मेरठ, [प्रदीप द्विवेदी]। क्या आप नहीं चाहते कि एमडीए से जो आपने मानचित्र पास कराया है उससे थोड़ा बढ़ाकर निर्माण करने की छूट मिल जाए। और उसका शुल्क भी न देना पड़े। आप यह भी चाहते होंगे कि आपके घर की बिजली की खपत कम हो जाए। जेठ की गर्मी और सितंबर की उमस परेशान न करे? पानी की खपत कम हो ताकि जलकर भी कम देना पड़े और आपकी वजह से नालियां न उफनाएं। इस सबका समाधान है ग्रीन होम। जी हां। ये सारे फायदे एक साथ मिल सकते हैं बस थोड़ा-सा सचेत होना पड़े और जो काम आप करते आ रहे हैं उसे भी थोड़ा एक प्रक्रिया के तहत करना पड़ेगा। सबसे काम की बात यह है कि अगर घर पहले से बना है तब भी इसका लाभ उठा सकते हैं। इतना लाभ मिल रहा है तो थोड़ा कष्ट वाली बात भी जान लीजिए। इस तरह का घर बनाने में आपका खर्च बढ़ जाएगा करीब 10 फीसद। लेकिन जाे फायदा आप दशकों तक पाएंगे उसके आगे यह एक बार का 10 फीसद अतिरिक्त खर्च का बोझ सहना ही बेहतर है।

एफएआर में एमडीए पांच फीसद देता है छूट

अगर आप ग्रीन होम बना रहे हैं या बनाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको ग्रिहा काउंसिंल यानी ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट एसेसमेंट का प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा। इस प्रमाण के हासिल करने पर एमडीए आपको पांच फीसद की अतिरिक्त छूट एफएआर में देगा। यानी एमडीए के जिस नियम के तहत आपके पड़ोसी थोड़ा भी अतिरिक्त निर्माण नहीं कर सकते, पर आप पांच फीसद अतिरिक्त निर्माण खुल्लमखुल्ला कर सकते हैं। एमडीए के टाउन प्लानर विजय सिंह का कहना है कि अब बड़े शहरों में लोग ग्रीन होम कांसेप्ट का प्रयोग कर रहे हैं। मेरठ में भी ऐसा घर बनाने के लिए छूट दी जाती है।

बिजली की 30 और पानी की होगी 50 फीसद बचत

अगर आप ग्रीन होम कांसेप्ट से अपना आशियाना बनाते हैं तो यह बड़ा फायदा पहुंचा देगा। इससे करीब 30 फीसद बिजली की बचत होगी। अगर किसी की 30 फीसद बिजली आज की महंगाई में बच जाए तो समझिए उससे समझदार कौन होगा। यही नहीं 50 फीसद पानी की भी बचत होगी। धरती पर पानी बचाने की चिंता तो कोई कर नहीं रहा उसे इस हिसाब से सोच लीजिए कि कुछ समय बाद पानी खर्च पर मीटर लगने वाला है तब यह भी भारी पड़ेगा।

ये हैं ग्रीन होम के बड़े फायदे

-खिड़कियों से धूप आए पर सीधी धूप न पड़े। इसलिए खिड़की पर छज्जा होना चाहिए।

-गार्डन और खुली जगह हो।

-छत व बालकनी में हरे-भरे पौधे लगे हों।

-कम पानी की खपत वाले पौधे हों

-फव्वारा व एलईडी लाइट लगी हों।

-अधिकांश उपकरण सोलर प्लांट से संचालित हों।

-रेन वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट हो।

-पानी को रिसाइकिल करने के उपकरण व तकनीक हों। यह तो अब वैसे भी करना पड़ेगा क्योंकि एमडीए ने डुअल पाइप सिस्टम अनिवार्य कर दिया है।

-बिजली से संचालित सभी उपकरण स्टार रेटिंग वाले हों। जैसे कि एसी आपकी पाइव स्टार रेटिंग की हो।

-कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था हो। कोई प्लांट नहीं लगाना होता। एक बाल्टी में भी घर के कूड़े की खाद बना सकते हैं। जिसका प्रयोग अपने गमले मे कर सकते हैं।

-पर्यावरण फ्रेंडली 'लो वीओसी पेंट' का प्रयोग हो। इस पेंट से सूर्य की रोशनी का ज्यादा फर्क दीवार को गर्म होने पर नहीं पड़ता।

-डबल गेज विंडो होनी चाहिए यानी फ्रेम दो शीशे वाले होने चाहिए।

-नया घर बना रहे हैं फ्लाईऐश की ईंट का प्रयोग करें पुराना घर है तो उसका दूसरा तरीका है। एएसी की एक नई दीवार बनानी होगी। इसमें भी ज्यादा धन खर्च नहीं होता पर सीधे तौर पर घर का तापमान बढ़ने से रोकती है।

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