जागरण संवाददाता, मेरठ। शहर के लिए शहर के लोगों द्वारा कार्य का लक्ष्य तय करके उसे अंजाम तक पहुंचाने के संकल्प का महा अभियान 'माय सिटी माय प्राइड' बुधवार को अपने 11 लक्ष्य तय करेगा। कार्यक्रम होटल कंट्री इन में होगा। मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री डा. सत्यपाल सिंह और विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह मौजूद रहेंगे।

लगभग ढाई महीने से अनवरत चल रहे इस अभियान का बुधवार को पड़ाव है। इस पड़ाव से ही अब तय किए गए लक्ष्यों को धरातल पर लाने का बिगुल बजेगा। शहर को योजनाओं के भरोसे छोडऩे के बजाय निजी स्तर पर योगदान करके नया स्वरूप देने के विचारों पर मंथन होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में खास मुकाम रखने वाली शख्सियतें, जनप्रतिनिधि और अधिकारी तय किए लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग का वादा करेंगे।

'दैनिक जागरण' ने दो जुलाई को 'माय सिटी माय प्राइड' के नाम से महा अभियान शुरू किया था। इसमें आधारभूत ढांचागत सुविधाएं, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा को खास बिंदु बनाया गया। इन क्षेत्रों में काम करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं के कामकाज को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। यानी ऐसे कार्य जिन पर गर्व किया जा सके। ये ऐसे लोग थे जिन्होंने अपने स्तर से शहर को कुछ देने की मुहिम छेड़ी और उस मकसद को लगातार आगे बढ़ाने को तत्पर हैं, इन लोगों को 'रियल हीरो' के रूप प्रस्तुत किया गया। इन क्षेत्रों में कुछ ऐसे लोग भी चिह्नित किए गए जिनका अनुभव किसी न किसी रूप में शहर के काम आता रहा है। उनके पास गहन जानकारी है और तथ्यात्मक रूप से उसे विभिन्न मंचों और अलग-अलग माध्यमों के जरिए शहर के लिए प्रस्तुत करते रहे हैं। ऐसे लोगों को 'एक्सपर्ट' के रूप में महा अभियान का अंग बनाकर प्रकाशित किया गया।

 

माय सिटी माय प्राइड इतने तक की सीमित नहीं रहा। इन रियल हीरो और एक्सपर्ट के साथ ही इन क्षेत्रों के प्रमुख लोगों को अब नए लक्ष्य भी सौंपने थे जो शहर के लिए गर्व बन सके। नए लक्ष्यों को तय करने के लिए प्रत्येक बिंदु के अंतर्गत अलग-अलग दिनों में 'राउंड टेबल कांफ्रेंस (आरटीसी) की गई। इसमें जो लक्ष्य तय किए गए उसे भी तीन वर्गों में बांटा गया।

पहला वर्ग जनसहभागिता यानी ऐसे लक्ष्य जिसे आम व्यक्तियों व संस्थाओं के सहयोग से किया जाना हो और उस पर अधिक धन खर्च के बजाय निजी भागीदारी, शारीरिक श्रम और विचार महत्वपूर्ण हों।
दूसरा वर्ग सीएसआर (कंपनी सोशल रेस्पांसबिलिटी) यानी ऐसे कार्य जिनमें धनराशि के खर्च की आवश्यकता तो है मगर उसके लिए सरकार की योजना या बजट के इंतजार की जरूरत न हो। तीसरा वर्ग शासन-प्रशासन यानी ऐसे कार्य जिसमें बड़े बजट की जरूरत हो और उस पर शासन-प्रशासन स्तर से ही कदम उठाया जा सकता हो।
राउंड टेबल कांफ्रेंस में आमंत्रित किए गए प्रमुख शख्सियतों ने अपने-अपने स्तर से बहुत से लक्ष्य को स्वयं चुना और उसे कुछ ही समय में पूरा करने का वादा भी किया। पांच पिलर्स की आरटीसी के बाद 35 सुझाव-लक्ष्य मिले। हालांकि बाद में सीमित लक्ष्यों को चिह्नित करके उस पर बढऩे को कदम बढ़ाया गया।

बुधवार को जिले के सभी दलों के जनप्रतिनिधि, अलग-अलग क्षेत्रों में खास मुकाम रखने वाले प्रतिष्ठित लोग व प्रशासनिक-पुलिस अधिकारी 11 लक्ष्यों को आत्मसात करने को हिस्सा लेंगे। अपने विचार रखेंगे, लक्ष्य तय करेंगे, रास्ते सुझाएंगे-रास्ते चुनेंगे।

 

By Gaurav Tiwari