बुलंदशहर, जागरण संवाददाता। स्याना क्षेत्र के बसी बांगर गांव में कुत्तों के हमले से तो भले ही तेंदुए (गुलदार) के दो माह के शावक को बचा लिया गया हो, लेकिन चिड़ियाघर में जगह न होना उसकी जान पर भारी पड़ रहा है। हालांकि जिले में पशु चिकित्सक उपचार कर रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारी देखभाल कर रहे हैं, लेकिन अनुकूल माहौल और बेहतर उपचार नहीं मिलने के कारण उसका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है।

पशु प्रेमी ने कुत्तों के हमले से बचाया

शनिवार देर शाम स्याना के गांव बसी बांगर में कुछ कुत्तों ने शावक को घेर लिया था। पशु प्रेमी ने उसे कुत्तों के हमले से बचाया। वन विभाग के साथ प्रशासन को शावक मिलने की सूचना दी गई। वन विभाग की टीम ने शावक को कब्जे में लिया है। वन विभाग ने शावक की मां की तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। कुत्तों के हमले से शावक चोटिल है। उसके पैर में अंदरूनी चोट लगी है।

हमले से भयभीत और मां से बिछड़ने के कारण शावक शांत

हमले से भयभीत और मां से बिछड़ने के कारण शावक शांत है। चिकित्सकों ने उसे गाय का दूध और मुर्गे का कीमा खिलाने की सलाह दी है, लेकिन वह कुछ खा-पी नहीं रहा है। साथ ही उसे दौरे भी पड़ने लगे हैं। ऐसे में कानपुर चिड़ियाघर के अलावा वाइल्ड लाइफ के चिकित्सकों से भी सलाह ली जा रही है। शावक को कानपुर चिड़ियाघर भेजने के लिए वाइल्ड लाइफ के निदेशक से संपर्क किया गया है, लेकिन वहां चिड़ियाघर में जगह नहीं होने की सूचना मिलने पर फिलहाल इसे वलीपुरा नहर के गेस्ट हाउस में रखा गया है।

इन्होंने कहा...

चिकित्सालय के संसाधनों के अनुसार शावक का उपचार किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञों से भी सलाह ली जा रही है। आंतरिक चोट लगने के कारण धीरे-धीरे सुधार होगा। परिस्थिति भी शावक के अनुकूल नहीं है, इसलिए सेहत के सुधार में समय लगेगा।

मेघ श्याम, डिप्टी सीवीओ, सदर

शावक को उपचार दिलाया जा रहा है। साथ ही प्रदेश के किसी भी चिड़ियाघर में पहुंचाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसके लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क किया जा रहा है, ताकि उसका जीवन सुरक्षित किया जा सके।

राधेश्याम, प्रभारी डीएफओ

Edited By: Parveen Vashishta