सेटो का प्रयोग किया जाए।
- 500 वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड पर निर्माण और ध्वस्तीकरण की अनुमति न दी जाए जब तक उसे पोर्टल पर रजिस्टर्ड न किया जाए।
- नगर निगम द्वारा कूड़ा और सोलिड वेस्ट को और औद्योगिक कचरे का नियमित उठान सुनिश्चित किया जाए। इन्हें खुले इलाके में फेंका जाए।
- सड़कों की मशीनों द्वारा सफाई की जाए।

- बायो मास, कूड़ा न जले इस पर सख्ती से पालन किया जाए। लैंडफिल साइट पर कूड़ा न जले इसके प्रबंध किए जाएं।
- ट्रैफिक का सुचारु संचालन हो। जाम न लगे इसका प्रबंध किया जाए।
- प्रदूषण फैलाने वाहनों भारी जुर्माना लगाया जाए।

- आफिसों में कर्मियों को एक ही वाहन पर आने के लिए प्रेरित किया जाए।
- होटलों रेस्टोरेंट में लकड़ी, कोयले के तंदूर के प्रयोग को प्रतिबंधित किया जाएग। केवल गैस और इलेक्ट्रिक का इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जाए। - सीएनजी, इलेक्ट्रिक बस और मैट्रो और आरआरटीएस की फ्रीक्वेंशी बढ़ाई जाए ताकि लोग वाहनों का कम प्रयोग करें।

शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक
पंच गांव - 378
हापुड़, बड़ौत - 328
बागपत - 282
मेरठ - 281