जागरण संवाददाता, मेरठ 

शुरुआत अच्छी हो तो उसके आधे काम को भी पूरा समझना चाहिए। दैनिक जागरण का 'माय सिटी माय प्राइड अभियान' भी कुछ ऐसे ही लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। इसके लिए इसके नेतृत्‍वकर्ता लगातार प्रयास में जुटे हैं, जो जल्द ही शहर के गर्व में योगदान देने को हाजिर होगा।

'माय सिटी माय प्राइड अभियान' के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर पिलर के अंतर्गत राउंड टेबल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें लक्ष्य रखा गया था कि शहर में कोई एक ऐसी सड़क चुनी जाए जिसे एक किमी तक ठंडी सड़क के रूप में तब्दील कर दिया जाए। ऐसी सड़क जहां छायादार पेड़ों के नीचे यात्री सुकून के पल बिता सके।

पर्यावरण व रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट की स्थापना के लिए काम करने वाले गिरीश शुक्ला को इसका नोडल बनाया गया था। इस कार्य को अंजाम देने के लिए वह सर्वे कर रहे हैं। बिजली बंबा बाईपास को उन्होंने प्रथम दृष्टया चुना लेकिन इस सड़क का भविष्य में चौड़ीकरण होना है, इसलिए इसे खारिज करके अन्य विकल्प तलाशे गए। शहर की कई सड़कें खारिज हुईं। अब मवाना रोड पर रविवार को एक सड़क का सर्वे किया जाएगा। यहां छायादार पौधे रोपने के लिए पौधे भी संरक्षित कर लिए गए हैं।

चौथे शनिवार को उद्यमी बताएंगे गुर
'माय सिटी माय प्राइड अभियान' के तहत अर्थव्यवस्था पिलर के अंतर्गत लक्ष्य रखा गया था कि भावी उद्यमियों को प्रेरित किया जाए। ऐसे में तय हुआ कि मैनेजमेंट के छात्रों व अन्य युवा जो उद्यम के प्रति सीख लेना चाहते हैं उन्हें एक प्लेटफार्म दिया जाए। इसका जिम्मा मेरठ मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकुर जग्गी को दिया गया।उन्होंने इस लक्ष्य के तहत कदम आगे बढ़ाया है।
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव तनुज गुप्ता से उनकी बात हुई है। एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में हर महीने के चौथे शनिवार को एक विशेष वार्ता आयोजित की जाएगी। इसमें शहर के बड़े उद्यमी अपनी सफलता की कहानी, उद्यम में आने वाली कठिनाई आदि साझा करेंगे। इसके साथ ही कुछ मोटिवेशनल स्पीकर भी आमंत्रित किए जाएंगे। इसकी शुरुआत अगले महीने यानी अक्टूबर से हो जाएगी।

बिना मशक्कत के ही तैयार हो जाएगी कम्पोस्ट
माय सिटी माय प्राइड अभियान के तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर पिलर के अंतर्गत लक्ष्य रखा गया था कि पार्कों का संरक्षण करने वाले महेश रस्तोगी शहर के अन्य लोगों की भी मदद करेंगे। उन्होंने पार्क की पत्तियों व कूड़े से कम्पोस्ट बनाने का तरीका निकाल लिया है। बिना किसी मशक्कत के कम्पोस्ट बन जाएगी। इससे पौधे के लिए खाद मिल जाएगी और कूड़ा भी नहीं फैलेगा। इसके साथ ही वह लोगों को पार्क के रख-रखाव का भी तरीका बताएंगे।
 

By Krishan Kumar