मिशन शक्तिसैट के फाइनल में पहुंचीं UP की दो बेटियां, ISRO व स्पेस किड्ज इंडिया की इस पहल में 108 देशों की भागीदारी
Mission ShaktiSat: मेरठ की लावण्या राणा और रिया पंवार 'मिशन शक्तिसैट' के राष्ट्रीय फाइनल में चुनी गई हैं। उत्तर प्रदेश से चयनित केवल यही छात्राएं हैं।

लावण्या राणा और रिया पंवार। सौ. स्कूल
HighLights
आर्मी पब्लिक स्कूल मेरठ कैंट की छात्राएं हैं लावण्या राणा और रिया पंवार।
कार्यशाला के लिए उत्तर प्रदेश से केवल इन्हीं दो छात्राओं का हुआ है चयन।
जागरण संवाददाता, मेरठ। अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में मेरठ की दो छात्राओं ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर जिले के साथ पूरे उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। आर्मी पब्लिक स्कूल (APS) मेरठ कैंट की कक्षा 11 की छात्राएं लावण्या राणा और रिया पंवार प्रतिष्ठित 'मिशन शक्तिसैट' के लिए राष्ट्रीय फाइनलिस्ट चुनी गई हैं। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश से इस महत्वाकांक्षी अंतरराष्ट्रीय पहल के लिए केवल इन्हीं दो छात्राओं का चयन हुआ है।

मिशन शक्तिसैट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और स्पेस किड्ज इंडिया की संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य दुनिया भर की बालिकाओं को अंतरिक्ष विज्ञान, उपग्रह प्रौद्योगिकी और स्टेम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित) के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना और उन्हें वैश्विक स्तर पर अवसर उपलब्ध कराना है। इस अभियान के माध्यम से 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
विद्यालय की प्राचार्या डा. रीता गुप्ता के मार्गदर्शन और शिक्षिका कविता शर्मा के निर्देशन में दोनों छात्राओं ने मिशन की बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की। इस प्रक्रिया में तकनीकी शिक्षण माड्यूल, विभिन्न मूल्यांकन और विशेषज्ञों द्वारा लिए गए साक्षात्कार शामिल थे। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर दोनों ने राष्ट्रीय फाइनल में अपनी जगह बनाई।
अब लावण्या और रिया नोएडा में आयोजित होने वाली आठ दिवसीय ग्लोबल स्पेस एंड स्टेम कार्यशाला में भाग लेंगी। इस कार्यशाला में 108 देशों के 300 से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। यहां प्रतिभागियों को उपग्रह तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग और नेतृत्व विकास से जुड़े विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा।
मिशन शक्तिसैट केवल एक उपग्रह परियोजना नहीं, बल्कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का वैश्विक अभियान है। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करना, नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना और अंतरिक्ष विज्ञान में उनकी भागीदारी बढ़ाकर भविष्य की महिला वैज्ञानिकों एवं अंतरिक्ष विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
वर्तमान में अंतरिक्ष में जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में महिलाओं की भागीदारी लगभग 11 प्रतिशत है। इसी असमानता को कम करने और बेटियों को समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह मिशन संचालित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में 108 देशों की भागीदारी भी विशेष महत्व रखती है। अंतरिक्ष विज्ञान में 108 संख्या का वैज्ञानिक महत्व माना जाता है। पृथ्वी से सूर्य और चंद्रमा की दूरी उनके व्यास की लगभग 108 गुना होने के कारण दोनों का आकाश में आकार लगभग समान दिखाई देता है। इसी वैज्ञानिक अवधारणा को वैश्विक सहयोग और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक के रूप में इस मिशन से जोड़ा गया है
इस उपलब्धि पर विद्यालय की प्राचार्या डा. रीता गुप्ता ने दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यह उनकी मेहनत, अनुशासन, जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों छात्राएं राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय और उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाने के साथ अन्य छात्राओं के लिए भी प्रेरणा बनेंगी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
