जरूरी नहीं कि शहर में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सरकारी प्रयासों का ही इंतजार किया जाए। निजी स्तर की कोशिशें भी सकारात्मक परिणाम ला सकती हैं। ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं जागरूक नागरिक एसोसिएशन के महासचिव गिरीश शुक्ला। एक तरफ लोग धरती की कोख खाली करते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ उनका प्रयास रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट बनवाकर भूजल से कोख को भरना है। चुनौतियों के बावजूद वह इस प्रयास में काफी हद तक सफल होते जा रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस प्रयास का सकारात्मक परिणाम दिखेगा और उसका लाभ जिले को मिलेगा।

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जल पुरुष से प्रभावित होकर हार्वेस्टिंग यूनिट पर शुरू किया काम

शास्त्रीनगर के एच ब्लॉक निवासी गिरीश शुक्ला जागरूक नागरिक एसोसिएशन के माध्यम से शहर को मूलभूत सुविधा दिलाने के प्रयास में जुटे रहते हैं। बैंक की नौकरी से सेवानिवृत्त 68 वर्षीय गिरीश रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट स्थापित कराने में 10 साल से प्रयासरत हैं। धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों में यूनिट स्थापित करा चुके हैं। वह बताते हैं कि इसकी प्रेरणा उन्हें 2006 में जलपुरुष राजेंद्र सिंह से मिली।

जलपुरुष के मिशन से प्रभावित होकर उन्होंने जल संरक्षण के लिए हार्वेस्टिंग यूनिट बनवाने को मिशन बनाया। उनका मानना है कि लोग जानते हैं और पैसा भी खर्च करना चाहते हैं, लेकिन उनका मार्गदर्शन करने वाला कोई नहीं। ऐसे में उन्होंने इसके निर्माण के लिए अगुवाई करने की योजना बनाई। इसी बीच उनकी भेंट पूर्व आईएएस प्रभात राय से हुई। उनका सहयोग पाकर जागरूक नागरिक एसोसिएशन अस्तित्व में आया। वह यूनिट बनाने में अपनी टीम के साथ मार्गदर्शन करते हैं। यही नहीं वह पौधरोपण का भी रिकॉर्ड बना चुके हैं। पॉलीथिन के खिलाफ भी वह जबरदस्त अभियान चला चुके हैं।

इनकी मुहिम से संस्थानों में बनते जा रहे हार्वेस्टिंग यूनिट

उनकी मुहिम का असर यह पड़ा कि जिले के धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को मिलाकर अब तक 70 स्थानों पर यूनिट बनाई जा चुकी है। जिस तरह से राजेंद्र सिंह ने राजस्थान में मंदिर से शुरुआत की थी उसी तरह से उन्होंने भी हार्वेस्टिंग यूनिट की स्थापना का कार्य सबसे पहले रामा संकीर्तन मंदिर से किया। यूनिट स्थापित करने वालों को जल मित्र का पुरस्कार भी देते हैं। हाल ही में उन्होंने शास्त्रीनगर के दिगंबर जैन मंदिर में यूनिट का निर्माण कार्य पूरा कराया है।

इसी तरह से जब उन्होंने अपनी कॉलोनी के लाल बहादुर शास्त्री पार्क को स्थानीय लोगों की मदद से विकसित करके दिखा दिया तो उन्हें अन्य कॉलोनी की सोसाइटियों ने भी आमंत्रित किया। इस तरह से वह पांच पार्क विकसित कर चुके हैं। उनके पॉलीथिन के खिलाफ अभियान का भी असर दिखाई दे रहा है। कभी उन्होंने इसके विरोध में 20 हजार जूट आदि से बने बैग वितरित किए थे, अब वही अभियान शहर में अन्य लोग चला रहे हैं।

मेरठ और प्रदेश को बचाने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण

भूजल बोर्ड के एक आंकड़े के अनुसार मेरठ में प्रतिवर्ष 91 सेमी भूजल गिर रहा है। यह प्रदेश में सबसे अधिक है। इस भयावह स्थिति को सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट की स्थापना जरूरी है। भूजल रिचार्ज के लिए ही भवन में हार्वेस्टिंग यूनिट अनिवार्य किया गया है, इसी शर्त पर नक्शा पास होता है, लेकिन असलियत में इसका पालन नहीं होता है। मेरठ के गिने-चुने सरकारी भवनों में ही हार्वेस्टिंग यूनिट है।

लोग कहते थे फालतू काम के लिए पैसे क्यों लगाएं

अब तक भले ही 70 यूनिट बनवा दिए गए हों, लेकिन यह काम आसान नहीं था। उन्होंने शुरुआत में जब लोगों को समझाना शुरू किया और धरती में जल पहुंचाने के प्रति जागरूक करते तो लोग महत्व देते थे, लेकिन जब लोग यह सुनते कि उन्हें इसके लिए धनराशि खर्च करनी पड़ेगी तो लोग मना कर देते थे। इसे फालतू काम कहते थे। खैर यह चुनौती अब भी है, लेकिन दूसरों को देखकर लोग तैयार हो जाते हैं। हालांकि उनका मानना है कि इसका सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। वह कहते हैं कि यदि मेरठ में ही बड़ी मात्रा में वर्षा जल को धरती में पहुंचा दिया जाए तो इसका फर्क जिले पर ही नहीं एनसीआर पर भी पड़ेगा।

संसाधन मिले तो हर जगह बनवा दें हार्वेस्टिंग यूनिट
गिरीश शुक्ला का कहना है कि संसाधन बड़ी समस्या है। धन के अभाव में कार्य नहीं हो पाता। यदि मशीन और मानव संसाधन मिले तो वे शहर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट का जाल बिछा दें।

अगर ऐसा हो तो बदलेगी तस्‍वीर
'जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज पर जागरूक करने के बाद भी लोग स्वयं हार्वेस्टिंग यूनिट बनाने को आगे नहीं आते। जबकि यूनिट के निर्माण से ही भूजल रिचार्ज के लक्ष्य को पाया जा सकता है। इसलिए मैंने इस तरह ध्यान दिया। पहले लोगों को समझाता हूं। उसके फायदे बताता हूं और बेहद कम लागत में उसका निर्माण अपनी टीम के सहयोग से कराता हूं।'

- गिरीश शुक्ला, जागरूक नागरिक एसोसिएशन

By Krishan Kumar