मेरठ, जेएनएन। अगर पेट और पैर में सूजन बढ़ रही तो सावधान। इसे सामान्य पीलिया मानकर खतरा न मोल लें। संभव है कि पेट में पानी भर गया हो। ये लिवर सिरोसिस के लक्षण हैं, जो कैंसर का भी कारण है। हेपेटाइटिस-ई शरीर में दो माह तक पड़ा रह सकता है। लिवर फेल होने से मरीजों के दिमाग में अमोनिया चढ़ने से वो बेहोश भी हुए।

जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. सुशील गुप्ता का कहना है कि टायफायड से ज्यादा पीलिया के मरीज बढ़ गए हैं। पानी में घुलते प्रदूषण से पेट की जानलेवा बीमारियां उभरी हैं। खासकर, इस मौसम में हेपेटाइटिस ए बच्चों और हेपेटाइटिस ई वयस्कों, गर्भवतियों व बुजुर्गो में ज्यादा मिल रहा है। कई महिलाओं का गर्भपात हो गया। मेडिकल कालेज की फिजिशियन डा. योगिता सिंह ने बताया कि भोजन-पानी की गंदगी, कटे-फटे फलों का रस लेने से पीलिया बढ़ा है। शुगर के मरीजों व एल्कोहल लेने वालों में रिस्क ज्यादा है।

पेट में सूजन तो कराएं अल्ट्रासाउंड

हेपेटाइटिस ए-ई के मरीजों में उल्टी, दस्त, हल्का बुखार, थकान व आंखों में पीलापन पीलिया का लक्षण मिलता है। किंतु दो माह तक पीलिया बने रहने से करीब दस फीसद मरीजों में सिरोसिस का रिस्क है। डा. सत्यार्थ चौधरी ने बताया कि एक्यूट लिवर फेल्योर भी देखा जा रहा है। इसमें खून में अमोनिया बढ़ने से मरीज बेहोश हो सकता है। खून पतला होने से जरा सा छिलने पर भी रक्तस्राव नहीं रुकता है।

इनका कहना है........

गर्मी की तुलना में बारिश में हेपेटाइिटस ए-ई के मरीज बढ़ जाते हैं। आंखें व नाखून पीले पड़ते हैं। बाजार में कट-फटे फल न खाएं। हाथ धोकर ही भोजन करें। पानी को उबालकर पिएं। तला हुआ भोजन कतई न करें। पीलिया हो तो खूब आराम करें।

-डा. योगिता सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग, मेडिकल कालेज

बच्चों में हेपेटाइटिस-ए और वयस्कों में हेपेटाइटिस-ई के मरीज ज्यादा हैं। ए से लिवर सूजन में उल्टी-दस्त, बुखार व पेट दर्द होगा, जबकि ई से लिवर फेल्योर का रिस्क है, जिसमें शरीर में अमोनिया बढ़ने से ये दिमाग पर चढ़ जाती है। मरीज बेहोश होकर गंभीर स्थिति में पहुंच सकते हैं। पेट में पानी भर जाता है। पानी भी उबालकर पिएं।

-डा. सत्यार्थ चौधरी, पेट व उदर रोग विशेषज्ञ

Posted By: Jagran

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