'बेंच नहीं तो वोट नहीं'... नारे के साथ मेरठ से अधिवक्ताओं की न्याय यात्रा शुरू, 22 जिलों में 50 दिन चलेगा आंदोलन
पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर मेरठ से 'न्याय यात्रा' शुरू हुई है। ...और पढ़ें

न्याय यात्रा के दौरान बेगम पुल पर नारेबाजी करते अधिवक्ता।
HighLights
कचहरी के मुख्य द्वार और बेगम पुल चौराहे पर किया प्रदर्शन।
रथ के साथ 6 अन्य वाहनों से दिनभर पूरे शहर में करेंगे प्रचार।।
जागरण संवाददाता, मेरठ। पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर हाई कोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति ने बुधवार को मेरठ से न्याय यात्रा शुरू की। यात्रा 'हाई कोर्ट बेंच नहीं तो वोट नहीं' के नारे के साथ शुरू की गई। यह यात्रा पश्चिम उत्तर प्रदेश के सभी 22 जनपदों में 50 दिन तक चलेगी। इसके बाद 2 दिसंबर को जंतर मंतर तक पदयात्रा करके वहां धरना और प्रदर्शन किया जाएगा।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर पिछले 50 साल से ज्यादा समय से धरना प्रदर्शन और आंदोलन किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री से हुई वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने बेंच को प्रदेश सरकार के कार्यक्षेत्र से बाहर बताते हुए इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रयास करने का सुझाव केंद्रीय संघर्ष समिति के पदाधिकारी को दिया था। जिससे अधिवक्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई है।
बेंच आंदोलन को गति देने के लिए केंद्रीय संघर्ष समिति ने सभी 22 जनपदों में न्याय यात्रा निकालकर बेंच की मांग करने का फैसला लिया था। उसी के तहत बुधवार को कचहरी के प्याऊ चौराहे पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता न्याय रथ के साथ एकत्र हुए । यहां नारियल फोड़कर फीता काट कर तथा कचहरी के मुख्य द्वार पर हरी झंडी दिखाकर न्याय यात्रा का शुभारंभ किया गया।
कचहरी के मुख्य द्वार पर अधिवक्ताओं ने बेंच की मांग के लिए जमकर प्रदर्शन किया। यहां से नारेबाजी और 'बेंच नहीं तो वोट नहीं' का नारा लगाते हुए न्याय यात्रा आरंभ हुई। यात्रा कचहरी पुल और पीएल शर्मा रोड से होती हुई बेगमपुल पहुंची। यहां पर अधिवक्ताओं ने ट्रैफिक जाम करके प्रदर्शन किया और बेंच की मांग की। पीएल शर्मा रोड पर अधिवक्ताओं ने व्यापारियों से भी बेंच आंदोलन में समर्थन की मांग की।
बेगम पुल पर धरना प्रदर्शन के बाद यात्रा में शामिल 6 ई रिक्शा को शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जागरूकता और प्रचार प्रसार के लिए भेजा गया । न्याय रथ पर केंद्रीय संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनुज शर्मा और संयोजक परवेज आलम के साथ तमाम वरिष्ठ अधिवक्ता सवार होकर पूरे शहर में घूमे और बेंच की मांग की।
इस दौरान संजय सिंगर समिति के पदाधिकारियों नहीं जनता से अपील की तथा आरोप लगाया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लद्दाख में मात्र 90 हजार की जनता के लिए हाई कोर्ट बेंच दी, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करोड़ों लोग न्याय के लिए तरस रहे है।
