मेरठ, जेएनएन : आज देश के सामने अंग्रेजी की कोई चुनौती नहीं है। भाषा बातचीत का जरियाभर है। हमारी भाषा किसी भी तरह से कमजोर नहीं है, उसके मूल्य सिद्धांत ज्यादा मजबूत हैं। देश को फिर से सोने की चिड़िया बनने के लिए मैकाले की मानसिकता को छोड़ने की जरूरत है। चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय में ज्ञानोत्सव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ सिंह ने ये बातें कही।

विवि के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में उन्होंने कहा कि वह खुद कांवेंट से पढ़े। फिर भी अपने परिवार और देश के परिवेश को अपने साथ रखा। केंद्रीय मंत्री ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो में दिए भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि हिदू धर्म की सबसे बड़ी खासियत है कि वह सभी धर्मो को समान मानता है, इससे विश्व भी मान गया कि हिदू धर्म ही बड़ा धर्म है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पढ़ो, रटो और बोलो तक सीमित नहीं है। कुछ लोग भारत में रहकर पाश्चात्य की नकल करने लगते हैं। लार्ड मैकाले की सोच को छोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में नेहरू मैकाले के उपनिवेश वाली सोच से कहीं न कहीं प्रभावित थे, जिससे भारतीयता का इनोवेशन पीछे रह गया। आजादी से पहले कालोनियम और आजादी के बाद मा‌र्क्सवादी विचारधारा ने प्रभावित किया। अब माहौल बदला है। इन विचारों से लोग बाहर आ रहे हैं। पुलवामा की घटना हो या कोई शहीद होता है तो आज पूरे देश में कैंडल मार्च निकलता है, तिरंगा लेकर लोग निकलते हैं। यह परिवर्तन पहले नहीं देखा गया था। 2019 का चुनाव राष्ट्रवाद पर लड़ा गया। मैकाले जैसी मानसिकता पर राष्ट्रवाद का सही नींव डालने का समय आ गया है। अंग्रेजी शिक्षा से नहीं चरित्र निर्माण के दम पर आगे बढ़ा जा सकता है। ज्ञानोत्सव में किया गया मंथन उस दिशा में एक कदम है। इस मौके पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने शिक्षा में नवाचार पर प्रकाश डाला। कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने अध्यक्षीय भाषण दिया। मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर पहुंचे

कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आने वाले थे। उनके प्रतिनिधि के तौर पर वह आए हैं। सीएम का आदेश मिलने पर नर्वस था, लेकिन यहां आकर लगा कि शिक्षा में नवाचार का अनूठा प्रयास किया जा रहा है।

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