जागरण संवाददाता, मेरठ

आंकड़े गवाह हैं कि जितने लोगों की मौत असाध्य रोगों से नहीं होती, उससे कहीं अधिक लोग सड़क हादसों में दम तोड़ देते हैं, अपंग हो जाते हैं। यह खबरें या सूचनाएं दूसरों को पता नहीं कितना बेचैन करती हैं, लेकिन मेरठ के अमित नागर को ऐसी ही खबरों ने झकझोरा। आंखों के सामने घटते हादसे, छोटी-सी भूल पर जीवनभर की अपंगता का दर्द देखा तभी ठान लिया कि सड़क पर चलने के नियम-कायदे को अगर हम जान लें तो जरूर हालात बदलेंगे। अमित ने कोशिश की और आज तस्वीर बदलती हुई दिख भी रही है।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

दरअसल, सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए अमित नागर ने छह अप्रैल 2011 को 'मिशिका एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी' का गठन किया। शहर कोतवाली के रहने वाले अमित शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने और लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए नवंबर 2014 में मेरठ ट्रैफिक पुलिस के साथ यातायात माह में जुड़े। 30 सितंबर 2015 को यातायात आयुक्त की ओर से मेरठ व सहारनपुर मंडल में रोड सेफ्टी क्लब चलाने की मान्यता मिली।

 

अब तक 40 स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब की स्थापना की। 21 जून को इसी साल शहर के देवनागरी इंटर कालेज में पहला 'आदर्श रोड सेफ्टी ऑडिटोरियम और आदर्श ट्रैफिक पार्क' बनाया। इसमें हर दिन 60 स्कूली बच्चों को ढाई घंटे की ट्रैफिक ट्रेनिंग कार्यशाला कराई जा रही है। इसके अलावा शहर के वाहन चालकों के साथ ही ट्रैफिक पुलिस के जवानों, प्रशासनिक व अन्य विभागीय वाहन चालकों को भी सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बढ़ने लगी ट्रैफिक जागरूकता

स्कूलों में बनाए जा रहे रोड सेफ्टी क्लब में एक नोडल टीचर की अगुवाई में 23 लोगों की टीम बनाई जा रही है। इसमें एक एंबेसडर, एक प्रीफेक्ट और 20 मॉनिटर हैं। सबसे पहले इन बच्चों को ट्रैफिक ट्रेनर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। इसके बाद यही बच्चे अपने-अपने स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों के अलावा घरों में परिजनों को जागरूक कर रहे हैं।

वर्तमान में मेरठ में 20 स्कूलों में रोड सेफ्टी क्लब बन चुके हैं। इसके अलावा बागपत व सहारनपुर में भी 10-10 रोड सेफ्टी क्लब बनाए जा चुके हैं। जल्द ही हापुड़ व बुलंदशहर में भी 10-10 रोड सेफ्टी क्लब बनाए जाएंगे। इन क्लबों के बनने से स्कूलों में बिना हेलमेट दुपहिया वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

मिशिका एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी के चेयरमैन अमित नागर ने कहा कि ट्रैफिक के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करना बाकी है। हमारी योजना ट्रैफिक नियमों के पालन में मेरठ को देश का मॉडल बनाने की है। अगली पीढ़ी सीखने लगी है। अब जरूरत वर्तमान पीढ़ी के जागरूक होने की है। वे भी साथ देने लगे तो इसका असर रास्तों पर दिखने लगेगा।

शहर में बढ़ी हैं ट्रैफिक गतिविधियां
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी कहते हैं कि रोड सेफ्टी क्लब की टीम के जुड़ने के बाद शहर में ट्रैफिक जागरूकता से संबंधित गतिविधियां काफी बढ़ी हैं। बच्चे परिजनों को सीट बेल्ट और हेलमेट के लिए टोकने लगे हैं। दुपहिया वाहन चलाने वाले स्कूली बच्चों में बिना गियर वाले वाहन की लाइसेंस बनाने के लिए आवेदन भी अधिक होने की संभावना है।

स्कूलों ने भी इस ओर ध्यान दिया है और बच्चों को जागरूकता कार्यक्रमों में प्रतिभाग करा रहे हैं। इससे ट्रैफिक प्रबंधन का काम आसान हो रहा है। चौराहों पर मैनेजमेंट में मदद मिली है। अच्छी बातें लोग देरी से ग्रहण करते हैं लेकिन आशा है कि आने वाले दिनों में मेरठ के रास्तों पर इस मुहिम का व्यापक असर दिखेगा। 

कदम बढ़े तो जुड़ने लगा संसाधन
ट्रैफिक जागरूकता की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए संसाधनों की जरूरतों को पूरा करने में जिला प्रशासन का पूरा सहयोग मिला। अमित नागर के अनुसार विभाग की ओर से शहर में ट्रैफिक एंजिल, ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर, ट्रैफिक ट्रॉमा, ट्रैफिक क्रेन आदि मुहैया कराए गए हैं। आदर्श ट्रैफिक पार्क बनाने में भी हर तपके ने पूरा सहयोग दिया। अब तक हुए प्रयासों का असर स्कूलों और बच्चों पर दिखने लगा है। अब बड़ी चुनौती लोगों को इससे जोड़ने और उन्हें ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए तैयार करने की है। इस साल के अंत तक मेरठ मंडल में 100 रोड सेफ्टी क्लब बनाने का लक्ष्य है।

मेरठ में कम हुई सड़क दुर्घटना में मौतें
संभागीय परिवहन ऑफिसर (आरटीओ) डा विजय कुमार के अनुसार मेरठ में सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2016 में 421, वर्ष 2017 में 417 और वर्ष 2018 में प्रथम पांच महीने में 120 लोगों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हुई है। परिवहन विभाग के मेरठ कार्यालय में 6,54,371 वाहन पंजीकृत हैं।

इनमें 84,372 कारें, 3,81,970 मोटर साइकिल, 1,26,445 स्कूटर सहित अन्य बसें, ऑटो रिक्शा, ट्रैक्टर आदि शामिल हैं। बस, ऑटो व अन्य माल वाहक वाहनों के चालकों के ट्रैफिक टेस्ट में उनकी जानकारी ट्रैफिक नियमों के प्रति बेहद कम देखने को मिली है। अब उन्हें ट्रेनिंग देकर सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जा रहा है। जो नियमों को नहीं मानेगा उससे सारे सर्टिफिकेट वापस भी ले लिए जाएंगे।

अपने शहर को शानदार बनाने की मुहिम में शामिल हों, यहां करें क्लिक और रेट करें अपनी सिटी

By Krishan Kumar