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दैनिक जागरण यूथ कनेक्ट: कठिन सही रास्ते का करें चुनाव, आसान गलत का नहीं', GOC सुमित राणा का मेरठ के विद्यार्थियों को मंत्र

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Tue, 27 Oct 2026 06:36 PM (IST)

मेजर जनरल सुमित राणा ने दैनिक जागरण के 'यूथ कनेक्ट' कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने चरित्र, अनुशासन ...और पढ़ें

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबाेधित करते जीओसी मेजर जनरल सुमित राणा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबाेधित करते जीओसी मेजर जनरल सुमित राणा।  

HighLights

  1. यूथ कनेक्ट में पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया के जीओसी मेजर जनरल सुमित राणा ने विद्यार्थियों को दिया सफलता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण का मंत्र

  2. 10 स्कूलों के 20 विद्यार्थियों ने किया संवाद, हजारों विद्यार्थियों ने स्कूलों से लाइव जुड़कर सुने अनुभव, सेना में करियर, एआइ, नेतृत्व आदि पर हुई चर्चा।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सफलता केवल अच्छे अंक, बुद्धिमत्ता या शारीरिक क्षमता से नहीं मिलती, बल्कि मजबूत चरित्र, अनुशासन, सत्यनिष्ठा, दृढ़ संकल्प और निरंतर सीखने की आदत से मिलती है। जीवन में जब आसान गलत और कठिन सही के बीच चुनाव करना पड़े, तो कठिन सही रास्ते को चुनना चाहिए। यही व्यक्ति के चरित्र की असली परीक्षा है।

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यह संदेश पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया के जनरल आफिसर कमांडिंग (जीओसी) मेजर जनरल सुमित राणा ने मंगलवार को दैनिक जागरण के ‘यूथ कनेक्ट’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को दिया।

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कार्यक्रम से ऑनलाइन जुडे़ सेंट मेरीज के विद्यार्थी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश सब एरिया मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में 10 स्कूलों के 20 विद्यार्थी प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। उन्हीं स्कूलों के हजारों विद्यार्थी आनलाइन माध्यम से अपने-अपने विद्यालयों से कार्यक्रम से जुड़े। विद्यार्थियों ने जीओसी से करियर चयन, नेतृत्व क्षमता, असफलताओं से उबरने, नैतिक मूल्यों, आधुनिक तकनीक और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर सवाल पूछे। मेजर जनरल सुमित राणा ने अपने सैन्य जीवन के अनुभवों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का जवाब दिया।

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कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल हुईं सोफिया स्कूल की छात्राएं। 

यूथ कनेक्ट का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों से रूबरू कराना और उन्हें करियर और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों के लिए प्रेरित करना है। मेजर जनरल राणा ने अपने संबोधन को व्यक्तिगत गुणों, कौशल विकास, राष्ट्र निर्माण में योगदान, समय प्रबंधन और सशस्त्र सेनाओं में करियर जैसे प्रमुख विषयों के इर्द-गिर्द रखा।

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कार्यक्रम से ऑनलाइन जुड़ीं एमपीजीएस की छात्राएं शिक्षिकाओं के साथ। 

कहा कि आज के विद्यार्थियों के सामने करियर के पहले से कहीं अधिक विकल्प हैं। ऐसे में अपनी रुचि पहचानने के साथ व्यक्तित्व और कौशल को मजबूत बनाना भी जरूरी है।

मेजर जनरल सुमित राणा ने कहा कि चरित्र का अर्थ केवल दूसरों के सामने अच्छा व्यवहार करना नहीं है। असली चरित्र तब सामने आता है, जब कोई व्यक्ति बिना निगरानी के भी सही काम करता है। परीक्षा में दूसरे विद्यार्थी की उत्तर पुस्तिका देखकर नकल करने के बजाय अपनी तैयारी के आधार पर उत्तर लिखना ईमानदारी और आत्मसम्मान का उदाहरण है। उन्होंने चरित्र निर्माण के लिए ईमानदारी, अनुशासन, सम्मान, साहस और जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताया।

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कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल ब्रेन्ज एडु वर्ल्ड स्कूल के विद्यार्थी। 

असफलता से डरें नहीं, उससे सीखें

जीओसी ने कहा कि कोई भी सफलता असफलता के अनुभव के बिना पूरी नहीं होती। असफलता मिलने पर निराश होकर रुकने के बजाय तीन सवाल पूछने चाहिए-क्या हुआ, क्यों हुआ और इसे बेहतर कैसे कर सकते हैं? इन सवालों के जवाब व्यक्ति को अपनी कमियों की पहचान करने और दोबारा बेहतर तैयारी के साथ आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

उन्होंने ‘रेजिलिएंस’ यानी असफलता से उबरने की क्षमता को व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण गुण बताया। उनके अनुसार असफलता स्थायी नहीं होती और न ही सफलता हमेशा बनी रहती है। असफलता से सीखकर खुद को दोबारा तैयार करना और फिर बेहतर प्रदर्शन करना ही वास्तविक प्रगति है। उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता की उम्मीद के साथ मेहनत करने की सलाह दी।

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कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल गार्गी गर्ल्स स्कूल गंगानगर की छात्राएं। 

एआइ ज्ञान का विकल्प नहीं, सहायक बने

आधुनिक तकनीक और कौशल विकास पर चर्चा करते हुए जीओसी ने विद्यार्थियों को विश्लेषणात्मक सोच, तर्कशक्ति, समस्या समाधान, रचनात्मकता और नवाचार पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहने या रटकर परीक्षा पास करने से वास्तविक ज्ञान विकसित नहीं होता। विद्यार्थियों को हर विषय में ‘कैसे’ के साथ ‘क्यों’ समझने की आदत डालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), चैटजीपीटी और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए करें, न कि अपने ज्ञान की जगह लेने के लिए। तकनीक तभी उपयोगी है, जब व्यक्ति उसका उपयोग करना जानता हो और उसके पास विषय की बुनियादी समझ हो।

विकसित भारत के लिए जिम्मेदार नागरिक बनें

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर उन्होंने कहा कि किसी देश की सबसे मूल्यवान संपत्ति उसकी मानव पूंजी होती है। मजबूत नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों वाले नागरिक ही देश को समृद्ध बनाते हैं। युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनने, पर्यावरण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और सोच-समझकर जोखिम लेने की आदत विकसित करनी चाहिए।

इंटरनेट मीडिया पर किसी बात को देखकर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय 30 सेकंड रुककर सोचने की आदत डालनी चाहिए। इससे आवेश में लिए जाने वाले गलत फैसलों से बचा जा सकता है।

सेना में करियर को भी प्राथमिकता दें

मेजर जनरल राणा ने विद्यार्थियों से सशस्त्र सेनाओं में करियर के विकल्पों पर भी विचार करने का आग्रह किया। कहा कि करियर का चुनाव व्यक्तिगत रुचि और आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए, लेकिन सेना एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अनुशासन, नेतृत्व, टीमवर्क और राष्ट्रसेवा के अवसर मिलते हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता। जरूरी है कि लक्ष्य के प्रति सत्यनिष्ठ रहें और लगातार प्रयास करते रहें।

मेजर जनरल सुमित राणा ने कहा कि विद्यार्थी ही देश का भविष्य हैं। बड़े सपने देखें, अपनी क्षमता पर विश्वास रखें और उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी से मेहनत करें। दैनिक जागरण के संपादकीय प्रभारी रवि प्रकाश तिवारी ने मेजर जनरल सुमित राणा को प्रतीक चिन्ह भेंट करते हुए आयोजन में सहभागिता के लिए सेना और सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों का आभार प्रकट किया।