मेरठ। सब कुछ ठीक रहा तो मेरठ में 11 और 12 अगस्त को होने जा रही भाजपा कार्यसमिति की बैठक में मेरठवासियों को कई तोहफे मिल सकते हैं। इसकी शुरुआत हो चुकी है। शुक्रवार को दैनिक जागरण कार्यालय में अर्थव्यवस्था के सुदृढीकरण के मकसद से बुलाई गई राउंड टेबल कांफ्रेंस में उद्यमियों और अर्थशास्त्रियों ने मेरठ की एयर कनेक्टिविटी की बात उठाई और अब तक मेरठ को वंचित रखने पर नाराजगी जताई तो बैठक में ही मौजूद भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने उसी समय मुख्यमंत्री के सचिव मृत्युंजय सिंह को फोन लगाया और इस प्रकरण में मुख्यमंत्री से बात करने के लिए समय लिया। मेरठ से हवाई उड़ान और स्पो‌र्ट्स कालेज की मांग नोट कराई। इसके बाद उन्होंने पत्र के माध्यम से विस्तृत रूप से इन मांगों को मुख्यमंत्री को भेजा भी है। इतना ही नहीं कार्यसमिति की तैयारियों के मद्देनजर बैठक लेने पहुंचे प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल से भी डा. वाजपेयी ने दोनों मांगों को पूरा कराने की अपील की। उड़ान का वादा किया था..इस बार निभा दीजिए सीएम साहब

मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में डा. लक्ष्मीकात ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा कि नगर निगम चुनाव के समय जनसभा में आपने मेरठ से हवाई उड़ान की घोषणा की थी। महायोजना 2021 में वर्तमान हवाई पट्टी से लगी हुई 400 एकड़ जमीन आरक्षित है। 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी पंकज यादव की अगुवाई में 5800 रुपये का रेट भी तय कर दिया था और किसान भी तीन वर्ष पहले से तय दर से भुगतान लेने के लिए तैयार हैं। इसके बाद भी हवाई उड़ान के लिए एक कदम आगे नहीं बढ़ा गया है। कृषि विभाग की जमीन है, वहीं दे दीजिए 60 एकड़ जमीन

उन्होंने दूसरी मांग में वर्षो से अटके पड़ा स्पोटर््स कॉलेज खोलने के लिए लिखा। जब खेल मंत्री राजा भैया थे तब भी उन्होंने जोर-शोर से यह मांग उठाई थी। तब यूपी खेल अभिकरण की बैठक में स्पोटर््स कॉलेज स्वीकृत हो गया था। इसके बाद भी अभी जमीन नहीं मिल सकी है। उन्होंने इसकी कवायद फिर से शुरू की तो एसडीएम की रिपोर्ट आयी। इसमें जमीन की अनुपलब्धता बाधक है। इस समस्या का समाधान भी है। दिल्ली रोड पर नवीन मंडी के विपरीत कृषि विभाग की काफी भूमि है। कुछ कार्यालय हैं, जबकि अधिकांश हिस्सा खाली है। यहीं पर अगर 60 एकड़ भूमि दे दी जाए और मेरठ में स्पो‌र्ट्स कालेज की सैद्धांतिक मंजूरी मिल जाए तो शुरुआती समय में कैलाश प्रकाश स्पो‌र्ट्स स्टेडियम में भी कक्षाएं लग सकती हैं। बच्चों के रहने की भी वहां पर्याप्त व्यवस्था है। जब कालेज परिसर का निर्माण हो तो कालेज अपने मूल स्थान पर लाया जाए। मेडिकल कॉलेज में बढ़े सुविधाएं

पत्र में तीसरी मांग के बारे में उन्होंने मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं को बढ़ाने का जिक्र किया है। जिससे दिल्ली एम्स में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रोगियों का दबाव कम हो सके। उन्होंने मेडिकल कॉलेज में बन रहे सुपर स्पेशियलिटी केंद्र का जिक्र करते हुए लिखा है कि इसका दायरा और बढ़ाना होगा। मेरठ को मिल पाएगी उम्मीदों की उड़ान

मेरठ। मेरठ में एयरपोर्ट को लेकर जनप्रतिनिधि एक बार फिर परीक्षा के मुहाने पर हैं। इसी महीने प्रस्तावित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत लोगों को बड़े तोहफे की उम्मीद है। कारण है यहां उड़ान की सभी बुनियादी प्रक्रियाएं पूर्ण हो चुकी हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की प्रदेश और केंद्र सरकार पर मजबूत पकड़ इस राह को आसान कर सकती है। देखना यह है कि राजनीतिक मंथन में मेरठ को अपना हक मिलेगा या फिर छला जाएगा।

मेरठ में एयरपोर्ट बनाने को लेकर डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी से लेकर तमाम जनप्रतिनिधि अपनी उर्जा झोंक चुके हैं। अब यह उम्मीद परवान चढ़ती भी नजर आ रही है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) केरल की किटको कंपनी से डीपीआर बनवाकर 19 सीटर विमान उड़ाने की योजना भी मुख्यालय को प्रेषित कर चुकी है।

इसी मार्च माह में एएआइ मुख्यालय को मेरठ से उड़ान की संभावनाओं की रिपोर्ट प्रेषित की गई है। इसमें कहा गया है कि मौजूदा संसाधन और उपलब्ध रन-वे स्ट्रिप पर 19 सीटर डॉरनियर-228 विमान आसानी से उड़-उतर सकता है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम योजना 'उड़ान' के लिए भी यह छोटा विमान बेहद मुफीद है। पर्यावरण के मानकों पर भी यह एयरक्राफ्ट खरा उतरता है। उड़ान नहीं तो बात बिगड़ सकती है

उड़ान-2 योजना में भी मेरठ का नाम न आने से भाजपा के जनप्रतिनिधि लगातार निशाने पर थे और इसे लेकर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा है। मेरठ से उड़ान शुरू नहीं हो पाने से लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। प्रदेश सरकार मेरठ से उड़ान की बात लगातार दोहरा रही है। प्रदेश सरकार की पहल पर ही प्राथमिकता सूची से अब तक गायब चल रहे मेरठ को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई है। ..और भी बहुत कुछ है एएआइ की रिपोर्ट में

एएआइ सूत्रों के अनुसार मुख्यालय को भेजी गई रिपोर्ट में तकनीकी पक्ष के साथ ही एयरपोर्ट के लिए जरूरी मूल संसाधनों की जानकारी भी भेजी गई है। उड़ान के लिए इस हवाई पट्टी की उपयोगिता भी बताई गई है। मेरठ के जनप्रतिनिधियों के पास साख सुधारने का यह शानदान मौका है। एयरपोर्ट नहीं बनवा पाने का दाग तो उनके दामन पर ही है। एटीसी, फायर स्टेशन और टर्मिनल बिल्डिंग चाहिए

डॉरनियर-228 उड़ाने के लिए भले ही जमीन और एयरस्ट्रिप पर्याप्त हो, लेकिन कॉमर्शियल फ्लाइट शुरू करने से पहले यहां भी एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) टावर स्थापित करना होगा। फायर स्टेशन और टर्मिनल इमारत का निर्माण जरुरी है। यह प्रस्ताव भी आ चुका है कि मेरठ में फिलहाल 100-150 यात्रियों की क्षमता वाली फैब्रिकेटेड टर्मिनल बिल्डिंग ही बनाया जाए। जरूरत और संभावना देखते हुए इसे आधुनिक किया जाए। एक नजर डॉरनियर-228 पर

निर्माता: ¨हदुस्तान एयरनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल)

19 यात्रियों की है क्षमता

16.56 मीटर लंबा है एयरक्राफ्ट

4.86 मीटर ऊंचा है विमान

428 किमी प्रतिघंटा है रफ्तार

213 किलो ईधन की खपत प्रतिघंटा मेरठ की एयरस्ट्रिप

लंबाई : 1500 मीटर

चौड़ाई : 23 मीटर

कुल क्षेत्रफल : 47 एकड़

Posted By: Jagran

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