आज कई मायनों में मेरठ की अर्थव्यवस्था दूसरे शहरों की तुलना में ठीक है, लेकिन यह सरकारी उदासीनता के बावजूद संभव हुआ है। अगर सरकार मेरठ की अर्थव्यवस्था को अपने एजेंडे में रखती और आवश्यक मूलभूत सुविधाएं देती तो यहां की औद्योगिक तस्वीर और बेहतर होती। समय अब भी हमारे हाथ से निकला नहीं है, अब से भी इस ओर ध्यान दिया जाए और उद्यमियों, औद्योगिक आस्थानों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बने तो सात समंदर पार तक दो-चार नहीं मेरठ के दर्जनों ब्रांड धूम मचा दें। मेरठ की अर्थव्यवस्था की चमक फैले।

यह निष्कर्ष है विचार मंथन का। मौका और मंच था दैनिक जागरण के 'माय सिटी माय प्राइड' कार्यक्रम के तहत राउंड टेबल कांफ्रेंस का। अर्थव्यवस्था विषय पर दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के बिजनेसमैन, अर्थशास्त्री, व्यापारी और प्रबुद्धजनों ने समस्याओं, चुनौतियों के साथ समाधान भी रखे।

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जानकारों ने कहा कि युवाओं को सही दिशा दिखाने की जरूरत है। इससे जहां कुशल कामगार बनेंगे वहीं वे इस शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसकी खातिर हमें एक मंच पर आना होगा और सबकी सहभागिता से इसे साकार करना होगा। राउंड टेबल कांफ्रेंस में शहर के सभी गणमान्य लोगों ने एक राय जताते हुए कहा कि बहुत पहले से ही सभी को एक साथ आकर शहर के विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए थे। इसके लिए सरकार की तरफ न देखने के बजाय खुद से पहल करना जरूरी है। जिससे हम अपने यहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकें। शहर का खेल उद्योग हर दिन आगे बढ़ रहा है। यहां के खेल उत्पाद से देश ही नहीं विदेशों के खिलाड़ी भी खेल रहे हैं। शहरवासियों को भी अपने अंदर बदलाव लाने की जरूरत है। वहीं इंडस्ट्री को भी अपने यहां कामगारों को कुशल बनाने के लिए ट्रेनिंग देने की जरूरत है।

 

कांफ्रेंस मे कहा गया कि युवाओं को भी आगे आने की जरूरत है। आज हमारी सबसे बड़ी कमजोरी शहर का कूड़ा या कहें वेस्ट मैटेरियल है। इसे अवसर में बदला जा सकता है। गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने वाली युवा उद्यमी सना खान ने बताया कि अगर सोच सही है और कुछ कर गुजरने की चाहत हैं तो चुनौतियां कम नहीं जिन्हें अवसर में बदला जा सके।

शहर के युवाओं को कुशल बनाने के लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोलने पर विचार किया गया। वहीं पानी बचाने के लिए कांफ्रेंस में कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। इंडस्ट्री में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर पैनल लगाने की तरफ कदम बढ़ाया गया। वहीं युवाओं को स्वरोजगार क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं को समझाने के लिए पैनल बनाने पर भी विचार किया गया। जिससे युवा वर्ग को इधर-उधर भटकना न पड़े।

वाइब्रेट इकोनॉमी इंडेक्स में पांचवे नंबर पर था मेरठ
कांफ्रेंस में स्टैग इंटरनेशनल के निदेशक राकेश कोहली ने मेरठ मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक सर्वे का हवाला देते हुए अचंभित कर दिया। उन्होंने बताया कि आज से 20 साल पहले एक सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि 'पर कैपिटा ओनरशिप ऑफ फोर व्हीलर' के मामले में मेरठ पहले स्थान पर था। वहीं उन्होंने यह भी बताया कि एक बार किसी विदेशी कंपनी ने वाइब्रेंट इकोनॉमी इंडेक्स जारी किया था जिसमें मेरठ को पांचवीं रैंक मिली थी। यह दर्शाता है कि मेरठ की बुनियाद कभी कमजोर नहीं रही। यह सभ्रांत क्षेत्र है, बस जरूरत है तो थोड़ी मदद की। यहां की आधारभूत सरंचना बेहतर हो जाए, कनेक्टिविटी दुरुस्त हो, कानून-व्यवस्था ठीक हो, अफसरशाही की लालफीताशाही खत्म हो तो हमारे विकास की रफ्तार ऐसी होगी कि दूसरों के लिए हम आदर्श बन जाएंगे।

श्रेणियों में बांटकर अर्थव्यवस्था को करेंगे मजबूत
शहर में होने वाले विकास को फलक तक पहुंचाने के लिए राउंड टेबल कांफ्रेंस में तीन श्रेणियों में बांटा गया। ऐसे कार्य जो आम लोग स्वयं के प्रयास और भागीदारी से कर सकते हैं उसे जनसहयोग श्रेणी में रखा गया। वे कार्य जो अपने स्तर से किए तो जा सकते हैं लेकिन ज्यादा धनराशि की जरूरत है फिर भी उस राशि के लिए शासन की योजना या निकायों के इंतजाम का इंतजार न किया जाए, उन्हें दूसरी श्रेणी सीएसआर कंपनी सोशल रेस्पांसिबिलिटी में रखा गया। वे कार्य जो शासन और प्रशासन के स्तर से ही हो सकते हैं और अधिक धनराशि की जरूरत भी हो उसे तीसरी श्रेणी शासन-प्रशासन स्तर में रखा गया।

नागरिकों की सहभागिता से ये होगा
-किसानों को नवीन उपकरणों की जानकारी दी जाएगी। जिससे वह ठीक ढंग से खेती करें। लागत कम हो, संसाधन भी बचे और उत्पादकता बढ़े।
-इंडस्ट्री में कुशल कारीगरों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हेल्थ और सेफ्टी कार्यक्रम आयोजित कराए जाएंगे।
-मुद्रा लोन सहित अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और उसके तहत आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए पैनल गठित होगा।

सीएसआर फंड से संवारेंगे शहर
-इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन और चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के बीच युवाओं के लिए ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाने का प्रस्ताव रखा गया।
-इंडस्ट्रीज सहित अन्य स्थानों पर रेन वॉटर हार्वेंस्टिंग और सोलर पैनल लगाने पर हुआ विचार।
-शहर को बढ़ावा देने के लिए वर्ष में कम से कम खेल का एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन कराने पर सहमति बनी।

शासन-प्रशासन से मांग
-मेरठ की रोड कनेक्टिविटी ठीक हो रही है। एयर कनेक्टिविटी इसी वित्त वर्ष में मिले, इसकी खातिर सरकार तक जोर-शोर से मांग पहुंचाने का प्रस्ताव तय हुआ। साथ ही रेल यातायात को पटरी पर जाने की भी बात उचित फोरम तक ले जाने की बात हुई।

राउंड टेबल : अतिथियों के विचार

भाजपा के पूर्व विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, " गोल्ड सिटी की लड़ाई मैंने लड़ी। यहां एशिया का सबसे बड़ा सेंटर है मेरठ। मैंने यहां गोल्ड टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव रखा था। कारीगरों को प्रशिक्षित करने के सरकारी सेंटर मेरठ में अधिकतर बंद हैं या बेकार हैं। सिर्फ जेलचुंगी पर सिंडिकेट बैंक का सेंटर चल रहा है। वहां से कुशल कारीगर निकल रहे हैं। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी मेरठ का हक है और इसे दिलाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हूं। कोशिश सफल हुई तो मेरठ को स्पोर्ट्स कॉलेज भी मिल जाएगा।

स्टैग इंटरनेशनल के निदेशक राकेश कोहली का कहना है कि स्पोटर्स में संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं। पहले पैसा नहीं था लेकिन अब सरकार ने इस तरफ काफी ध्यान दिया है। पिछले कुछ सालों में इस फिल्ड में डिमांड है। मेरठ से दिल्ली की कनेक्टिवटी में भी तेजी से सुधार होगा। रैपिड रेल और एक्सप्रेस-वे के आने से काफी सकारात्मक असर होगा। वहीं पानी बचाने के लिए सभी इंडस्ट्री को रेन वॉटर हार्वेंस्टिंग लगाने होंगे। हमें खुद भी समाधान निकालना होगा तभी हम आगे बढृ सकते हैं।

हमारे यहां कई टॉप ब्रांड है लेकिन रेल और हवाई नेटवर्क ठीक न होने के कारण परेशानी बढ़ी है। हालांकि पिछले दिनों में रैपिड रेल आने की खबरों से दिल्ली से मेरठ की दूरी कम होगी। हम भी दिल्ली के बराबर खड़े होंगे। इससे शहर के साथ यहां की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। ये कहना है नेल्को स्पोर्ट्स के निदेशक अंबर आनंद का।

युवा उद्यमी रोबिन त्यागी ने कहा, "हमेशा खुद पर विश्वास हो तो शहर और देश आगे बढ़ जाता है। युवाओं को स्वरोजगार की तरफ कदम बढ़ाने होंगे। हमने किसानों को उपयोगी जानकारी देकर काफी लाभ दिया है। इसके लिए हमने हैलो किसान एप भी लांच की। जिसके माध्यम से सभी जानकारी दी जा रही है।"

युवा उद्यमी कपिल शर्मा ने कहा, "खादी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। जिसे हमने सच करके दिखाया है। छोटा सा उद्योग शुरू किया था लेकिन आज मुझे खुशी है कि मैंने भी देश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी की है। हमें स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आना होगा। इससे देश के साथ आने वाले युवाओं को दिशा मिलेगी।"

मेरठ मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुर जग्गी ने कहा, "रैपिड और मेट्रो की बात हो रही है। इंडस्ट्री यहां कम है लेकिन फिर भी हम रफ्तार के साथ चल पड़े हैं। बस एक बार दिशा मिल जाए तो सब ठीक रहेगा। पहले तो मुझे लगता ही नहीं था कि कैसे यहां रह पाएंगे।"

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के क्षेत्रीय चेयरमैन संजीव मित्तल ऩे बताया, "हमारे शहर में डेवलपमेंट हुआ है। लेकिन इसकी रफ्तार धीमी है। हम सब प्रयास कर रहे हैं। हम शुरू से पीछे रहे लेकिन अब आगे चलना होगा। अवसर हमारे पास अपार है। सरकार सहयोग मिले तो हमारी ऊर्जा का और बेहतर ढंग से इस्तेमाल हो सकता है।"

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अनुराग अग्रवाल का कहना है कि गुड गवर्नेंस न होने की वजह से इंडस्ट्री नहीं बढ़ पा रही है। छोटी इंडस्ट्री लगाना बहुत कठिन है। जिला उद्योग बंधु की बैठक सिर्फ नाम के लिए होती है। मंडलीय उद्योग बंधु बैठक का भी यही हाल है। हमें सबको साथ चलना होगा, तभी विकास होगा।

महिला उद्यमी सना खान ने कहा, "हमारी फर्म 200 टन वेस्ट से वर्मी कंपोस्ट बनाती है। 50-60 टन प्रति महीने वर्मी कंपोस्ट तैयार करते हैं। इसके लिए कच्चा माल इक्ट्ठा करने को हमने खुद ठेकेदार लगाए हुए हैं। इंडस्ट्री की उन्नति के लिए शहर का विकास बहुत जरूरी है। युवा लघु उद्योग से जुड़े। वहीं युवाओं को कूड़े में समस्या नहीं अवसर ढूंढना होगा।"

मेरठ कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज सिवाच कहते हैं, "जैसा देश वैसा भेष...हम दिल्ली प्रवेश करते ही सीट बेल्ट लगा लेते हैं। यही मानसिकता होनी चाहिए। ईमानदारी ही हमेशा आगे बढ़ाती है। एनसीआर में होने के बावजूद इंडस्ट्री पीछे रह गई। जालंधर से ज्यादा हमारा एक्सपोर्ट रहा लेकिन फिर भी हम पीछे रह गए। यह क्रांतिधरा है, यहां अमर क्रांति ज्योति जलनी चाहिए। जिससे बाहर से आने वाले लोग भी शहर आएं।

इस सरकार ने व्यापारियों पर खासा ध्यान दिया है। मेरठ के नाम को भी पहचान मिली है। शहर में खेल, हैंडलूम, कैंची, रेवड़ी-गजक मशहूर है। धीरे-धीरे तेजी से विकास की ओर अब शहर बढ़ रहा है। सरकार ने भी मेरठ की परिवहन व्यवस्थाओं की तरफ जोर दिया है। ये कहना है संयुक्त व्यापार संघ में महामंत्री अरुण वशिष्ठ का।

चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. एचएस सिंह ने कहा कि युवा उद्यमशीलता नहीं होगी तो शहर पीछे चला जाएगा। इंडस्ट्री और शहर के विकास के लिए युवाओं को आगे आना होगा। नहीं तो एक बार फिर देश बुजुर्ग की श्रेणी में गिना जाने लगेगा। इस विषय पर हमें ध्यान देने की जरूरत है।

संयुक्त व्यापार संघ में मंत्री मनीष शर्मा ने कहा, "जरूरत है भ्रष्टाचार खत्म करने की। कुछ भी काम कराने जाओ तो अटक जाता है। इसके लिए एक सार्वजनिक नंबर जारी करना होगा। अगर कोई परेशान करे तो हम उस नंबर पर कॉल कर सकें और हमारी समस्या का निदान हो।

राजेश भारती पेशे से कोचिंग संचालक हैं. उनका मानना है कि शहर में इनोवेशन की कमी है। रिसर्च-डेवलपमेंट पर काम नहीं होता। यही वजह है हमारी इंडस्ट्री आगे नहीं बढ़ सकी है। एक ही वस्तु को सदियों तक बेचना चाहते हैं। इसी वजह से यहां युवा टिक नहीं पाता।

रिटायर्ड कर्नल व कोचिंग संचालक अमरदीप त्यागी ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों से उन्नति होगी। देश की प्रगति में ऐसे कार्यक्रम सहायक होंगे। जिससे युवा पीढ़ी को आगे निकलने का मौका मिलेगा। युवाओं को भी ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होकर देश के विकास में सहयोग देना होगा।

वेस्टर्न यूपी चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व इंडस्ट्री सेक्टर से ही मिलता है। इसके बावजूद भी विकास थमा हुआ है। अब जरूरत है सबको साथ लाने की। इसके लिए सरकार को जगाना होगा। तभी कुछ इस क्षेत्र की नैया पार लग सकती है।

शेयर ब्रोकर और मेरठ जिला क्रिकेट संघ के राकेश गोयल ने कहा कि हमें युवाओं को स्वरोजगार देने के लिए सरकार की योजनाओं को समझाने के लिए पैनल बनाना चाहिए। जैसे की मुद्रा लोन दिलाने के लिए पैनल बनाना चाहिए। जिससे युवाओं का अपना स्वरोजगार करने के लिए लोन आसानी से मिल सके।

मेरठ डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के अध्यक्ष विनेश जैन ने कहा कि हम शहर में कोई इवेंट नहीं करा पाते। हमारे यहां के स्पोटर्स स्टेडियम का भी उपयुक्त इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। मेरठ में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं का आयोजन बंद हो चुका है। इसे पुन: शुरू करने की जरूरत है।

बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के सर्वेश सर्राफ का कहना है कि शहर में मल्टीलेवल पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं हवाई उड़ान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए हम हाल ही में नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री से मिले। उन्होंने इस पर हमें आश्वासन दिया है।

 

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By Krishan Kumar