मनुष्य को गुणदर्शी बनना चाहिए... दोषदर्शी नहीं : भाव भूषण

मेरठ, जेएनएन। हस्तिनापुर के दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे शांतिनाथ विधान के 16वें दिन भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई। बुधवार को विधान में 80 परिवारों ने भाग लिया। विधान के दौरान धर्म सभा में मुनि भाव भूषण महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि दोषदर्शी न बनें, बल्कि गुणदर्शी बनें। सज्जन और दुर्जन में क्या अंतर है? सज्जन वह है जो अपने ही दोष देखता है, दूसरों के नहीं। दुर्जन वो है, जिसे अपनी कमियां नहीं दिखती, केवल औरों के अवगुण ही दिखते है। उन्होंने कहा कि अपनी जीभ पर नियंत्रण रखें। इस वाणी के द्वारा ही आप जन-जन के दिलों में अपना स्थान बना भी सकता है और मिटा भी सकता है। वाणी के जरिए ही ये मानव जन-जन तक पहुंच सकता है। अत: संभलकर बोले। जीवन एक सफर है‚ इस सफर को प्रसन्नता पूर्वक पूरा करें। शांतिधारा रामभूल जैन,‚ संजीव जैन‚, विजय जैन‚, नितिन जैन, शाश्वत जैन आदि ने की। विधान की मांगलिक क्रियाएं विधानाचार्य आशीष जैन शास्त्री ने संपन्न कराई। सांय के समय भगवान की महाआरती की गई व रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विधान में अध्यक्ष जीवेंद्र जैन‚, महामंत्री मुकेश जैन‚, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन,‚ महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन‚, अशोक कुमार जैन‚ व उमेश जैन आदि रहे।

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