मेरठ, जेएनएन। खेल के बाद टेक्सटाइल उद्योग मेरठ की अर्थव्यस्था की रीढ़ है। प्रिंटिंग इंडस्ट्री और पावरलूम इकाइयों से जुड़े कुल लोगों का आंकड़ा पांच से छह लाख के बीच है। इसमें प्रेस करने वाले से लेकर, टेलर और बड़े-बड़े कारखानों के मालिक शामिल हैं। कोरोना की मार इस इंडस्ट्री पर भी पड़ी है। यार्न, कलर और पैकिंग मैटीरियल में खासी बढ़ोतरी दो माह में हुई है। चूंकि मेरठ से चादरों और बेड लिनेन के रूप में पूरे देश में मैटीरियल सप्लाई होता है। व्यापारियों का कहना है कि उनका करोड़ों रुपया दूसरे राज्यों के व्यापारियों के यहां फंसा है। कोरोना महामारी की बात कह कर सप्लाई किए माल की रकम देने की रकम देने को तैयार नहीं हैं। व्यापारियों का करोड़ों रुपया भारत के विभिन्न राज्यो के व्यापारियों के यहां पर फंसा हुआ है। 

इन्होंने कहा कि...

टेक्सटाइल उद्योग में प्रयोग होने वाले कच्चे माल पर जीएसटी 18 से 28 प्रतिशत है। आइटीसी के रूप में बड़ी रकम जीएसटी विभाग में फंसी रहती है। इसे जल्द दिलाने की व्यवस्था की जाए।

- नवीन अरोड़ा, पूर्व प्रधान, हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ

टेक्साइटइल इकाई में कर्मचारियों की भागीदारी अधिक होती है। कंपनी में 20 कर्मचारी होने पर पीएफ जमा करना अनिवार्य है। यह संख्या 50 की जाए ताकि

कोरोना काल में उद्यमी पर बोझ न पड़े।

- राजीव गोयल, अध्यक्ष, हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ

कोरोना काल के पहले और बाद में व्यापारियों ने जीएसटी अदा कर दूसरे राज्यों में माल सप्लाई कर दिया। पर पेमेंट नहीं आने से व्यापारी की हालात बेहद तंग हैं। सरकार को बजट में ऐसी नीति बनानी चाहिए इस तरह पेमेंट न देने वालों पर कार्रवाई हो।

- सुरेश गोयल, कपड़ा व्यापारी, खंदक बाजार

कताई मिल परिसर में टेक्सटाइल पार्क बनाया जाए। साथ ही आयकर के ढ़ाई लाख के स्लैब को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाए।

- मदन लाल अरोड़ा, अध्यक्ष, मेरठ वस्त्र निर्माता एसोसिएशन

ये हैं प्रमुख मांगें

- दो माह में यार्न में 20 प्रतिशत, कलर और केमिकल में 15 प्रतिशत और पैकेज‍िंग आयटम में 30 प्रतिशत की तेजी आई है। कीमतें कम करने के लिए सरकार उपाय करे

- मेरठ का व्यापारी टैक्स देकर माल दूसरे राज्यों के व्यापारियों को भेजता है। अगर व्यापारी निश्चित समय में पेमेंट नहीं देते तो उनके खिलाफ कार्रवाई का नियम बनाया जाए।

- मेरठ में टेक्सटाइल पार्क का निर्माण किया जाए।

- पावर लूम इकाइयों में बिजली की दरों का मामला जल्द निस्तारित किया जाए। 

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