विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'जिन्होंने पढ़ा नहीं, वही कर रहे वंदे मातरम् का विरोध', खरगे के बयान पर पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र का पलटवार

By Anand Prakash Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Wed, 19 Aug 2026 04:35 PM (IST)

पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध संसद के बनाए कानून का उल्लंघन है और ऐसे ...और पढ़ें

सीसीएसयू में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र।

सीसीएसयू में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र।

HighLights

  1. बोले- वंदे मातरम का विरोध संसद के बनाए कानून का उल्लंघन।

  2. विरोध करने वालों को संसद में रहने का अधिकार नहीं।

जागरण संवाददाता, मेरठ। पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि वंदे मातरम का विरोध करना संसद के बनाए कानून का उल्लंघन है, ऐसा करने वाले को संसद में रहने का अधिकार नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर कहा कि जिन लोगों ने वंदे मातरम को ठीक से पढ़ा नहीं है, वह इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि पूर्व में कांग्रेस के अधिवेशन में भी वंदे मातरम का गायन होता रहा है।

बुधवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के अटल सभागार में राधे श्याम चैरिटेबल फाउंडेशन की ओर से वंदे मातरम 150 वर्ष स्मरण उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि वंदे मातरम के सभी छह छंदों में भारत माता का वर्णन है, भारत सिर्फ भूखंड नहीं बल्कि चैतन्य स्वरूप भारत माता है।

उन्होंने कहा कि 1920 में पहली बार मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम का विरोध किया था और कहा था कि यह उनके मजहब के खिलाफ है, तब वोटों के तुष्टिकरण की राजनीति के चलते 6 के स्थान पर दो छंद के वंदेमातरम को अनुमति दी गई। उन्होंने कहा कि संविधान ने भी वंदे मातरम को राष्ट्रगीत माना है, इसका विरोध करने वाले अपराधी के समान है।

वहीं युवाओं को लेकर कलराज मिश्र ने कहा कि आज का युवा एक जागरूक सोच रखता है और नवाचार में विश्वास करते हुए देश की तरक्की में भागीदार बन रहा है। जिन लोगों को विदेशी ताकतों का सहयोग मिल रहा है सिर्फ वही अराजकता कर रहे हैं। देश के प्रति नकारात्मक सोच रखने वाले ही नक्सली दिमाग हैं।

इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री असीम अरुण, राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी, कुलपति संगीता शुक्ला, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और राधेश्याम चैरिटेबल फाउंडेशन के महासचिव सौरभ त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आरंभ वंदे मातरम और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ जबकि समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।