खादी महोत्सव : परंपरागत परिधान ही नहीं, कुछ खास चाहिए तो प्रदर्शनी में आइये... उपलब्ध हैं लुभावनी शिल्प
मेरठ में 10 दिवसीय खादी महोत्सव का भव्य उद्घाटन हुआ, जिसमें राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए। ...और पढ़ें

खादी महोत्सव और प्रदर्शनी में अपने उत्पाद दिखाते दुकानदार। जागरण
HighLights
मेरठ में 10 दिवसीय खादी महोत्सव का भव्य उद्घाटन हुआ।
प्रदर्शनी में विविध राज्यों के खादी, रेशम, हस्तकला उत्पाद।
पीतल हुक्का, लखीमपुर के चमड़े के उत्पाद मुख्य आकर्षण।
जागरण संवाददाता, मेरठ। खादी और ग्रामोद्योग विभाग के 10 दिवसीय खादी महोत्सव और प्रदर्शनी का शनिवार को भव्य समारोह के बीच राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों के खादी, रेशमी, गर्म कपड़ों के साथ साथ अन्य प्रसिद्ध सामग्री के स्टाल सजाए गए हैं। जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया तथा अन्य प्रदेशों से पहुंचे व्यापारियों को सम्मानित किया।
खादी को परंपरा से जोड़कर रोजगार का माध्यम बनाने और ग्रामोद्योग से जुड़े उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष खादी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पीएमश्री राजकीय इंटर कालेज के मैदान में आयोजित दस दिवसीय महोत्सव और प्रदर्शनी का राज्यसभा सदस्य डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी, कैंट विधायक अमित अग्रवाल, सिवालखास विधायक गुलाम मोहम्मद, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज और महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।
प्रदर्शनी का भ्रमण करके उन्होंने यहां पहुंचे व्यापारियों के उत्पादों की सराहना की तथा व्यापारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान आरजी इंटर कालेज की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। महात्मा गांधी पुरस्कार योजना के अंतर्गत खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली इकाइयों को पुरस्कृत भी किया गया। सीडीओ नूपुर गोयल और परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी मान्या चतुर्वेदी ने अतिथियों का स्वागत किया।
खादी, रेशम और क्राकरी है प्रदर्शनी में खास
मान्य चतुर्वेदी ने बताया कि प्रदर्शनी में खादी के परिधानों के साथ बनारसी, रेशमी साड़ियां, कश्मीरी शाल, कई स्थानों की प्रसिद्ध क्राकरी और सूखे मेवे समेत कई उत्पाद आकर्षण का केंद्र हैं। अलग-अलग क्षेत्रों से आए उत्पादों के माध्यम से लोगों को देश की विविध हस्तकला और पारंपरिक उत्पादन से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। स्वदेशी कारोबार को भी मजबूती मिल रही है।
महापौर ने चलाया चरखा
प्रदर्शनी के बीचोबीच गांधी मंडप बनाया गया है। जिसमें चरखा लगाया गया है। जिसे चलाकर आम लोग चरखे का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। उद्घाटन के बाद प्रदर्शनी के भ्रमण के दौरान महापौर हरिकांत अहलूवालिया समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी चरखा चलाकर देखा।
मुरादाबाद का छह ईंच का पीतल का हुक्का बना आकर्षण
पीतल नगरी मुरादाबाद में एक जिला एक उत्पाद भी पीतल की सामग्री ही है। शबनम हैंडीक्राफ्ट का स्टाल लेकर अशरफ मेरठ पहुंचे हैं। अशरफ की संस्था के उत्पाद देशभर में सप्लाई हो रहे हैं। उनका छह ईंच का पीतल का हुक्का प्रदर्शनी में आकर्षण का केंद्र बना है। अशरफ ने बताया कि 20 साल से उनका परिवार यह काम करता है। अब दूसरे मैटल के तैयार उत्पादों को भी पीतल के रंग में रंगकर उनपर आकर्षक चित्रकारी भी की जा रही है। जो कि लोगों को खूब पसंद आ रही है।
पश्चिम बंगाल के हस्तनिर्मित चिकन के कपड़ों का स्टाल लेकर पहुंचे अली हसन
पश्चिम बंगाल के हुगली के रहने वाले अली हसन भी इस बार प्रदर्शनी में हस्तनिर्मित चिकन के कपड़े लेकर पहुंचे हैं। उनकी संस्था एस एस चिकन सेंटर हस्तनिर्मित साड़ी, लेडीज सूठ, कुर्ता, बेडशीट समेत कई प्रकार के उत्पाद तैयार करती है। अली हसन ने बताया कि उनके उत्पाद प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बरेली की प्रदर्शनी में स्टाल लगाया था। वहीं से उन्हें मेरठ का आमंत्रण मिला है।
पसंद आ रहे लखीमपुर के चपड़े के बैग और जूते
लखीमपुर की संस्था कृष्णा चर्मकला का भी स्टाल इस बार प्रदर्शनी में लगा है। संचालक लोकेंद्र ने बताया कि वे असली चमड़े के बैग, हैंडबैग, जूते, बेल्ट, सैंडिल, पर्स आदि का निर्माण कराते हैं। बड़ी बड़ी कंपनियां उन्हें आर्डर देती हैं। उनके द्वारा तैयार उत्पाद को वे अपने नाम से बाजार में बिक्री करती हैं। उनके उत्पाद की कीमत कम है और जीवन लंबा है। मेरठ में पिछले साल भी उन्हें अच्छा व्यापार मिला था।
